Vladimir Putin की रहस्यमयी सुरक्षा में मोबाइल फूड लैब से लेकर ‘पूप सूटकेस’ तक शामिल है..जानिये, रूस के राष्ट्रपति की सुरक्षा कैसे बनी दुनिया की सबसे कड़ी और अनोखी..
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की सुरक्षा व्यवस्था दुनिया में सबसे अलग, सबसे गोपनीय और सबसे सख्त मानी जाती है। जब भी वे किसी विदेशी दौरे पर जाते हैं, तो उनके साथ सिर्फ बॉडीगार्ड ही नहीं होते—बल्कि अपना खाना, अपनी मोबाइल लैब, निजी डॉक्टर, बोतलबंद पानी और यहां तक कि उनका मल (पॉटी) भी एक खास सूटकेस में वापस रूस ले जाया जाता है।
यह इसलिए किया जाता है ताकि कोई भी विदेशी एजेंसी उनके स्वास्थ्य से जुड़े राज का पता न लगा सके। भारत की यात्रा में भी यही गुप्त टीम और वही सूटकेस मौजूद है।
पुतिन की सुरक्षा में इतने अनोखे कदम क्यों?
आइए सालों के हिसाब से समझते हैं कि यह सुरक्षा व्यवस्था कैसे इतनी कठोर होती चली गई।
1998–1999: शुरुआत नई सोच की
जब पुतिन एफएसबी प्रमुख से प्रधानमंत्री और फिर कार्यवाहक राष्ट्रपति बने, तभी से उनकी सुरक्षा में बड़े बदलाव शुरू हुए। राष्ट्रपति सुरक्षा सेवा को पूरी तरह नए ढांचे में ढाला गया। कोई अचानक जनता से मुलाकात नहीं होगी। कोई अनियोजित कार्यक्रम नहीं होगा एवं हर गतिविधि पहले से तय और पूरी तरह गोपनीय रहेगी।
2000 के शुरुआती साल: जैविक सुरक्षा की बुनियाद
इस दौर में पुतिन ने विदेशी होटलों के पानी, बर्तनों, और हाउसकीपिंग पर भरोसा करना बंद कर दिया। अब उनके साथ हमेशा: रूस का बोतलबंद पानी, अपना बिस्तर, अपने डॉक्टर, मेडिकल किट, उनकी एडवांस टीम विदेश में होटल का कमरा पूरी तरह सैनिटाइज़ करती और कई चीजें बदल भी देती।
2006–2020: अपना खाना और अपनी लैब—सब कुछ कंट्रोल में
2010 से एक नियम पक्का हो गया—पुतिन विदेश में किसी भोज का खाना नहीं खाते। उनके साथ जाती है एक मोबाइल फूड लैब जिसमें: शेफ, टेस्ट करने वाले विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, खाना, पानी, फल -यहाँ तक कि सलाद भी – सबकी जांच लैब में होने के बाद ही पुतिन तक पहुंचता है।
2011–2014: कोई भी जैविक निशान पीछे नहीं छोड़ना
इस समय से यह तय हुआ कि पुतिन जहां भी जाते हैं, वे कुछ भी इस्तेमाल करें -गिलास, टिश्यू, तौलिया, उनकी टीम वह सब तुरंत इकट्ठा कर रूस ले जाती है। यहां तक कि होटल की नालियां (ड्रेन) तक सील कर दी जातीं ताकि कोई बायोलॉजिकल सैंपल न मिल सके।
2017: दुनिया को पता चला ‘पूप सूटकेस’ का राज
फ्रांस और सऊदी अरब की यात्रा के दौरान देखा गया कि जब पुतिन टॉयलेट से निकलते हैं, तो उनकी टीम एक खास सूटकेस उठाकर बाहर आती है। फ्रांस के मीडिया ने रिपोर्ट किया कि पुतिन अपना मल भी रूस वापस ले जाते हैं ताकि उनके स्वास्थ्य की जानकारी किसी दूसरे देश को न मिल सके। यहीं से ‘पूप सूटकेस’ दुनिया भर में चर्चा का विषय बन गया।
2018–2021: अब तो तौलिया और कचरा भी रूस जाता है
अब पुतिन का इस्तेमाल किया हर सामान – तौलिया, कचरा, खाली गिलास, सब पैक कर लिया जाता है। उनके विमान में एक मिनी हॉस्पिटल रहता है। उनकी गाड़ियां भी बुलेटप्रूफ होने के साथ-साथ मेडिकल उपकरणों से लैस रहती हैं।
2022–2023: यूक्रेन युद्ध के बाद सुरक्षा और कड़ी
युद्ध के बाद उनकी विदेश यात्राएं बेहद सीमित हो गईं।
जो यात्राएं हुईं, उनमें सुरक्षा पहले से दोगुनी कड़ी कर दी गई।
इसी समय उनके ‘बॉडी डबल’ यानी हमशक्ल के इस्तेमाल की अफवाहें भी तेज हो गईं।
2024–2025: आज पुतिन की सुरक्षा कैसी दिखती है?
भारत यात्रा में भी उनकी सुरक्षा बिल्कुल इसी पैटर्न पर है। उनके साथ है—
अपना खाना और मोबाइल फूड लैब
वही ‘पूप सूटकेस’
बायोलॉजिकल सैंपल इकट्ठा करने वाली पूरी टीम
ड्रोन जैमर और एंटी-ड्रोन सिस्टम
बुलेटप्रूफ और ब्लास्टप्रूफ गाड़ियां
स्नाइपर टीमें
भारी सुरक्षा कमांडो दल
मजबूत साइबर सुरक्षा यूनिट
विशेषज्ञों की राय
जेएनयू के अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ डॉ. अभिषेक श्रीवास्तव ने इंडिया टुडे को बताया कि:
पिछले दो दशकों में रूस की सुरक्षा स्थिति काफी तनावपूर्ण हो गई है
ड्रोन, साइबर हमलों और जैविक खतरों के चलते पुतिन की व्यक्तिगत सुरक्षा बेहद कड़ी करनी पड़ी है
अब उनकी सुरक्षा सिर्फ बॉडीगार्ड तक सीमित नहीं है
उनका खाना, दवाएं, पानी, यहां तक कि उनका मल-मूत्र भी सुरक्षा प्रणाली का हिस्सा बन गया है, ताकि कोई उनके स्वास्थ्य की जानकारी हासिल न कर सके।
जब भी आप पुतिन को भारत या किसी दूसरी यात्रा पर देखें, याद रखिए – जो सुरक्षा आपको दिखाई देती है, उसके पीछे एक बेहद गुप्त और बेहद जटिल दुनिया काम कर रही होती है। एक ऐसी दुनिया, जहां उनका मल भी राष्ट्रीय सुरक्षा का विषय माना जाता है।
(प्रस्तुति -त्रिपाठी पारिजात)



