Friday, March 6, 2026
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Mumbai: हिंदी बोलने पर 19 वर्षीय छात्र की हुई पिटाई – की आत्महत्या !

Mumbai में 19 वर्षीय छात्र की हुई दर्दनाक मौत.. लोकल ट्रेन में हिंदी बोलने पर हुई पिटाई तो सदमे में घर लौटकर कर ली आत्महत्या..

Mumbai में 19 वर्षीय छात्र की हुई दर्दनाक मौत.. लोकल ट्रेन में हिंदी बोलने पर हुई पिटाई तो सदमे में घर लौटकर कर ली आत्महत्या..

मुंबई से एक बेहद दुखद और विचलित करने वाली घटना सामने आई है, जिसमें 19 वर्ष के एक मराठी युवक ने केवल हिंदी में बोलने पर हुए अपमान और मारपीट से आहत होकर अपनी जान दे दी। यह मामला न सिर्फ भाषा के मुद्दे पर बढ़ती असहिष्णुता को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि किस तरह छोटी-सी बात एक परिवार की पूरी दुनिया उजाड़ सकती है।

यह घटना मंगलवार सुबह की है जब कल्याण में रहने वाला कॉलेज छात्र अर्णव खैरे रोज की तरह लोकल ट्रेन पकड़कर मुलुंड स्थित अपने कॉलेज जाने निकला। ट्रेन में हमेशा की तरह भारी भीड़ थी और धक्का-मुक्की के बीच अर्णव ने बिल्कुल सामान्य तरीके से हिंदी में कहा—“भाई, ज़रा आगे हो जाइए, धक्का लग रहा है।” उस एक वाक्य ने उसकी ज़िंदगी बदल दी।

अर्णव की यह बात सुनते ही ट्रेन में मौजूद कुछ मराठी यात्रियों का एक समूह अचानक उस पर चढ़ दौड़ा। वे लोग इस बात पर भड़क गए कि अर्णव ने मराठी की जगह हिंदी में बात की। अर्णव ने कई बार बताया कि वह खुद मराठी भाषी है और उसने सिर्फ भीड़ की वजह से सहज रूप से हिंदी में बात कर दी थी, परंतु इसके बावजूद पिटाई जारी रही। उसे थप्पड़ मारे गए, अपमानित किया गया और धमकाया गया कि “मराठी में बोलने में परेशानी किस बात की है?”

घबराया हुआ अर्णव अपने निर्धारित स्टेशन से एक स्टेशन पहले ही उतर गया ताकि मारपीट करने वाले लोग उसका पीछा न कर सकें। वह तुरंत दूसरी ट्रेन में बैठकर अपने कॉलेज पहुँचा जहाँ उसने समय पर अपनी प्रैक्टिकल क्लास अटेंड की। हालाँकि, घटना से व्यथित होकर वह बाकी लेक्चर नहीं कर पाया और जल्दी ही घर लौट आया।

घर पहुँचने पर उसके पिता जीतेंद्र खैरे ने महसूस किया कि अर्णव बेहद डरा हुआ और मानसिक रूप से टूट चुका है। उसने अपने पिता को बताया कि कैसे कुछ यात्रियों ने उसे चारों तरफ से घेरकर थप्पड़ मारे, धमकियाँ दीं और लगातार हिंदी में बोलने को लेकर ताने देते रहे। उसके पिता के अनुसार वह इस घटना से गहरे सदमे में था और बार-बार यही कह रहा था कि उसे अपमानित महसूस हो रहा है।

कुछ ही समय बाद, जब परिवार के लोग अपने काम में व्यस्त थे, अर्णव ने कमरे में जाकर फांसी लगा ली और अपनी जान दे दी। परिवार के लिए यह घटना किसी सदमे से कम नहीं थी, क्योंकि उन्हें कभी अंदाज़ा नहीं था कि उनका बेटा इतनी गहरी चोट लेकर घर लौटा था।

इस घटना के बाद ठाणे के कोलसेवाडी पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अब रेलवे पुलिस की मदद से उन लोगों की पहचान करने में लगी है जिन्होंने ट्रेन में अर्णव के साथ मारपीट की थी। इसके लिए विभिन्न स्टेशनों और प्लेटफॉर्मों के सीसीटीवी फुटेज की बारीकी से जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि वे जल्द से जल्द आरोपियों को पकड़ने की कोशिश कर रहे हैं।

अर्णव के परिवार की पीड़ा शब्दों में बयान करना मुश्किल है। उसके पिता जीतेंद्र खैरे का कहना है कि हिंदी और मराठी के विवाद ने उनके बेटे की ज़िंदगी छीन ली। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल उनके परिवार का नहीं, बल्कि समाज के लिए एक चेतावनी है कि भाषा की वजह से किसी के साथ ऐसी हिंसा न हो। उनकी यह भी मांग है कि आरोपियों को कड़ी सज़ा मिले ताकि भविष्य में कोई और परिवार इस तरह के हादसे से न गुज़रे।

यह घटना इस बात की दर्दनाक मिसाल है कि भाषा जैसे संवेदनशील मुद्दे पर बढ़ती नफरत कैसे एक युवा जीवन को निगल सकती है। अर्णव की मौत ने मुंबई और महाराष्ट्र दोनों को झकझोर दिया है, और यह सवाल छोड़ गई है—क्या भाषा की लड़ाई किसी की जान से ज़्यादा महत्वपूर्ण हो सकती है?

(न्यूज़ हिन्दी ग्लोबल ब्यूरो)

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