Nepal Gen Zee: नेपाल फिर बनेगा हिंदू राष्ट्र? हिन्दू कांवड़ियों पर हमले के बाद तेज हुई मांग, बालेन सरकार के सामने बढ़ी चुनौती..
नेपाल में एक बार फिर हिंदू राष्ट्र की मांग तेज हो गई है। मधेस हिंसा के बाद हिंदू संगठनों ने गृह मंत्री सुदन गुरुंग को ज्ञापन सौंपकर सर्वदलीय बैठक की मांग की है।
नेपाल में एक बार फिर देश को हिंदू राष्ट्र बनाने की मांग ने जोर पकड़ लिया है। पहाड़ी इलाकों से उठी यह आवाज अब भारत से सटे मधेस और तराई क्षेत्रों तक पहुंचती दिखाई दे रही है, जहां हालिया सांप्रदायिक तनाव ने माहौल को और संवेदनशील बना दिया है।
मधेस इलाके में हिंसा के बाद नेपाल की राजनीति में इस मुद्दे पर चर्चा अचानक तेज हो गई है। इसी बीच गृह मंत्री सुदन गुरुंग और हिंदू संगठनों के बीच हुई बैठक तथा सरकार को सौंपे गए एक ज्ञापन ने इस बहस को और हवा दे दी है। अब सवाल उठ रहा है कि क्या नेपाल में हिंदू राष्ट्र की मांग आने वाले दिनों में एक बड़ा राजनीतिक आंदोलन बन सकती है?
मधेस की हिंसा के बाद बढ़ी हिंदू राष्ट्र की मांग
नेपाल में हिंदू राष्ट्र की मांग कोई नई बात नहीं है। लंबे समय से कई हिंदू संगठन देश को दोबारा हिंदू राष्ट्र घोषित करने की मांग करते रहे हैं, लेकिन हाल के घटनाक्रम ने इस मुद्दे को फिर से सुर्खियों में ला दिया है।
भारतीय सीमा से लगे नेपाल के सुनसरी जिले के देवानगंज में 26 जुलाई को एक धार्मिक जुलूस के दौरान दो समुदायों के बीच हिंसा भड़क गई थी। देखते ही देखते तनाव मधेस के दूसरे हिस्सों तक भी पहुंच गया और हालात को नियंत्रित करने के लिए नेपाल सरकार को पुलिस के साथ सेना की तैनाती तक करनी पड़ी।
हिंसा के दौरान तीन प्रदर्शनकारियों की मौत की खबर सामने आई, जिसके बाद इलाके का माहौल और तनावपूर्ण हो गया। सरकार ने स्थिति संभालने के लिए सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई और प्रभावित इलाकों में लोगों से बातचीत का सिलसिला शुरू किया।
गृह मंत्री सुदन गुरुंग से हिंदू संगठनों की मुलाकात
तनाव के बीच नेपाल के गृह मंत्री सुदन गुरुंग प्रभावित क्षेत्रों के दौरे पर पहुंचे। उन्होंने स्थानीय लोगों और घटना से प्रभावित लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं समझने की कोशिश की।
इसी दौरान उनकी एक हिंदू संगठन से हुई बैठक भी चर्चा में आ गई। रिपोर्टों के मुताबिक, गृह मंत्री और हिंदू सम्राट सेना नाम के समूह के प्रतिनिधियों के बीच कई मुद्दों पर बातचीत हुई। इस बैठक में कथित तौर पर एक 13 सूत्रीय प्रस्ताव भी सामने रखा गया, जिसमें नेपाल को फिर से हिंदू राष्ट्र बनाने की मांग पर चर्चा का मुद्दा शामिल था। हिन्दू संगठनों का कहना है कि सरकार ने उनकी मांगों के प्रति सहमति जताई है।
इस बात को लेकर सवाल भी उठे कि क्या गृह मंत्री के पास इतने बड़े संवैधानिक और राजनीतिक मुद्दे पर बातचीत करने का अधिकार था। हालांकि, बैठक में शामिल अधिकारियों ने बाद में किसी औपचारिक समझौते की बात से इनकार किया और इसे सरकार के सामने संगठन की मांगें रखने की प्रक्रिया बताया।
13 सूत्रीय प्रस्ताव में क्या था?
बैठक के दौरान सामने आए प्रस्ताव ने नेपाल की राजनीति में नई चर्चा शुरू कर दी। इसमें हिंदू राष्ट्र की पुरानी मांग को फिर से राजनीतिक बहस के केंद्र में लाने की बात कही गई थी।
नेपाली मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, सरकार और हिंदू संगठनों के बीच हुई बातचीत को किसी समझौते के रूप में नहीं देखा गया। अधिकारियों का कहना था कि यह बैठक मुख्य रूप से संगठन को अपनी मांगें सरकार के सामने रखने का अवसर देने के लिए हुई थी।
यानी अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि सरकार हिंदू राष्ट्र की मांग को स्वीकार करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। फिलहाल यह मुद्दा हिंदू संगठनों की मांग और राजनीतिक बहस के स्तर पर ही दिखाई दे रहा है।
गृह मंत्री को सौंपे गए ज्ञापन में साफ हुई मांग
इसके बाद 2 अगस्त की सुबह गृह मंत्री सुदन गुरुंग को सौंपे गए एक ज्ञापन की कॉपी सामने आई। इस दस्तावेज में नेपाल को दोबारा हिंदू राष्ट्र बनाने के मुद्दे पर चर्चा कराने की मांग स्पष्ट रूप से रखी गई थी।
ज्ञापन संयुक्त हिंदू मोर्चा की ओर से सौंपा गया बताया गया है। इसमें मांग की गई कि नेपाल को हिंदू राष्ट्र के रूप में बहाल करने के सवाल पर चर्चा के लिए अगले तीन महीने के भीतर एक सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए।
संगठन ने केवल बैठक बुलाने की मांग नहीं की, बल्कि पूरी प्रक्रिया के लिए समय सीमा तय करने की बात भी कही है। इससे साफ है कि हिंदू संगठन अब इस मुद्दे को सिर्फ नारों तक सीमित रखने के बजाय राजनीतिक स्तर पर चर्चा के लिए आगे बढ़ाना चाहते हैं।
नेपाल के कई हिंदू संगठन एक मंच पर
सबसे खास बात यह है कि इस अभियान में अब कई संगठन एक साथ दिखाई दे रहे हैं। संयुक्त हिंदू मोर्चा, हिंदू सम्राट सेना, राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी और हिंदू युवा संघ समेत नेपाल के 15 से ज्यादा हिंदू समर्थक संगठन इस मुद्दे पर एक साझा मंच तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं।
इन संगठनों के बीच बैठकों और जनसंपर्क अभियानों का सिलसिला चल रहा है। इनका कहना है कि हिंदू राष्ट्र का मुद्दा अब किसी एक जिले या क्षेत्र तक सीमित नहीं रह गया है और इसे पूरे नेपाल से जुड़े सवाल के तौर पर देखा जाना चाहिए।
संगठनों की गतिविधियां बढ़ने के साथ यह भी संकेत मिल रहा है कि वे आने वाले समय में इस मांग को लेकर बड़े स्तर पर जनसमर्थन जुटाने की कोशिश कर सकते हैं। हालांकि, इस आंदोलन का वास्तविक जनाधार कितना बड़ा है, इसका आकलन अभी साफ तौर पर नहीं किया जा सकता।
नेपाल का संवैधानिक दर्जा क्या है?
नेपाल कभी दुनिया का एकमात्र आधिकारिक हिंदू राष्ट्र हुआ करता था। लेकिन 2008 में राजशाही खत्म होने और देश के गणतांत्रिक व्यवस्था की ओर बढ़ने के बाद नेपाल को धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र घोषित किया गया।
इसी बदलाव के बाद से नेपाल के कई हिंदूवादी संगठन देश को फिर से हिंदू राष्ट्र घोषित करने की मांग करते रहे हैं। उनका तर्क है कि नेपाल की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को देखते हुए देश का दर्जा दोबारा बदला जाना चाहिए।
दूसरी तरफ नेपाल की मौजूदा संवैधानिक व्यवस्था धर्मनिरपेक्ष गणराज्य पर आधारित है। ऐसे में हिंदू राष्ट्र की मांग केवल धार्मिक मुद्दा नहीं है, बल्कि यह संविधान, राजनीति और देश की शासन व्यवस्था से जुड़ा बड़ा सवाल भी बन जाता है।
मधेस इलाके पर क्यों है खास नजर?
नेपाल के मधेस और तराई इलाके भारत की सीमा से सटे हुए हैं। यहां बड़ी संख्या में लोग रहते हैं और भारत के साथ इन क्षेत्रों के सामाजिक, सांस्कृतिक और पारिवारिक संबंध भी लंबे समय से रहे हैं।
ऐसे में मधेस में सांप्रदायिक तनाव का असर सिर्फ स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रहता। सीमा से लगे भारतीय इलाकों में भी सुरक्षा एजेंसियां और प्रशासन ऐसी घटनाओं पर नजर रखते हैं।
हालिया हिंसा के बाद स्थिति को देखते हुए भारत से सटे उत्तर प्रदेश और बिहार की सीमा वाले इलाकों में भी निगरानी बढ़ाए जाने की बात सामने आई है। इसका मकसद किसी संभावित तनाव या हिंसक गतिविधि को सीमा पार फैलने से रोकना है।
क्या नेपाल में फिर शुरू होगा हिंदू राष्ट्र आंदोलन?
अभी यह कहना मुश्किल है कि नेपाल में हिंदू राष्ट्र की मांग आने वाले दिनों में कितना बड़ा राजनीतिक आंदोलन बन पाएगी। लेकिन जिस तरह अलग-अलग हिंदू संगठन एक मंच पर आने की कोशिश कर रहे हैं और सरकार के वरिष्ठ नेताओं तक अपनी मांग पहुंचा रहे हैं, उससे यह जरूर साफ है कि मुद्दा फिर से सक्रिय हो गया है।
मधेस में हिंसा ने इस बहस को एक नया संदर्भ दिया है। सरकार के सामने चुनौती दोहरी है – एक तरफ उसे प्रभावित क्षेत्रों में शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखनी है, वहीं दूसरी तरफ हिंदू संगठनों की बढ़ती राजनीतिक मांगों को भी संभालना है।
फिलहाल नेपाल में हिंदू राष्ट्र की मांग को लेकर कोई अंतिम राजनीतिक फैसला सामने नहीं आया है। गृह मंत्री के साथ हुई बैठक को भी अधिकारियों ने औपचारिक समझौता नहीं बताया है। फिर भी 13 सूत्रीय प्रस्ताव, 2 अगस्त का ज्ञापन और 15 से ज्यादा संगठनों की एकजुटता ने इस मुद्दे को नेपाल की राजनीति में फिर से चर्चा के केंद्र में जरूर ला दिया है।
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह मांग सिर्फ संगठनों की आवाज बनकर रह जाती है या फिर नेपाल की मुख्यधारा की राजनीति में भी इसका असर दिखाई देने वाला है।
(त्रिपाठी पारिजात)



