Tuesday, February 10, 2026
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Gopal Patha: ‘संदूक नहीं, बंदूक उठाओ’ – कहा था हिन्दू योद्धा गोपाल चंद्र मुखोपाध्याय ने

Gopal Patha जी हैं ये जिनके नाम से ही मुस्लिम लीग के नेताओं की लूंगी में पेशाब हो जाती थी जिनको लोग हिन्दू रक्षक के नाम से भी जानते है...!!

Gopal Patha नाम है उस वीर बांकुरे हिन्दू का जिसने बंगाल में हिन्दुओं पर हुए नरसंहार के खिलाफ बंदूक और तलवार उठाई थी और हमलावर लुटेरों पर ऐसा पलट कर वार किया कि..

 

कलकाता के एक व्यवसायी जिन्होंने १९४६ के कुख्यात सीधी कार्यवाही दिवस के समय हिन्दुओं को दंगाई मुसलमानों से बचाने के लिये ‘भारतीय जातीय बाहिनी’ नामक एक सशस्त्र वाहिनी का निर्माण किया था और हिन्दुओं की रक्षा की थी उनकी कोलकाता में मांस विक्रय की दुकान थी, जिसकी वजह उन्हें पाठा कहा जाता था….!!

16 अगस्त 1946 को कलकत्ता में मुस्लिम लीग के ‘डायरेक्ट एक्शन‘ के घोषणा के बाद कोलकाता की गलियों में मुसलमान गुंडों ने निर्दोष हिन्दुओं की एकतरफा और अकारण हत्या करना शुरु कर दिया यह अत्यन्त भयानक नरसंहार था जिसमें कोलकाता की गलियां शमशान सी दिखने लगी थीं बंगाल के तत्कालीन मुख्यमंत्री हुसैन शाहिद सुहरावर्दी ने भीड़ से बोला था कि वे शहर में हिंदुओ का नरसंहार करो तुम्हारे खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी…!!

हिन्दुओं पर हो रहे अत्याचार को देखकर गोपाल चंद्र मुखोपाध्याय को अत्यन्त पीड़ा हुई वह ‘शठे शाठयम समाचरेत’ अर्थात जैसे को तैसा की नीति के पक्षधर थे उनने अपने साथी एकत्र किये, हथियार और बम इकट्ठे किये, और दंगाइयों को सबक सिखाने निकल पड़े उन्होंने भारतीय जातीय बाहिनी के नाम से संगठन बनाया गोपाल पाठा के कारण मुस्लिम दंगाइयों में दहशत फैल गई और जब हिन्दुओ का पलड़ा भारी होने लगा तो सुहरावर्दी ने सेना बुला ली तब जाकर दंगे रुके गोपाल पाठा ने कोलकाता को मुस्लिमों से बचा लिया…!!

गाँधी जी ने कोलकाता आकर अनशन प्रारम्भ कर दिया उन्होंने खुद गोपाल पाठा को दो बार बुलाया लेकिन गोपाल ने स्पष्ट मना कर दिया तीसरी बार जब एक कांग्रेस के स्थानीय नेता ने प्रार्थना की कम से कम कुछ हथियार तो गाँधी जी सामने डाल दो तब गोपाल ने कहा जब हिन्दुओ की हत्या हो रही थी तब तुम्हारे गाँधी जी कहाँ थे मैंने इन हथियारों से अपने इलाके की हिन्दू महिलाओ की रक्षा की है, मै हथियार नहीं डालूँगा…!!

गोपाल मुखर्जी ने कहा कि हम नहीं चाहते थे कोलकाता में दंगा फैले, लेकिन उनके लाख प्रयासों के बावजूद हिंसा शुरू हो गयी हिंसा के पहले और दूसरे दिन मैंने सबको रोकने की कोशिश की मैंने अपने मुसलमान दोस्तों से भी यह कहा कि हम भाई-भाई की तरह रहते हैं और वैसे ही रहेंगे, हिंसा ठीक नहीं है, लेकिन जब मेरी बात नहीं मानी गई और ‘लड़ के लेंगे पाकिस्तान’ का स्लोगन गूंजने लगा तो मैंने अपने लड़कों को भी तैयार रहने को कहा और उन्हें यह स्पष्ट कर दिया कि अगर वे हमारे एक लोगों को मारेंगे तो हम उनके 10 लोगों को मारेंगे…!!

जब हिंसा के बाद लोग अपने हथियारों को गांधी जी के पास जमा करा रहे थे तो उन्होंने ऐसा नहीं किया इसका कारण यह था कि वह उन हथियारों को अपने पास रखना चाहते थे जिससे वह अपनी बहू-बेटियों की रक्षा की थी वे यह भी बताते हैं कि मैंने अपने लड़कों से यह कहा था कि वे दंगाइयों के अलावा किसी को निशाना ना बनाएं और ना ही महिलाओं के साथ कोई गलत हरकत करें….!!

(अज्ञात वीर)

 

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