Health: यदि भारत सभी स्वास्थ्य क्षेत्रों में योजनाबद्ध रूप से आगे बढ़ता है, तो 2047 तक हम देश के लिये ही नहीं, पूरी दुनिया के लिए एक आदर्श और प्रेरणादायक वैश्विक स्वास्थ्य सेवा मॉडल पेश कर सकते हैं..
भारत जब अपनी आज़ादी के 79 साल पूरे कर रहा है, तब हमारी स्वास्थ्य सेवा की यात्रा एक प्रेरणादायक कहानी कहती है। 1947 के बाद जब देश महामारी और बीमारियों से जूझ रहा था, तब से लेकर आज तक हमने दुनिया के सबसे तेज़ी से विकसित होने वाले स्वास्थ्य तंत्रों में अपनी जगह बनाई है। पिछले सात दशकों में हमने पिछड़े बुनियादी ढांचे से आगे बढ़कर एक विविध और मजबूत स्वास्थ्य सेवा तंत्र खड़ा किया है।
सरकारी योजनाएं, जैसे आयुष्मान भारत, ने आम लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई है। वहीं, निजी क्षेत्र ने गुणवत्ता, नवाचार और बड़े पैमाने पर सेवाएं देने में योगदान किया है। इन प्रयासों से लोगों की औसत आयु बढ़ी है, शिशु मृत्यु दर कम हुई है और स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा बढ़ा है।
लेकिन अब ज़रूरत है तुरंत और तेज़ कदम उठाने की, क्योंकि आने वाले 20 साल तय करेंगे कि हम वैश्विक मंच पर अपनी अहमियत बनाए रखेंगे या पिछड़ जाएंगे। दुनिया आज ऐसे स्वास्थ्य मॉडल की तलाश में है जो बड़े पैमाने पर लागू हो सके, सभी के लिए सुलभ हो और किसी भी संकट में टिक सके। भारत के पास यह मॉडल देने की क्षमता है, लेकिन इसके लिए हमें टुकड़ों में नहीं, बल्कि एकजुट होकर आगे बढ़ना होगा।
वैश्विक स्वास्थ्य सेवा नेतृत्व के लिए 5 बड़ी प्राथमिकताएं
1. गुणवत्ता को आधार बनाना
भारत में कुछ अस्पताल और संस्थान अंतरराष्ट्रीय स्तर की सेवाएं देते हैं, लेकिन कुल मिलाकर गुणवत्ता असमान है, खासकर बड़े शहरों के बाहर। ज़रूरत है एक राष्ट्रीय और सख्ती से लागू होने वाले मानक ढांचे की, जो सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों पर लागू हो।
इलाज के परिणामों पर आधारित मान्यता (accreditation), तयशुदा क्लिनिकल प्रोटोकॉल, पारदर्शी डेटा और डिजिटल क्वालिटी मॉनिटरिंग को सामान्य बनाना होगा।
2. AI और डिजिटल ढांचे का विस्तार
भारत ने आधार और UPI जैसी योजनाओं से दिखा दिया है कि तकनीक से सार्वजनिक सेवाओं में क्रांति लाई जा सकती है। आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन एक मजबूत आधार है, लेकिन गांवों में इसका इस्तेमाल अभी भी कम है।
AI आधारित जांच, ऑनलाइन परामर्श, और आपस में जुड़ी हुई (interoperable) इलेक्ट्रॉनिक मेडिकल रिकॉर्ड प्रणाली को पूरे भारत में फैलाना होगा, साथ ही डेटा के नैतिक और सुरक्षित इस्तेमाल की गारंटी देनी होगी।
3. मेडिकल वैल्यू ट्रैवल (MVT) को नए सिरे से परिभाषित करना
भारत पहले से ही सस्ती और उच्च-गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाओं के लिए दुनिया का पसंदीदा स्थान है। परंतु हमें सिर्फ ऑपरेशन या इलाज ही नहीं, बल्कि प्रिवेंटिव हेल्थ, प्रजनन क्षमता (fertility), कैंसर (oncology), सौंदर्य चिकित्सा (aesthetics), आयुर्वेद और वेलनेस जैसे क्षेत्रों में भी अपनी पहचान बनानी होगी।
Heal in India पहल में बहुभाषी सहायता, वैश्विक मान्यता, आसान यात्रा प्रबंधन और एकीकृत ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म शामिल होना चाहिए।
4. सिर्फ विस्तार नहीं, नवाचार में निवेश
भारत अभी जेनेरिक दवाओं में विश्व नेता है, लेकिन हमें स्वास्थ्य सेवा में नवाचार का नेता भी बनना होगा।
इसके लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य नवाचार मिशन शुरू किया जा सकता है, जैसे इसरो (ISRO) या डिजिटल इंडिया, जिसमें R&D फंडिंग, बौद्धिक संपदा (IP) सुरक्षा, आसान क्लिनिकल ट्रायल और स्टार्टअप, विश्वविद्यालय और उद्योग के बीच साझेदारी शामिल हो।
लक्ष्य सिर्फ भारत के लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए समाधान तैयार करना होना चाहिए।
5. टिकाऊ निवेश को बढ़ावा देना
2047 का लक्ष्य पाने के लिए बड़े और लंबे समय तक चलने वाले निवेश की ज़रूरत होगी। सरकार ने GDP का 2.5% स्वास्थ्य पर खर्च करने का संकल्प लिया है, जो एक अच्छा संकेत है, लेकिन इसे ज़मीनी स्तर पर लागू करना असली चुनौती है।
निजी क्षेत्र को स्थिर नीतियों, बीमा तक आसान पहुंच और ब्लेंडेड फाइनेंस मॉडल (जैसे नतीजों से जुड़े फंडिंग और हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर बॉन्ड) के ज़रिए प्रोत्साहित करना होगा।
अगर भारत इन सभी क्षेत्रों में संगठित और तेज़ी से आगे बढ़ता है, तो 2047 तक हम न सिर्फ अपने नागरिकों के लिए, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक आदर्श और प्रेरणादायक वैश्विक स्वास्थ्य सेवा मॉडल पेश कर सकते हैं।
(प्रस्तुति -त्रिपाठी इन्द्रनील)