Wednesday, December 17, 2025
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Madvi Hidma: 34 घंटे की खुफिया निगरानी, गुप्त घेराबंदी & 4 घंटे की मुठभेड़ से ढेर हुआ सबसे खतरनाक नक्सली कमांडर हिडमा

Madvi Hidma: जानिये एक करोड़ का इनामी और देश का सबसे खतरनाक नक्सली कमांडर माड़वी हिडमा को मारने के लिये घने जंगल में कैसे जाल बिछाया सुरक्षा बलों के विशेष दस्ते ने..

Madvi Hidma: जानिये एक करोड़ का इनामी और देश का सबसे खतरनाक नक्सली कमांडर माड़वी हिडमा को मारने के लिये घने जंगल में कैसे जाल बिछाया सुरक्षा बलों के विशेष दस्ते ने..

देश की सुरक्षा एजेंसियों ने नक्सल विरोधी अभियान के इतिहास में एक बेहद महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। दंडकारण्य के दुर्गम जंगलों में वर्षों से सुरक्षा बलों के लिए सिरदर्द बना टॉप नक्सली कमांडर माड़वी हिडमा आखिरकार मुठभेड़ में मारा गया। यह वही व्यक्ति था जिसके बारे में कहा जाता था कि वह जंगलों, पहाड़ी रास्तों और स्थानीय समुदायों के बीच इस तरह घुला-मिला था कि उसकी हर गतिविधि पर नज़र रखना लगभग नामुमकिन साबित होता था। सुरक्षा बलों को इस सफलता तक पहुँचने में लंबा इंतज़ार, सूक्ष्म योजना और लगातार घूमते रहने वाले लक्ष्य को पकड़ने जैसा धैर्य दिखाना पड़ा।

एक इनपुट ने दी सटीक जानकारी

यह पूरी कार्रवाई एक विश्वसनीय खुफिया इनपुट मिलने के बाद शुरू हुई। सूचना यह थी कि हिडमा कुछ साथियों के साथ दंडकारण्य के भीतर एक विशेष इलाके में रुका हुआ है। उसके ठिकाने के बारे में कई स्तरों से जानकारी जुटाई गई और लगभग 34 घंटे तक उसकी गतिविधियों पर लगातार नज़र रखने के बाद एजेंसियों को पहली बार उसकी सही लोकेशन के बारे में स्पष्ट और वास्तविक जानकारी मिली। यह वह दुर्लभ क्षण था जिसका सुरक्षा बल कई वर्षों से इंतज़ार कर रहे थे।

इनपुट पुख्ता होने के बाद केंद्रीय सुरक्षा बलों ने एक बहु-स्तरीय रणनीति तैयार की। घने जंगल और मुश्किल रास्तों को देखते हुए बड़े दस्ते को आगे बढ़ाने का जोखिम नहीं लिया गया। इसके बजाय एक अत्यंत प्रशिक्षित व छोटी टीम को सबसे आगे भेजा गया, जो दुश्मन तक बिना आवाज किए पहुँच सके। इस ऑपरेशन की कमान ग्रेहाउंड फोर्स ने संभाली, जो नक्सलियों के खिलाफ विशेष अभियानों के लिए जानी जाती है। ग्रेहाउंड्स के सूक्ष्म प्रशिक्षण और जंगलों से अनुकूलन की क्षमता ने ऑपरेशन को सफलता की राह दिखाई।

हिडमा को पकड़ पाना इसलिए भी कठिन था क्योंकि वह हमेशा अपनी लोकेशन बदलता रहता था। उसके कैंप अक्सर ऐसे मिलते थे जिन्हें कुछ समय पहले ही छोड़ा गया होता था। उसकी टीम इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का इस्तेमाल नहीं करती थी, ताकि लोकेशन ट्रैक न हो सके। संदेश कोडों, हावभाव और प्राकृतिक संकेतों के जरिये भेजे जाते थे। यही वजह थी कि वह सुरक्षा बलों को कई बार अंतिम क्षणों में चकमा देकर निकल जाता था।

इस तरह बच निकलता था हिडमा

सुकमा जिले में जन्मे हिडमा की स्थानीय जनजातीय समुदायों में भारी पकड़ थी। उसकी बोली, उसका पहनावा और जंगलों का गहरा ज्ञान उसे आम ग्रामीणों के बीच पूरी तरह घुलने-मिलने में मदद करता था। ग्रामीण कई बार उसकी मदद करते थे, यहाँ तक कि सुरक्षा बलों की हर गतिविधि की खबर भी उसे पहले ही दे देते थे। कभी-कभी नक्सली समर्थक दल सुरक्षा बलों को गलत दिशा में भेजकर हिडमा को बच निकलने का मौका भी देते थे। यही मजबूत स्थानीय नेटवर्क वर्षों तक उसकी सुरक्षा का कवच बना रहा।

लेकिन इस बार सुरक्षा बलों ने उसकी हर गतिविधि पर सटीक नज़र रखते हुए उसे घेरने का मौका नहीं गंवाया। जब तक उसे एहसास होता कि सुरक्षा बल नज़दीक पहुँच चुके हैं, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। करीब चार घंटे तक चली मुठभेड़ में ग्रेहाउंड टीम ने बेहद रणनीतिक तरीके से कार्रवाई की। इस गोलीबारी में हिडमा, उसकी पत्नी और चार अन्य नक्सली मारे गए।

ये था हि़मा से मुठभेड़ का क्षेत्र

जिस क्षेत्र में यह मुठभेड़ हुई, वह इलाके की उस सीमा पर स्थित है जहाँ छत्तीसगढ़ और आंध्रप्रदेश का जंगल एक-दूसरे से जुड़ता है। यही वह क्षेत्र है जहाँ हिडमा अपने अधिकतर ऑपरेशन अंजाम देता था। उसकी मौत के बाद सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि नक्सल संगठन की कमान प्रणाली को बड़ा झटका लगा है, क्योंकि हिडमा न केवल हमलों की प्लानिंग करता था बल्कि बड़ी संख्या में नक्सलियों को प्रशिक्षित भी करता था।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार स्थानीय लोगों से मिली बेहद महत्वपूर्ण सूचना ने खुफिया एजेंसियों को उसकी गतिविधियों के बारे में बिल्कुल सही और समय पर जानकारी उपलब्ध कराई। यह इनपुट इतना सटीक था कि सुरक्षा बलों को उसके मूवमेंट पर लगातार नज़र रखने में कोई कठिनाई नहीं हुई। लगभग 34 घंटे तक उसकी हर गतिविधि को छुपकर ट्रैक करने के बाद ऑपरेशन का अगला चरण शुरू किया गया।

इस जानकारी की पुष्टि के बाद सुरक्षा बलों ने एक छोटी, अत्यंत प्रशिक्षित और भरोसेमंद टीम इस मिशन के लिए तैयार की। यह टीम बेहद सावधानी से लक्ष्य के करीब भेजी गई, जबकि दूसरी ओर केंद्रीय सुरक्षा बलों के कई दस्तों को संदिग्ध मुठभेड़ वाले क्षेत्र के चारों ओर रणनीतिक तरीके से तैनात किया गया, ताकि किसी भी संभावित भागने की कोशिश को शुरुआत में ही रोका जा सके।

चार घंटे तक चलता रहा गोलीबारी का दौर

मिली जानकारी के अनुसार, सुरक्षा बलों ने दोपहर लगभग 2 बजे इस ऑपरेशन की शुरुआत की। इसके बाद करीब चार घंटे तक दोनों ओर से लगातार मुठभेड़ होती रही। मुठभेड़ के दौरान हिडमा और उसके साथियों ने भी जबर्दस्त गोलीबारी की और इस दौरान वे भागने के रास्ते पर भी निकल गये। लेकिन इस बार सुरक्षा बलों ने इसके लिये भी तैयारी कर रखी थी। इसी लंबी कार्रवाई के दौरान हिडमा ढेर हो गया। इस अभियान में केंद्रीय सुरक्षा बलों की महत्वपूर्ण भूमिका रही, जबकि पूरी रणनीति तैयार करने और उसे ज़मीन पर लागू करने की ज़िम्मेदारी ग्रेहाउंड यूनिट ने संभाली थी।

पिछले कई वर्षों से सुरक्षाबल और खुफिया टीमें लगातार हिडमा की गतिविधियों को समझने, उसके ठिकानों का पता लगाने और उसके नेटवर्क को तोड़ने की कोशिश करते आ रही थीं। लेकिन दंडकारण्य के बेहद घने जंगल, पहाड़ियों से भरा भूभाग, सीमित संचार व्यवस्था और स्थानीय लोगों में उसकी मजबूत पकड़ के कारण वह हमेशा सुरक्षा एजेंसियों से एक कदम आगे ही नजर आता था।

चलाये थे बहुत सारे ऑपरेशन्स

कई बार बड़े पैमाने के ऑपरेशन चलाए गए, पर हर बार वह किसी न किसी तरह सुरक्षा घेरे को चकमा देकर भाग निकलता था। उसकी लगातार बच निकलने की क्षमता के पीछे उसका कठोर अनुशासन, इलाक़े की ज़मीन और जंगलों की गहरी जानकारी, और परिस्थिति के हिसाब से तुरंत रणनीति बदलने की उसकी आदत को मुख्य वजह बताया जाता है।

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, हिडमा पिछले दस वर्षों में 26 से अधिक हमलों का मास्टरमाइंड था जिसमें 130 से ज्यादा जवान शहीद हुए। बस्तर, सुकमा, दंतेवाड़ा और मलकानगिरी तक फैले नक्सली नेटवर्क में उसे एक सबसे खतरनाक, क्रूर और बेहद चालाक कमांडर माना जाता था। उस पर 50 लाख से लेकर 1 करोड़ रुपये तक का इनाम घोषित था।

अब जबकि हिडमा मारा जा चुका है, सुरक्षा बलों ने छत्तीसगढ़-आंध्र की सीमा पर अपने ऑपरेशनों को और तेज कर दिया है। एजेंसियों का कहना है कि अब फोकस बचे हुए वरिष्ठ नक्सली नेताओं पर होगा ताकि संगठन की शेष संरचना को भी तोड़ा जा सके। अधिकारी यह भी मानते हैं कि हिडमा की मौत नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में एक बड़ा मोड़ साबित हो सकती है।

(प्रस्तुति -त्रिपाठी पारिजात)

 

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