Saturday, March 7, 2026
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Indian Air Defense System: THAAD और आयरन डोम से भी ज्यादा ताकतवर है यह एयर डिफेन्स सिस्टम

Indian Air Defense System: 17000 KM/H की रफ्तार वाला THAAD और आयरन डोम से भी ताकतवर एयर डिफेंस सिस्टम, भारत बढ़ा रहा अपनी सुरक्षा ढाल..

Indian Air Defense System: 17000 KM/H की रफ्तार वाला THAAD और आयरन डोम से भी ताकतवर एयर डिफेंस सिस्टम, भारत बढ़ा रहा अपनी सुरक्षा ढाल..

आज के बदलते वैश्विक हालात में लगभग हर देश अपनी सुरक्षा को लेकर पहले से ज्यादा सतर्क हो गया है। खासकर आसमान से होने वाले हमलों से बचाव के लिए दुनिया भर में देश अरबों-खरबों रुपये खर्च कर रहे हैं। भारत भी अपनी वायु रक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। इसी वजह से देश का सुरक्षा तंत्र रूस से S-400 Triumf एयर डिफेंस सिस्टम की पांच अतिरिक्त यूनिट खरीदने की योजना पर विचार कर रहा है।

बताया जाता है कि पिछले साल हुए सैन्य अभियान Operation Sindoor के दौरान रूसी S-400 प्रणाली ने अपनी क्षमता से सभी को हैरान कर दिया था।

दुनिया में बढ़ते तनाव और युद्ध जैसे हालात को देखते हुए भारत S-400 की पांच और यूनिट खरीदने पर विचार कर रहा है, ताकि देश का एयरस्पेस लगभग अभेद्य सुरक्षा कवच में बदला जा सके।

वैश्विक तनाव के बीच बढ़ी सुरक्षा की चिंता

हाल ही में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। संयुक्त राष्ट्र की सीमित भूमिका और वैश्विक व्यवस्था की कमजोरी को लेकर भी चिंता बढ़ी है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या शक्तिशाली देश अपनी ताकत के बल पर कमजोर देशों पर हमला करने के लिए स्वतंत्र हैं? क्या आज के दौर में आत्मरक्षा पहले और दूसरे विश्व युद्ध के समय से भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है?

इसी वजह से जापान से लेकर यूरोप तक कई देशों ने अपने रक्षा बजट में बड़ा इजाफा किया है। भारत की स्थिति भी अलग नहीं है। देश के पड़ोस में चीन और पाकिस्तान जैसे दो ऐसे देश हैं जिनके साथ पहले युद्ध हो चुके हैं और जिनसे लगातार तनाव बना रहता है।

ऐसे हालात में भारत के लिए जरूरी हो गया है कि वह रक्षा और आक्रमण दोनों मोर्चों पर अपनी क्षमता को मजबूत करे, ताकि संभावित दो-मोर्चा युद्ध जैसी स्थिति से प्रभावी तरीके से निपटा जा सके।

एयर डिफेंस पर भारत का खास फोकस

मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए भारत कई स्तरों पर अपनी सैन्य तैयारियों को मजबूत कर रहा है। खासकर एयर डिफेंस सिस्टम को ज्यादा प्राथमिकता दी जा रही है। इसी दिशा में भारत ने Project Sudarshan Chakra भी शुरू किया है।

इसके साथ ही रूस से S-400 सिस्टम की अतिरिक्त यूनिट खरीदने पर भी विचार किया जा रहा है। भारत पहले ही रूस के साथ पांच S-400 सिस्टम खरीदने का समझौता कर चुका है, जिनमें से तीन यूनिट भारत को मिल चुकी हैं। बाकी दो यूनिट इस साल के अंत तक मिलने की उम्मीद है।

यह योजना ऐसे समय सामने आई है जब हालिया हमलों के दौरान ईरान ने अमेरिकी एयर डिफेंस सिस्टम THAAD की कई यूनिट्स को नुकसान पहुंचाने का दावा किया है।

दूसरी ओर, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तानी मिसाइलें और ड्रोन रूसी S-400 सिस्टम को छू तक नहीं पाए थे। इसके विपरीत इस सिस्टम ने दुश्मन के कई हमलों को नाकाम कर दिया था।

भारत खरीद सकता है 5 और S-400 सिस्टम

भारतीय वायुसेना के प्रस्ताव पर रक्षा खरीद बोर्ड ने रूस निर्मित S-400 Triumf एयर डिफेंस सिस्टम की पांच अतिरिक्त यूनिट खरीदने के प्रस्ताव को शुरुआती मंजूरी दे दी है।

यदि यह सौदा अंतिम रूप लेता है, तो भारत के पास कुल 10 S-400 स्क्वाड्रन हो जाएंगे, जिससे देश की वायु रक्षा क्षमता कई गुना मजबूत हो जाएगी।

रिपोर्ट के अनुसार रक्षा सचिव Rajesh Kumar Singh की अध्यक्षता में हुई रक्षा खरीद बोर्ड की बैठक में इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाने की अनुमति दी गई। अब यह प्रस्ताव Defence Acquisition Council के पास जाएगा, जहां से “एक्सेप्टेंस ऑफ नेसेसिटी” मिलने के बाद लागत पर बातचीत होगी और अंत में Cabinet Committee on Security से अंतिम मंजूरी के बाद सौदा पूरा होगा।

भारत ने 2018 में रूस के साथ लगभग 5.43 अरब डॉलर का बड़ा रक्षा समझौता किया था, जिसके तहत पांच S-400 सिस्टम खरीदने का निर्णय लिया गया था। हालांकि रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिमी प्रतिबंधों के कारण इनकी डिलीवरी में कुछ देरी भी हुई।

S-400 vs THAAD: कौन कितना ताकतवर?

S-400 की मुख्य खूबियां

लगभग 600 किलोमीटर तक रडार डिटेक्शन क्षमता – यह सिस्टम इतनी दूरी से दुश्मन के विमान और मिसाइलों को पहचान सकता है।

400 किलोमीटर तक मार करने की क्षमता – यह लड़ाकू विमान, क्रूज मिसाइल और ड्रोन को काफी दूर से ही नष्ट कर सकता है।

मैक-14 यानी लगभग 17000 KM/H तक की स्पीड वाले टारगेट को इंटरसेप्ट करने की क्षमता – इसलिए यह तेज रफ्तार बैलिस्टिक मिसाइलों के खिलाफ भी प्रभावी है।

एक साथ 80 से 300 तक लक्ष्यों को ट्रैक करने की क्षमता – बड़े पैमाने पर होने वाले हवाई हमलों को भी रोक सकता है।

पूरी तरह मोबाइल सिस्टम – 8×8 भारी वाहनों पर तैनात होता है और सिर्फ 5–10 मिनट में ऑपरेशन के लिए तैयार हो सकता है।

THAAD सिस्टम की मुख्य खूबियां

Hit-to-Kill तकनीक – इसमें पारंपरिक विस्फोटक नहीं होता, बल्कि मिसाइल सीधे लक्ष्य से टकराकर उसे नष्ट करती है।

200 किलोमीटर से ज्यादा दूरी और लगभग 150 किलोमीटर ऊंचाई पर इंटरसेप्शन करने की क्षमता।

इसकी मिसाइल की गति मैक-8 यानी करीब 10000 किमी प्रति घंटा से भी ज्यादा होती है।

इसमें AN/TPY-2 X-Band रडार का इस्तेमाल होता है, जो लंबी दूरी से बैलिस्टिक मिसाइलों को ट्रैक कर सकता है।

एक बैटरी में आमतौर पर 6 लॉन्चर और लगभग 48 इंटरसेप्टर मिसाइलें तैनात की जाती हैं।

फाइटर जेट, ड्रोन और मिसाइल का काल

भारतीय वायुसेना S-400 को दुनिया के सबसे उन्नत वायु रक्षा सिस्टम में से एक मानती है। यह सिस्टम लगभग 400 किलोमीटर तक के दायरे में दुश्मन के विमान, क्रूज मिसाइल, बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन को नष्ट कर सकता है।

सूत्रों के अनुसार ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इस सिस्टम ने कथित तौर पर पाकिस्तान के कुछ लड़ाकू विमान, एक निगरानी विमान और कई मिसाइलों को सीमा से काफी दूर ही निष्क्रिय कर दिया था। इस अनुभव ने वायुसेना को S-400 की तैनाती बढ़ाने के लिए प्रेरित किया।

दूसरी ओर पाकिस्तान ने अपने एयर डिफेंस नेटवर्क में चीन का HQ-9 Air Defence System शामिल किया है। हालांकि भारतीय सुरक्षा सूत्रों का दावा है कि हालिया टकराव में यह सिस्टम अपेक्षाकृत कमजोर साबित हुआ।

मौजूदा हालात में क्यों जरूरी है मजबूत एयर डिफेंस

दुनिया भर में चल रहे संघर्षों ने यह साफ कर दिया है कि आधुनिक युद्ध में ड्रोन, स्वार्म अटैक और लंबी दूरी की मिसाइलें सबसे बड़ा खतरा बन रही हैं। कम कीमत वाले ड्रोन और लुटेरिंग म्यूनिशन को रोकना कई देशों के लिए चुनौती बन गया है। ऐसे में S-400 जैसे मल्टी-लेयर एयर डिफेंस सिस्टम इन खतरों से निपटने में बेहद उपयोगी साबित हो सकते हैं।

भारत के सामने केवल पश्चिमी सीमा की चुनौती नहीं है। चीन के साथ Line of Actual Control (LAC) पर बढ़ती सैन्य गतिविधि और पाकिस्तान की बढ़ती मिसाइल क्षमता भी चिंता का विषय है।

यदि देश में 10 S-400 स्क्वाड्रन तैनात हो जाते हैं, तो इनके जरिए ओवरलैपिंग किल जोन बनाए जा सकते हैं, जिससे प्रमुख एयरबेस, बड़े शहरों और रणनीतिक ठिकानों को बेहतर सुरक्षा मिल सकेगी।

भारत की लॉन्ग-टर्म एयर डिफेंस रणनीति

भारत की दीर्घकालिक योजना एक मल्टी-लेयर एयर डिफेंस सिस्टम तैयार करने की है। इस नेटवर्क में S-400 सबसे ऊपरी और लंबी दूरी की सुरक्षा परत के रूप में काम करेगा। इसके साथ भारत के स्वदेशी सिस्टम जैसे Akash-NG, MRSAM और Project Kusha भी शामिल होंगे।

इन सभी प्रणालियों को एकीकृत नेटवर्क के रूप में विकसित किया जा रहा है, ताकि हाइपरसोनिक हथियारों से लेकर कम ऊंचाई पर उड़ने वाले ड्रोन तक हर तरह के खतरे से निपटा जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत के पास 10 S-400 स्क्वाड्रन हो जाते हैं, तो उसकी वायु रक्षा क्षमता रूस और चीन जैसे बड़े देशों के स्तर के करीब पहुंच सकती है।

यह कदम केवल सैन्य ताकत बढ़ाने का नहीं, बल्कि क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने और संभावित दो-मोर्चा खतरे के खिलाफ मजबूत सुरक्षा ढाल तैयार करने का संकेत भी माना जा रहा है।

(त्रिपाठी पारिजात)

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