हिंदी भाषा और पत्रकारिता जगत के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है कि वरिष्ठ पत्रकार विशाल तिवारी को गृह मंत्रालय के राजभाषा विभाग द्वारा संचालित जनजातीय कार्य मंत्रालय की हिंदी सलाहकार समिति में सदस्य के रूप में नामित किया गया है।
पत्रकारिता और सामाजिक सक्रियता में लंबा अनुभव
करीब पंद्रह वर्षों से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय विशाल तिवारी वर्तमान में भारत एक्सप्रेस न्यूज़ नेटवर्क में संपादकीय सलाहकार की भूमिका निभा रहे हैं। पत्रकारिता के साथ-साथ वे सामाजिक और शैक्षणिक गतिविधियों में भी निरंतर भागीदारी करते रहे हैं।
छात्रों के लिए पहला वेब पोर्टल
पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने देशभर के निजी विश्वविद्यालयों और संस्थानों में पढ़ रहे छात्रों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए अपने साथियों के साथ मिलकर प्राइवेट इंस्टीट्यूट स्टूडेंट यूनियन नामक देश का पहला वेब पोर्टल शुरू किया। इसका उद्देश्य निजी शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले छात्रों को एक साझा मंच उपलब्ध कराना था। इसी दौरान उन्होंने शोधकर्ता के रूप में तीन लघु फिल्मों में भी काम किया, जिनमें ग्रामीण भारत में सूचना के अधिकार का प्रभाव, जामिया और अलीगढ़ के संदर्भ में पूर्व राष्ट्रपति डॉ. जाकिर हुसैन का जीवन वृत्तांत और दिल्ली के मंदिरों पर आधारित फिल्में शामिल थीं।
पत्रकारिता को चुना करियर
पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने पारंपरिक नौकरी की राह छोड़कर पत्रकारिता को अपना करियर बनाया। उनकी पहली नियुक्ति बतौर सहायक संपादक न्यूज़टॉक मासिक पत्रिका में हुई, जो आदिवासी समुदाय से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित थी। इस दौरान उन्हें झारखंड के माओवादी प्रभावित इलाकों में काम करने और वहां की जमीनी सच्चाई को समझने का अवसर मिला।
थिंक टैंक से जुड़ाव और अकादमिक योगदान
साल 2010 में वे दिल्ली स्थित थिंक टैंक इंडिया पॉलिसी फाउंडेशन (भारत नीति प्रतिष्ठान) से बतौर रिसर्च फेलो जुड़े। संस्थापक निदेशक और विद्वान डॉ. राकेश सिन्हा के मार्गदर्शन में उन्होंने अकादमिक जगत में भी योगदान दिया। इसी दौरान उनकी पहली पुस्तक ‘न्यू मीडिया: संभावनाएं एवं चुनौतियां’ प्रकाशित हुई। इसके अलावा भारत-चीन संबंधों और हिंदी मीडिया के संपादकीय दृष्टिकोण पर भी उनका शोध प्रकाशित हुआ। पांच वर्षों के दौरान उन्होंने 100 से अधिक सेमिनार और कॉन्फ्रेंस में सक्रिय भागीदारी की।
सामाजिक आंदोलनों से जुड़ाव
वे प्रसिद्ध गांधीवादी अन्ना हजारे के नेतृत्व में चले भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से भी जुड़े रहे। इसके साथ ही उन्होंने रामलीला मैदान में बाबा रामदेव के आंदोलन के दौरान हुए पुलिस लाठीचार्ज की घटना को फोटो परिचय के साथ देश के सामने प्रस्तुत किया। उन्होंने समाजवादी नेता राजनारायण पर एक स्मारिका प्रकाशित की और संसद सदस्यों द्वारा लिखित पुस्तकों की एक अनोखी प्रदर्शनी आयोजित की। मार्च 2012 में दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित इस प्रदर्शनी में लाल कृष्ण आडवाणी और शशि थरूर सहित 50 से अधिक सांसदों ने भाग लिया। इसमें कुल 132 सांसदों की पुस्तकों का प्रदर्शन किया गया और इसे इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स ने भी दर्ज किया।
राष्ट्रीय सहारा और संपादकीय योगदान
साल 2014 में वे लखनऊ से प्रकाशित एक अंग्रेजी पत्रिका के दिल्ली प्रतिनिधि बने। इसके बाद 2016 में वे राष्ट्रीय सहारा अखबार के संपादकीय डेस्क से जुड़े। यहां उन्होंने संपादकीय पृष्ठ और चर्चित साप्ताहिक परिशिष्ट ‘हस्तक्षेप’ में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अपने साप्ताहिक कॉलम ‘परिधि’ के माध्यम से वे हर सप्ताह मुख्यधारा से अलग विषयों और उनके अनछुए पहलुओं को सामने लाते रहे।
कोरोना काल में जिम्मेदारी
कोरोना महामारी के दौरान उन्होंने अखबार प्रबंधन से जुड़कर संपादकीय प्रभारी की जिम्मेदारी निभाई। उस समय जब कई अखबारों ने अपने परिशिष्ट बंद कर दिए थे, तब भी ‘हस्तक्षेप’ का प्रकाशन जारी रहा।
शिक्षा क्षेत्र में योगदान
पत्रकारिता के साथ-साथ शिक्षा क्षेत्र में भी वे सक्रिय रहे हैं। वर्तमान में वे दिल्ली पत्रकारिता विश्वविद्यालय में विजिटिंग फैकल्टी के रूप में छात्रों को पत्रकारिता का व्यावहारिक अनुभव और ज्ञान प्रदान करते हैं।
पत्रकार विशाल तिवारी की हिंदी सलाहकार समिति में नियुक्ति न केवल उनके व्यक्तिगत योगदान की मान्यता है, बल्कि यह हिंदी भाषा, पत्रकारिता और अकादमिक जगत के लिए भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उनके लंबे अनुभव, सामाजिक सक्रियता और शिक्षा क्षेत्र में योगदान ने उन्हें इस जिम्मेदारी के लिए उपयुक्त बनाया है।



