Wednesday, December 17, 2025
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Noida Police की प्रशंसनीय कर्तव्यनिष्ठता – सड़क पर बचाये युवक के प्राण

Noida Police का सराहनीय फर्ज़: ठंडी रात में जवान युवक की जान बचाकर पेश की मानवता की मिसाल..

Noida Police का सराहनीय फर्ज़: ठंडी रात में जवान युवक की जान बचाकर पेश की मानवता की मिसाल..

रात्रि के साढ़े आठ बजे का समय था. दिल्ली की सर्दी नोएडा में भी सर चढ़ कर बोल रही थी. नोएडा के सेक्टर 63 के इलेक्ट्रॉनिक सिटी मेट्रो स्टेशन से लगे अन्डर पास से हो कर रोज की तरह तमाम गाड़ियाँ आ जा रही थीं. ऐसे में भारत एक्सप्रेस टीवी न्यूज चैनल के एडीटर पारिजात त्रिपाठी का भी वहां से गुजरना हुआ.

अचानक उनकी दृष्टि अन्डर पास के भीतर वाहनों की भीड़ से होकर बायें हाथ की दीवाल के नीचे पड़ी. देख कर अचरज हुआ और घबराहट भी -तमाम वाहन जो कि दीवाल के पास से हो कर गुजर रहे थे उनके टायर किसी वस्तु के ऊपर न पड़ कर बिलकुल बगल से गुजर रहे थे. दूर से देख कर लगा कि कोई पुतला सा वहाँ पड़ा है. पास से गुजरते समय समझ आया कि वह कोई पुतला नहीं बल्कि कोई अठारह-उन्नीस वर्ष का लड़का वहाँ पड़ा हुआ था.

चलती गाड़ियों के पहियों के बगल में सड़क पर पड़ा युवक अपने भाग्य से ही कदाचित बचा हुआ था क्योंकि उसका एक पैर सड़क की तरफ बढ़ा हुआ पड़ा था. ऐसे में एक दुपहिया वाहन के भीतर जागृत मानवता ने उसके पैर को गाड़ियों के नीचे कुचल जाने से बचाया. उसने अपनी गाड़ी धीमी करके अपने बायें पैर से उसके पैर को भीतर की तरफ याने उसकी गुड़ी-मुड़ी पड़े शरीर की तरफ ठेल दिया. इससे अब तात्कालिक लाभ ये हुआ कि उसका पैर गाड़ियों की भीड़ के नीचे आ कर कुचल जाने से बच गया. अब सिर्फ उसका शरीर और दोनो पैर सड़क के कोने की तरफ दीवाल के नीचे पड़े हुए थे.

ये समय शाम छह बजे से लेकर लगभग नौ बजे तक हैवी ट्रैफिक का समय होता है. ऐसे में सभी को अपने घर जाने की जल्दी होती है. सभी गाड़ियाँ जितनी तेज हो सके, चलाई जाती हैं. ऐसे में इस हैवी ट्रैफिक के दौरान इस लंबे-चौड़े अन्डर पास में दायें से लेकर बायें तक और आगे से लेकर पीछे तक गाड़ियाँ अपनी संभावित अधिकतम गति से भागने का प्रयास कर रही होती हैं. इस दशा में यह संभावना पूरी है कि जमीन पर आगे पीछे दायें बायें यदि कोई वस्तु पड़ी हो या गिर जाये तो सभी गाड़ियाँ उसके ऊपर से गुजर ही जायेंगी – न कोई रुकेगा न रुकना चाहेगा.

यहाँ पर इस अर्धविक्षिप्त स्थिति में पड़े युवक को उसके पूर्वकृत कर्म ही कदाचित रक्षा कर रहे थे कि अभी तक उसकी जान बची हुई थी. एडीटर त्रिपाठी ने इस स्थिति में अपने घर जाने की योजना को वापस जाने के विचार में परिवर्तित कर दिया. उन्हें लगा कि यदि अभी मैं घर गया तो मन में यह भय बना रहेगा कि इस युवक के साथ कोई अनहोनी न हो जाये. ऐसी स्थिति में कदाचित अपनेआप को क्षमा करना दुष्कर होगा. यह सोच कर उस ट्रैफिक के बीच से आगे बढ़ते हुए वे घर की तरफ न जा कर आगे के हाइवे से राइट साइड वाले यूटर्न को लेकर वापस ऑफिस की दिशा में लौटे. मन में विचार यही था किसी तरह शीघ्रातिशीघ्र अपने न्यूज़ चैनल के पीछे बनी पुलिस चौकी तक पहुंच जायें तो पुलिसकर्मियों की सहायता से इस युवक के प्राण बच सकते हैं.

परेशानी छोटी से ये भी थी कि ईवी वाले उनके स्कूटर की चार्जिंग भी अपने निम्नतम स्तर पर थी तो यह भी चिन्ता थी कि ऑफिस वापस गये तो क्या पता वापसी की चार्जिंग गाड़ी में बचेगी भी या नहीं. किन्तु स्कूटर की चार्जिंग या वापसी की समस्या से अधिक थी किसी के प्राणों की रक्षा की चिन्ता. कहा जाता है कि यदि आप किसी शुभ या मानवता का कार्य कर रहे होते हैं तो ईश्वर विघ्न बाधाों से बचाने में आपकी सहायता करते हैं. बस, यही सोचकर कि जो होगा देखा जायेगा, उन्होंने स्कूटर को वापसी के मार्ग पर गतिमान कर दिया.

भारत एक्सप्रेस टीवी न्यूज चैनल के पीछे ही नोएडा का सेक्टर 63 मार्केट बना हुआ है जहाँ अच्छे रेस्टोरेन्ट्स से लेकर महंगी गाड़ियों के शोरूम भी हैं. वहीं पर बनी हुई है एच ब्लॉक पुलिस चौकी. चौकी दूर से दिखाई दी तो पुलिस की एक दो बड़ी गाड़ियाँ भी दिखाई दीं जिनमें नीली लाल बत्तियाँ जगमगा रही थीं, कदाचित किसी बड़े पुलिस अधिकारी का चौकी पर आगमन हुआ था. अबाध गति से पत्रकार त्रिपाठी ने अपनी स्कूटी पुलिस चौकी के प्रांगण के भीतर की तरफ मोड़ दी और गेट के समीप खड़ी कर दी. शीघ्रता इतनी थी कि हेलमेट गाड़ी के ट्रंक में रखने का स्मरण नहीं रहा और वे उसे हाथ में पकड़े-पकड़े ही पुलिस चौकी के भीतर चले गये.

अंदर देखा तो दो पुलिस अधिकारी विद्यमान थे साथ में कोई सज्जन भी कुर्सी पर थे. सीधे ही मुख्य कुर्सी की तरफ मुखातिब हो कर एडीटर त्रिपाठी ने कहा – नमस्कार मैं पारिजात त्रिपाठी, एडीटर भारत एक्सप्रेस टीवी न्यूज़ चैनल. पुलिस अधिकारी ने बड़ी ही सादगी से मुस्कुराते हुए कहा – बैठिये.

यद्यपि शीघ्रता इतनी थी कि अपनी बात तुरंत कह कर पुलिस को अपने साथ उस युवक तक ले जाया जाये, पर कुर्सी पर बैठ कर बात करने का समय निकाल ही लिया उन्होंने. बिना लाग-लपेट के उन्होंने कहा कि एक युवक के प्राण संकट में हैं..सड़क पर पड़ा है कृपया कुछ कीजिये

पुलिस अधिकारी ने तत्परता का परिचय देते हुए कहा – हाँ बिलकुल, क्या हुआ बताइये.. एडीटर त्रिपाठी ने विस्तार से पूरी बात बताई.स्थिति की गंभीरता को भाँपते हुए उन्होंने तुरंत आवाज़ दी और दो कांस्टेबल कक्ष में प्रविष्ठ हुए. उनके त्वरित निर्देश पर वे एडीटर त्रिपाठी को साथ ले कर बाहर निकल गये. उनमें से एक थे गौरव चौधरी एवं दूसरे मूलचंद यादव.पुलिस की सायरन वाली गाड़ी दौड़ पड़ी. एडीटर त्रिपाठी को रास्ता बताने का कार्य अधिक नहीं करना पड़ा, दोनो पुलिसकर्मी शीघ्र ही उस स्थान पर पहुंच गये जिसे घटना स्थल तो नहीं कहा जा सकता था किन्तु वह भावी घटना स्थल अवश्य बन सकता था. मूलचंद यादव गाड़ी चालक की भूमिका में थे और गौरव साथ बैठे थे पीछे की सीट पर एडीटर महोदय थे.

दोनो पुलिसकर्मियों ने अपनी तत्परता का परिचय दिया और वहाँ इस तरह गाड़ी खड़ी की कि कोई दूसरी गाड़ी उस दिशा में न आये और बगल से निकल जायें. गाड़ी का गेट खोल कर दोनो या कहें कि तीनो ही तुरंत उस युवक के पास पहुंचे. पहले जिस बात पर ध्यान नहीं गया था वो अब दिखाई दी – युवक के सिर पर एक सब्जी की थैली के लिये इस्तेमाल होने वाली पारदर्शी पॉलिथिन बंधी हुई थी और ध्यान से देखने पर पता चला कि उसकी सांसे चल रही थी. शरीर पर किसी प्रकार के चोट के निशान नहीं थे. अ

कुछ क्षणों में ही अपनी पुलिसिया दृष्टि से निरीक्षण कर लिया थो दोनो पुलिसकर्मियों ने और उन्होंने कहा कि ये जिन्दा है..पर बेहोश है..प्रतीत होता है कि इसने मद्यपान किया हुआ है जो सीमा से अधिक हो जाने के कारण ये यहाँ गिर गया है. कान्सटेबल मूलचंद तुरंत गाड़ी के भीतर से एक पानी की बॉटल उठा लाये और कहा कि अभी इसे होश में लाते हैं. यहाँ मानवीय संवेदना देखिये पुलिसकर्मी भाइयों की कि कांस्टेबल गौरव चौधरी ने उनका मना किया कि पानी न डालें इसके चेहरे पर..इसके कपड़े भीग जायेंगे..सर्दी बहुत है..बीमार हो जायेगा

गौर से देखा तो युवक ने अपनी पैन्ट में ही लघुशंका भी की हुई थी. उसे हिलाने डुलाने का प्रयास किया गया तो वह हिला नहीं न ही उसने आंखें खोलीं. स्थिति को समझते हुए कांस्टेबल गौरव चौधरी ने तुरंत फोन निकाला और एक नंबर पर कॉल किया. काल के बाद उन्होंने बताया कि यह स्थान सेक्टर 58 के पुलिस थाने का है. उनको फोन कर दिया है. वे आकर इसे ले जायेंगे.

एडीटर त्रिपाठी ने उनको धन्यवाद दिया कि जानते हुए भी कि यह स्थान सेक्टर 58 पुलिस थाने के अन्तर्गत है, आप यहाँ इसके बचाव के लिये चल कर आये. चाहते तो अपनी पुलिस चौकी से ही फोन कर देते 58 के पुलिस थाने को. लेकिन धन्यवाद के योग्य इन दोनो पुलिसकर्मियों के अतिरिक्त वे पुलिस अधिकारी भी हैं जिन्होंने बात सुनते ही पुलिसमेन को दौड़ा दिया इस व्यक्ति की सहायता के लिये.

कुछ मिनटों की प्रतीक्षा के उपरांत नोएडा सेक्टर 58 पुलिस थाने की गाड़ी भी लाल-नीली रोशनियाँ लिये वहाँ पहुंच गई. आते ही चार पुलिसकर्मी उस नौजवान के पास पहुंच गये और उन्होंने उसे होश में लाने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी. एडीटर त्रिपाठी ने उन पुलिसकर्मियों को धन्यवाद दिया और गौरव तथा मूलचंद को साथ ले कर एच ब्लॉक पुलिस चौकी की राह पकड़ ली. जिस प्रयोजन से आना हुआ था वह सफल रहा.

पुलिस चौकी पर गाड़ी से उतर कर पहले तो एडीटर त्रिपाठी ने दोनो पुलिसकर्मियों का व्यक्तिगत रूप से धन्यवाद ज्ञापन किया. तदोपरांत अन्दर चौकी में बैठे पुलिस अधिकारियों को धन्यवाद देने वे भीतर चले गये. गौरव चौधरी से चौकी इन्चार्ज अवधेश प्रताप सिंह का नाम पता चल गया था. अंदर पहुंच कर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए मुख्य कुर्सी पर विराजमान पुलिस अधिकारी को उन्होने धन्यवाद, अवधेश जी आज आपने नागरिकों की सेवा का एक सुन्दर उदाहरण प्रस्तुत किया है.

तभी बगल में बैठे दुसरे पुलिस अधिकारी ने अपना परिचय देते हुए कहा – मैं अवधेश प्रताप सिंह हूं, ये हमारे एसीपी साहब उमेश जी हैं. इस तरह एडीटर त्रिपाठी का एसीपी उमेश जी से परिचय हुआ. उन्होंने दोनो ही पुलिस अधिकारियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आप ने जिस तत्परता से अपनी कर्तव्यनिष्ठा का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत किया है, वह नितांत सरहानीय है!

(न्यूज़ हिन्दू ग्लोबल ब्यूरो)

 

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