Land for job scam: अक्सर जेल से बाहर अस्पताल में रहने वाले लालू यादव को फिर जाना पड़ सकता है जेल..जॉब के लिये जमीन घोटाला फिर सुर्खियों में आ गया है..
बिहार की राजनीति के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाने वाले लालू प्रसाद यादव एक बार फिर गंभीर कानूनी संकट में घिरते दिखाई दे रहे हैं। हालिया अदालती घटनाक्रमों के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या उन्हें एक बार फिर कारावास का सामना करना पड़ सकता है।
‘लैंड फॉर जॉब’ घोटाले में दाखिल नई चार्जशीट और अदालत के कड़े रुख के चलते यह मामला दोबारा सुर्खियों में आ गया है। कोर्ट ने इस प्रकरण में आरोप तय करने के निर्देश जारी कर दिए हैं, जिससे मुकदमे की कार्यवाही ने निर्णायक मोड़ ले लिया है।
लेकिन यह ‘लैंड फॉर जॉब’ मामला वास्तव में है क्या? रेलवे में नौकरियों के बदले जमीन लेने का आरोप किस तरह सामने आया? और क्या लालू यादव के विरुद्ध उपलब्ध साक्ष्य पर्याप्त और ठोस माने जा रहे हैं? आइए इस पूरे प्रकरण को सरल भाषा में समझते हैं।
लैंड फॉर जॉब घोटाला आखिर है क्या?
यह विवाद वर्ष 2004 से 2009 के बीच का बताया जा रहा है, उस समय लालू प्रसाद यादव केंद्र की यूपीए सरकार में रेल मंत्री के पद पर थे। आरोप है कि इस अवधि में रेलवे के विभिन्न जोनों में ग्रुप-डी पदों पर नियुक्तियां की गईं।
जांच एजेंसियों का दावा है कि इन भर्तियों के लिए न तो कोई सार्वजनिक विज्ञापन जारी किया गया और न ही भर्ती की निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया गया। इसके बदले, नौकरी पाने वाले उम्मीदवारों या उनके परिजनों से पटना सहित अन्य स्थानों पर स्थित कीमती जमीनें बेहद कम कीमत पर लालू यादव के परिवार के नाम हस्तांतरित कराई गईं।
सीधे शब्दों में कहा जाए तो आरोप यही है – “जमीन के बदले रेलवे की नौकरी।”
CBI और ED की जांच में क्या सामने आया?
सीबीआई के अनुसार, लालू यादव के परिवार ने पटना में लगभग 1.05 लाख वर्ग फुट भूमि अपने नियंत्रण में ली। इन संपत्तियों की कीमत सरकारी सर्कल रेट से काफी कम दर्शाई गई। कुछ मामलों में तो यह जमीनें परिवार को उपहार (गिफ्ट) के रूप में भी दी गईं।
जांच में AK Infosystems नामक कंपनी की भूमिका भी उजागर हुई है। आरोप है कि इस कंपनी के पास करोड़ों रुपये मूल्य की जमीनें थीं, लेकिन लालू यादव के परिवार ने इसके शेयर बेहद कम राशि में अपने नाम कर लिए, जिससे कंपनी की पूरी अचल संपत्ति परिवार के नियंत्रण में चली गई।
इस प्रकरण में कौन-कौन हैं आरोपी?
इस मामले में केवल लालू यादव ही नहीं, बल्कि उनके परिवार के कई सदस्य भी आरोपी बनाए गए हैं। इनमें उनकी पत्नी एवं बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, बेटे और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, तथा बेटियां मीसा भारती और हेमा यादव शामिल हैं।
हाल ही में सीबीआई ने दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में इस मामले की सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की है। अदालत ने यह माना है कि लालू यादव के विरुद्ध अभियोजन चलाने के लिए पर्याप्त साक्ष्य और आवश्यक सरकारी स्वीकृति उपलब्ध है।
कोर्ट का मत है कि इस पूरे प्रकरण में सरकारी अधिकारों का दुरुपयोग किया गया है। अदालत ने कुल 41 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए हैं और यह मुकदमा भ्रष्टाचार निरोधक कानून की विभिन्न धाराओं के तहत चलेगा।
लालू यादव का पक्ष क्या है?
लालू यादव और उनके परिजन लगातार इन सभी आरोपों से इनकार करते रहे हैं। उनका कहना है कि यह पूरा मामला राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित है और केंद्रीय जांच एजेंसियों का इस्तेमाल उन्हें परेशान करने तथा बदनाम करने के उद्देश्य से किया जा रहा है।
अब निगाहें अदालत की आगामी कार्यवाही पर टिकी हैं। देखना यह होगा कि न्यायिक प्रक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ती है और क्या यह मामला लालू यादव के लिए आने वाले समय में और बड़ी मुश्किलें खड़ी करता है।



