Haldi बहुत ज्यादा खाई तो किडनी और लिवर पर बन सकता है खतरा: जानें सुरक्षित मात्रा, जोखिम वाले लोग और WHO की सलाह..
हल्दी भारतीय रसोई और आयुर्वेद दोनों में बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है, लेकिन इसे जरूरत से ज्यादा खाने पर किडनी और लिवर पर गंभीर असर पड़ सकता है। WHO ने भी हल्दी के सुरक्षित सेवन को लेकर दिशा-निर्देश दिए हैं—कौन लोग इसे ज्यादा खाकर नुकसान झेल सकते हैं, और कितनी मात्रा सुरक्षित है, यह समझना जरूरी है।
हल्दी का मुख्य सक्रिय तत्व कर्क्यूमिन होता है।
भारत में हल्दी मसाले के रूप में तो इस्तेमाल होती ही है, साथ ही आयुर्वेद में इसे कई बीमारियों और चोटों में फायदेमंद बताया गया है। इसका कर्क्यूमिन कंपाउंड सूजन कम करने और शरीर को नुकसान पहुंचाने वाले तत्वों से बचाने में मदद करता है। इसलिए चोट लगने पर हल्दी वाला दूध पीने की सलाह दी जाती है। लेकिन जब यही हल्दी जरूरत से ज्यादा खाई जाए या सप्लीमेंट के रूप में बड़ी मात्रा में ली जाए, तो यही शरीर के लिए परेशानी का कारण बन सकती है। इसलिए हल्दी के फायदे जानने के साथ उसकी तय सुरक्षित मात्रा जानना भी बेहद जरूरी है।
कब हल्दी किडनी को नुकसान पहुंचाती है?
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिसिन की एक शोध के अनुसार हल्दी में ऑक्सलेट पाया जाता है। जब यह अधिक मात्रा में शरीर में जाता है, तो पेशाब में ऑक्सलेट बढ़ जाता है। इससे कैल्शियम ऑक्सलेट किडनी स्टोन बनने की संभावना बढ़ती है। जिन लोगों को पहले किडनी स्टोन रह चुका है, उनमें इसका खतरा और ज्यादा होता है।
कुछ रिपोर्टों में यह भी सामने आया है कि जो लोग लंबे समय तक अन्य दवाओं के साथ हल्दी या कर्क्यूमिन सप्लीमेंट की भारी मात्रा लेते हैं, उनमें ऑक्सलेट नेफ्रोपैथी यानी किडनी को नुकसान पहुंचने के मामले भी देखे गए हैं।
कब हल्दी लिवर को नुकसान पहुंचाती है?
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिसिन के अनुसार, रोजमर्रा की सामान्य डाइट में हल्दी ज्यादातर लोगों के लिए सुरक्षित होती है और कई बार यह लिवर की सूजन में राहत भी देती है।
लेकिन पिछले कुछ सालों में लोग हल्दी या कर्क्यूमिन सप्लीमेंट को बहुत अधिक मात्रा में लेने लगे हैं। रिपोर्टों में ऐसे मामलों का जिक्र है जहां लगातार 1 से 4 महीने तक अधिक मात्रा में सप्लीमेंट लेने वालों में:
ड्रग-इंड्यूस्ड लिवर इंजरी
लिवर फेलियर
हेपाटो-रेनल सिंड्रोम
जैसी गंभीर समस्याएं विकसित हुईं।
खासतौर पर तब खतरा बढ़ जाता है जब हल्दी/कर्क्यूमिन सप्लीमेंट में पिपरीन (काली मिर्च का अर्क) मिला हो, क्योंकि इससे कर्क्यूमिन बहुत तेजी से अवशोषित होता है और शरीर पर अधिक प्रभाव डालता है।
हल्दी की सुरक्षित मात्रा और सेफ्टी गाइडलाइन
WHO की गाइडलाइन के अनुसार रोजाना 0–3 mg प्रति किलो शरीर के वजन के हिसाब से कर्क्यूमिन लेना सुरक्षित माना जाता है।
उदाहरण के लिए, 60–70 किलो वजन वाले व्यक्ति के लिए यह मात्रा लगभग 200 mg कर्क्यूमिन प्रति दिन होती है।
भारतीय खाने में, औसतन 2–2.5 ग्राम हल्दी से सिर्फ 60–100 mg कर्क्यूमिन ही मिलता है, जो सुरक्षित माना जाता है।
दैनिक खाना बनाते समय आधा से एक चम्मच हल्दी (2–3 ग्राम) उपयोग करना आमतौर पर हानिकारक नहीं है—बशर्ते कि व्यक्ति को किडनी या लिवर की कोई गंभीर बीमारी न हो।
किन लोगों को हल्दी का अधिक सेवन नहीं करना चाहिए?
निम्न लोगों को हल्दी या कर्क्यूमिन की अधिक मात्रा लेने से बचना चाहिए:
पहले से किडनी रोग वाले
जिन्हें किडनी स्टोन की समस्या हो
जिनमें लिवर डिजीज (जैसे फैटी लिवर, हेपेटाइटिस आदि) है
जिनके पास गॉलब्लैडर स्टोन है
जो लोग ब्लड थिनर, इम्यूनसप्रेसेंट, टैक्रोलिमस या इसी तरह की दवाएं लेते हों
ऐसे सभी लोग बिना डॉक्टर की सलाह के हल्दी-सप्लीमेंट या ज्यादा मात्रा में हल्दी नहीं लें।
कौन-से लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं?
यदि हल्दी या कर्क्यूमिन सप्लीमेंट लेने के बाद इन लक्षणों में से कोई दिखे, तो तुरंत मेडिकल मदद लें:
आँखों या शरीर में पीलापन
पेशाब का बहुत गहरा रंग
अत्यधिक कमज़ोरी या थकान
पेट के दाईं तरफ ऊपरी हिस्से में तेज दर्द
अचानक से किडनी संबंधी परेशानी
(न्यूज़ हिन्दू ग्लोबल ब्यूरो)



