Iran Protest – American Attack: ईरान में उबाल, ट्रंप का बड़ा इशारा और ‘मदद आ रही है’ का संदेश: क्या मध्य पूर्व एक नए टकराव की ओर बढ़ रहा है?
ईरान इस समय अपने सबसे बड़े आंतरिक संकट के दौर से गुजर रहा है। देशभर में विरोध प्रदर्शन लगातार तेज होते जा रहे हैं और अब अंतरराष्ट्रीय राजनीति भी खुलकर इसमें शामिल होती दिखाई दे रही है। इस पूरे घटनाक्रम में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों ने हालात को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।
डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कहा कि उन्होंने ईरानी अधिकारियों के साथ होने वाली सभी वार्ताओं को फिलहाल रोक दिया है। साथ ही उन्होंने ईरान के आम नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि उनके लिए “मदद भेजी जा रही है।” हालांकि इस मदद का स्वरूप क्या होगा, इस पर उन्होंने कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी।
ईरानी सरकारी टेलीविजन ने पहली बार यह स्वीकार किया है कि देशभर में चल रहे प्रदर्शनों के दौरान बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई है। वहीं सामाजिक संगठनों का दावा है कि मरने वालों की संख्या 2,000 के पार जा चुकी है।
अमेरिका का रुख लगातार सख्त होता जा रहा है। वॉशिंगटन ईरान में शासन परिवर्तन की दिशा में गंभीरता से कदम बढ़ाता हुआ दिखाई दे रहा है। यही वजह है कि राष्ट्रपति ट्रंप लगातार ऐसे बयान दे रहे हैं, जो प्रदर्शनकारियों को और अधिक उकसाने वाले माने जा रहे हैं।
ईरान संकट से जुड़े दस अहम बिन्दु
राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ईरानियों से कहा कि वे देशव्यापी विरोध जारी रखें और सरकारी संस्थाओं पर नियंत्रण हासिल करें। उन्होंने लिखा कि अत्याचार करने वालों को इसकी भारी कीमत चुकानी होगी और जब तक हत्याएं बंद नहीं होतीं, तब तक सभी वार्ताएं रद्द रहेंगी।
जब ट्रंप से पूछा गया कि “मदद आ रही है” से उनका क्या मतलब है, तो उन्होंने जवाब दिया कि इसका खुलासा बाद में होगा और लोगों को खुद ही यह समझना होगा।
मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, अब तक 2,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जो ईरान के हालिया इतिहास में सबसे भयावह आंकड़ों में से एक है।
ट्रंप ने ऐलान किया है कि ईरान से व्यापार करने वाले किसी भी देश पर अमेरिका 25 प्रतिशत तक का अतिरिक्त टैक्स लगा सकता है।
ईरान के वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी अली लारीजानी ने ट्रंप और इज़रायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू को ईरानी जनता के खिलाफ हिंसा का जिम्मेदार बताया है।
रूस ने अमेरिका पर ईरान के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप का आरोप लगाया है और इसे पूरे मध्य पूर्व के लिए खतरनाक बताया है।
ट्रंप ने अमेरिका के नागरिकों को ईरान छोड़ने की सलाह दी है और कहा है कि मौजूदा हालात में वहां रहना सुरक्षित नहीं है।
ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और इटली ने ईरानी राजदूतों को तलब कर सरकार की कार्रवाई पर कड़ी आपत्ति जताई है।
ईरान के विदेश मंत्री ने यूरोपीय देशों पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया है और उनकी आलोचनाओं को खारिज कर दिया है।
28 दिसंबर से शुरू हुए ये प्रदर्शन पहले महंगाई और बेरोजगारी के खिलाफ थे, लेकिन अब यह आंदोलन सीधे तौर पर सरकार और सर्वोच्च नेता के खिलाफ आक्रोश में बदल चुका है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात ऐसे ही बने रहे, तो यह संकट केवल ईरान तक सीमित नहीं रहेगा और इसका असर पूरे मध्य पूर्व की राजनीति और वैश्विक सुरक्षा पर पड़ सकता है।
(प्रस्तुति -त्रिपाठी पारिजात)



