Ghost Element: ब्रह्मांड का ‘घोस्ट एलिमेंट’: न्यूट्रिनो से लेकर डार्क मैटर तक – अदृश्य कण, रहस्यमयी तारे और वह सच्चाई जो अंतरिक्ष विज्ञान को हिला रही है..
जब भी विज्ञान में “घोस्ट एलिमेंट” या “घोस्ट पार्टिकल” शब्द का प्रयोग किया जाता है, तो इसका आशय किसी सामान्य रासायनिक तत्व से नहीं होता। यह नाम उन रहस्यमयी और लगभग अदृश्य कणों के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जो हमारी दुनिया के आर–पार गुजरते रहते हैं लेकिन हमें उनकी मौजूदगी का एहसास तक नहीं होता। इन्हीं कणों में सबसे प्रमुख हैं – न्यूट्रिनो, जिन्हें वैज्ञानिक “घोस्ट पार्टिकल” की संज्ञा देते हैं।
न्यूट्रिनो: अदृश्य मेहमान जो हर पल हमारे भीतर से गुजर रहा है
न्यूट्रिनो मूलभूत कणों की उस श्रेणी में आते हैं, जिनमें इलेक्ट्रॉन की तरह संरचना होती है, लेकिन इन पर कोई विद्युत आवेश नहीं होता और इनका द्रव्यमान लगभग शून्य के बराबर माना जाता है। यही कारण है कि ये पदार्थ के साथ बहुत ही कम प्रतिक्रिया करते हैं। ये पृथ्वी, दीवारों, पहाड़ों और यहाँ तक कि मानव शरीर के आर–पार भी बिना किसी रुकावट के निकल जाते हैं।
वैज्ञानिकों के अनुसार, हर सेकंड अरबों न्यूट्रिनो सूर्य में चल रही नाभिकीय संलयन प्रक्रियाओं, सुपरनोवा विस्फोटों और दूरस्थ आकाशगंगाओं में हो रही हिंसक घटनाओं से निकलकर हमारे शरीर के भीतर से गुजर जाते हैं — और हमें इसका ज़रा भी आभास नहीं होता।
न्यूट्रिनो को पकड़ना क्यों है असंभव जैसा?
क्योंकि ये कण केवल ‘कमज़ोर नाभिकीय बल’ के माध्यम से प्रतिक्रिया करते हैं, इसलिए इन्हें पकड़ना किसी चमत्कार से कम नहीं है। इसी वजह से वैज्ञानिकों ने ज़मीन के सैकड़ों मीटर नीचे विशाल डिटेक्टर बनाए हैं, जहाँ आसपास के शोर–प्रभाव कम हों। जापान का सुपर–कामिओकांडे (Super-Kamiokande) जैसे डिटेक्टर अरबों लीटर शुद्ध पानी से भरे जाते हैं ताकि इन अदृश्य कणों के किसी एक टकराव को भी दर्ज किया जा सके।
डार्क मैटर: वह अदृश्य शक्ति जो ब्रह्मांड को बाँधे हुए है
‘घोस्ट एलिमेंट’ की दूसरी व्याख्या डार्क मैटर से जुड़ी है। डार्क मैटर कोई रोशनी नहीं छोड़ता, न ही उसे सोखता है, इसलिए वह किसी भी टेलीस्कोप से दिखाई नहीं देता। फिर भी वैज्ञानिक मानते हैं कि ब्रह्मांड के कुल द्रव्यमान का अधिकांश हिस्सा इसी अदृश्य पदार्थ से बना है। यही वह ताक़त है जो आकाशगंगाओं को बिखरने से बचाए हुए है।
वैज्ञानिकों का अनुमान है कि डार्क मैटर किसी अज्ञात कण से मिलकर बना हो सकता है, जैसे कि WIMPs (Weakly Interacting Massive Particles)। इन कणों की खोज भी न्यूट्रिनो की तरह गहरे भूमिगत प्रयोगशालाओं में की जा रही है, जहाँ इनके सामान्य परमाणुओं से टकराने की दुर्लभ घटनाओं को रिकॉर्ड किया जाता है।
‘घोस्ट स्टार्स’: अदृश्य तारे या अज्ञात महाकाय कण?
कुछ वैज्ञानिक सिद्धांतों में “घोस्ट स्टार्स” की अवधारणा भी सामने आई है। ये ऐसे काल्पनिक पिंड हो सकते हैं जो अत्यधिक भारी तो हैं, लेकिन न तो प्रकाश छोड़ते हैं और न ही परावर्तित करते हैं। माना जाता है कि ये ब्रह्मांड के छिपे हुए द्रव्यमान का हिस्सा हो सकते हैं, जिन्हें आज की तकनीक से देख पाना संभव नहीं है।
अन्य वैज्ञानिकों के अनुसार ‘घोस्ट्स’
वैज्ञानिक गोल्डस्टोन बोसॉन्स का कहना है कि -कण भौतिकी में ये वे सैद्धांतिक कण हैं जो स्वतः समरूपता टूटने की स्थिति में उभरते हैं। इन्हें कभी-कभी “गणितीय घोस्ट” कहा जाता है, क्योंकि ये W और Z बोसॉन्स जैसे कणों को द्रव्यमान देने की प्रक्रिया से जुड़े होते हैं।
घोस्ट गैलेक्सी और एक्स–रे घोस्ट्स
खगोल विज्ञान में कुछ अत्यंत धुंधली, दूरस्थ या असामान्य आकृति वाली आकाशगंगाओं को “घोस्ट” नाम दिया गया है। जैसे HDF 130 नामक एक दूरस्थ आकाशगंगा का एक्स–रे अवशेष, जिसे “एक्स–रे घोस्ट” कहा जाता है।
(प्रस्तुति – त्रिपाठी पारिजात)



