Friday, August 29, 2025
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Parakh Saxena writes: कांग्रेस यदि 4-5 राज्यों मे लड़ेगी तो हमेशा नंबर 2 रहेगी

Parakh Saxena writes:1968 से 1992 का दौर अमेरिका के लिये रिपब्लिकन एरा कहा जा सकता है क्योंकि इन 24 वर्षो मे सिर्फ 4 साल ही डेमोक्रेटिक पार्टी ने राज किया, शेष 20 साल रिपब्लिकन रही..

Parakh Saxena writes:1968 से 1992 का दौर अमेरिका के लिये रिपब्लिकन एरा कहा जा सकता है क्योंकि इन 24 वर्षो मे सिर्फ 4 साल ही डेमोक्रेटिक पार्टी ने राज किया, शेष 20 साल रिपब्लिकन रही..

ज़ब 1988 का चुनाव जॉर्ज बुश जीते तो उनके उपराष्ट्रपति ने कह दिया था कि अब तो डेमोक्रेट्स को जिंदा रखना हमारी जिम्मेदारी है ताकि कोई तीसरा मोर्चा खड़ा ना हो।

खैर, डेमोक्रेट्स ने इस उपहास को गंभीरता से लिया और 1992 मे आखिर बिल क्लिंटन के नेतृत्व मे जीत दर्ज करके अपना वनवास खत्म किया।

अब बीजेपी उसी रिपब्लिकन वाली अवस्था मे है अब कांग्रेस को जीवित रखना बीजेपी का दायित्व है ताकि उसके बहाने तीसरी पार्टियों से निपट सके। आज कांग्रेस पंजाब, राजस्थान, हिमाचल, कर्नाटक और तेलंगाना तक सिमट चुकी है।

यही राहुल गाँधी की सबसे बड़ी उपलब्धि है, पाडा प्रधानमंत्री बनेगा इस आस मे इन्होने राज्य स्तर पर खुद को शून्य किया है। अब कांग्रेस को अपनी खोई हुई जमीन पाने के लिये सैकड़ो प्रमोद महाजन या अमित शाह लगेंगे।

राहुल गाँधी की 99 सीटें उसका उच्चतम था उसके बाद अब जो शुरू हुआ वह पतन है जो वोट चोरी के मुद्दे तक तो आ गया। ऐसा मेरा निजी आंकलन है कि इसका अगला टारगेट न्यायप्रणाली या फिर पुलिस और सेना होने वाले है। ये सत्ता की वो निराशा है जो मुहम्मद अली जिन्ना ने भी झेली है।

ज़ब से ममता बनर्जी ने राहुल को नेता प्रतिपक्ष के पद से हटने का आग्रह किया है तब से राहुल गाँधी के लिये जरूरी हो गया है कि खुद को प्रासंगिक बनाये रखे। बिहार मे वो खुद शून्य है और साथ मे आधा दर्जन सीटों वाला तेजस्वी उसके साथ है।

अब ये दोनों मिलकर एक हुड़दंग को जनआंदोलन बताने मे लगे है। संसद सत्र खत्म हो गया अब आप ही सोचिये कि इस सत्र मे विपक्ष ने क्या तीर मारा? संसद सत्ता से ज्यादा विपक्ष का कार्यक्षेत्र है।

खैर, बीजेपी के हित मे है कि इसी तरह कांग्रेस प्रासंगिक बने रहे ऐसा ना हो कि कोई तीसरा चेहरा कांग्रेस से ऊपर उठ जाये। राहुल गाँधी की ट्यूशन से सीखी राजनीति से भिड़ना आसान है लेकिन कोई जननेता आया तो समस्या तो नहीं मगर थोड़ी कठिनाई आएगी।

अमित शाह पिछले कुछ दिनों मे जिस तेजी से उभर रहे है, मोदीजी उनके भरोसे संसद के बिल छोड़कर जा रहे है और वे अकेले अपने दम पर पास करवा रहे है। इससे लग रहा है कि अब हम अमित शाह का उदय देख रहे है।

2029 एक बार और मोदीजी लड़ ले ताकि नेहरू का रिकॉर्ड भी टूट जाए मगर 29 या 34 से अमित शाह का युग शुरू होना लगभग निश्चित है। जो कांग्रेसी अभी मोदीजी को वोट चोर बोल रहे है वे मोदीजी का फोटो लगाकर रोने वाले है।
मोदीजी अब नेता वाली लीग से बाहर है, उनका नाम अमर हो चुका है अब संघर्ष अगले नेताओं का है और ज़ब विपक्ष मे राहुल गाँधी हो तो ये संघर्ष आसान हो जाता है।

कांग्रेस यदि 4-5 राज्यों मे लड़ेगी तो हमेशा नंबर 2 रहेगी और इतना ही हमें चाहिए बशर्ते इनके यहाँ डेमोक्रेटिक पार्टी की तरह कोई बिल क्लिंटन ना आये, वैसे तो इन्होने खुद ही उसके रास्ते बंद कर रखे है तो अभी सब ठीक है।

(परख सक्सेना)

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