Wednesday, February 4, 2026
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Mahesh Rekhe ने 19 वर्ष की आयु में 200 वर्षों बाद रचा इतिहास – हासिल की दुर्लभ वैदिक उपलब्धि

Mahesh Rekhe: 200 वर्षों बाद रच दिया इतिहास 19 वर्ष के महेष रेखे ने - शुक्ल यजुर्वेद के 2000 मंत्र दण्डक्रम से 50 दिन तक निरंतर पढ़कर हासिल की दुर्लभ वैदिक उपलब्धि, PM मोदी ने दी बधाई

Mahesh Rekhe: 200 वर्षों बाद रच दिया इतिहास 19 वर्ष के महेष रेखे ने – शुक्ल यजुर्वेद के 2000 मंत्र दण्डक्रम से 50 दिन तक निरंतर पढ़कर हासिल की दुर्लभ वैदिक उपलब्धि, PM मोदी ने दी बधाई..

महाराष्ट्र के 19 वर्ष के देवव्रत महेश रेखे ने ऐसा वैदिक चमत्कार कर दिखाया है, जो लगभग दो सदियों से किसी ने पूरा नहीं किया था। वाराणसी में आयोजित विशेष पारायण कार्यक्रम के दौरान देवव्रत ने शुक्ल यजुर्वेद के लगभग 2000 मंत्रों का पाठ अत्यंत कठिन पद्धति “दण्डक्रम” के अनुसार लगातार 50 दिनों तक किया। इस दौरान उन्होंने बिना विराम लिए हर मंत्र को पूरी शुद्धता के साथ उच्चारित किया। विद्वानों का कहना है कि इस प्रकार का त्रुटिरहित दण्डक्रम पारायण 200 वर्षों में पहली बार देखने को मिला है।

इतिहास के अनुसार, दण्डक्रम का इतना विशिष्ट और शुद्ध पाठ अब तक केवल तीन बार ही किया गया है। यह परंपरा अत्यंत दुर्लभ मानी जाती है और देवव्रत द्वारा इसे पूरी तरह सही स्वर, मात्रा और ध्वनि के साथ पूरा करना स्वयं में अभूतपूर्व उपलब्धि है। इससे पहले कभी भी इतनी कम अवधि में और इतने सटीक स्वर-संयोजन के साथ यह पाठ नहीं हुआ था।

इस वैदिक उपलब्धि पर आयोजन समिति की ओर से देवव्रत का सम्मान किया गया। उन्हें पाँच लाख रुपये मूल्य का सोने का कड़ा भेंट किया गया और इसके साथ 1,11,116 रुपये नकद पुरस्कार के रूप में प्रदान किए गए।

भव्य शोभायात्रा और शहर का उत्सव जैसा माहौल

देवव्रत के पारायण पूर्ण होने के उपलक्ष्य में वाराणसी के रथयात्रा चौराहे से लेकर महमूरगंज तक एक शानदार शोभायात्रा निकाली गई। इस यात्रा में 500 से अधिक वैदिक छात्र, पारंपरिक वाद्य यंत्रों के कलाकार, शंखध्वनि करने वाले एवं अनेक भक्त शामिल रहे। सड़क किनारे खड़े लोगों ने फूल बरसाकर इस अतुलनीय वैदिक अवसर का स्वागत किया।

कार्यक्रम के दौरान शृंगेरी जगद्गुरु श्री श्री भारततीर्थ महासन्निधानम का आशीर्वचन भी पढ़कर सुनाया गया, जिसे आस्थान विद्वान डॉ. तंगिराला शिवकुमार शर्मा ने उपस्थित जनसमूह के सामने प्रस्तुत किया।

दण्डक्रम की विशिष्टता और विरलता

विद्वानों ने बताया कि दण्डक्रम को वेद पाठन की सबसे जटिल और उच्च कोटि की पद्धति माना जाता है। इसमें मंत्रों का उच्चारण एक निश्चित क्रम, विशेष स्वर-संरचना और अत्यधिक अनुशासन के साथ किया जाता है। यही कारण है कि दुनिया में अब तक केवल तीन ही विद्वान इस कठिन विधि को पूर्ण शुद्धता के साथ कर पाए थे।
शृंगेरी मठ के आधिकारिक एक्स (X) हैंडल ने भी देवव्रत की इस उपलब्धि का उल्लेख करते हुए इसे अपने समय की अद्वितीय घटना बताया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की प्रशंसा

इस उपलब्धि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर संदेश साझा करते हुए देवव्रत को हार्दिक बधाई दी। उन्होंने लिखा कि—

“19 वर्ष के देवव्रत महेश रेखे जी की यह उपलब्धि जानकर मन गर्व से भर गया। उनकी साधना न केवल हमारी वैदिक परंपरा को सशक्त बनाती है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरक उदाहरण भी बनेगी। भारतीय सांस्कृतिक धरोहर में रुचि रखने वाले सभी लोगों के लिए यह अत्यंत प्रसन्नता का विषय है कि देवव्रत ने शुक्ल यजुर्वेद की माध्यंदिन शाखा के लगभग 2000 मंत्रों वाले ‘दण्डकर्म पारायणम्’ को 50 दिनों तक बिना किसी व्यवधान के पूरा किया है। उन्होंने हर मंत्र को पूरी पवित्रता और शुद्ध स्वर के साथ उच्चारित किया। यह हमारी गुरु परंपरा के श्रेष्ठ स्वरूप को दर्शाता है।”

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि काशी के सांसद होने के नाते उन्हें विशेष खुशी है कि इतनी उल्लेखनीय वैदिक साधना वाराणसी की पावन भूमि पर संपन्न हुई। उन्होंने देवव्रत के परिवार, उनके गुरुओं, विद्वानों तथा उन सभी संस्थाओं को प्रणाम किया जिन्होंने उनकी तपस्या को सफल बनाने में सहयोग दिया।

(प्रस्तुति – त्रिपाठी पारिजात)

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