Sanskrit Speaking:सर्वत्र संस्कृतम् एवं आधुनिको भव संस्कृतम् वद अभियान अबाध रूप से गतिमान है..पटना में पैंतीसवां ऑनलाइन संस्कृत संभाषण शिविर संपन्न हुआ..
पटना 23 अगस्त। श्रीकृष्ण ने गीता के माध्यम से जो अद्वैत दृष्टि दी,वही संस्कृत सम्भाषण का मर्म है -सबको जोड़ना,सबको एक सूत्र में पिरोना। शुद्ध उच्चारण के लिए संस्कृत का ज्ञान अत्यावश्यक है। संस्कृत बोलना अति सरल है-
ये सभी बातें आधुनिको भव संस्कृतं वद अभियान एवं विहार संस्कृत संजीवन समाज पटना की ओर से भगवान श्रीकृष्ण स्मृति अन्तर्राष्ट्रीय अन्तर्जालीय दशदिवसात्मक संस्कृत सम्भाषण शिविर के समापन समारोह की अध्यक्षता करते हुए विहार संस्कृत संजीवन समाज के महासचिव एवं आधुनिको भव संस्कृतं वद अभियान के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ मुकेश कुमार ओझा ने कही।
कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए डॉ अनिल कुमार सिंह (पूर्व सचिव, गृह विभाग, उत्तर प्रदेश शासन एवं प्रधान संरक्षक, आधुनिको भव संस्कृतं वद अभियान) ने कहा कि संस्कृत केवल भाषा नहीं अपितु भारत की आत्मा है।
अभियान की राष्ट्रीय संयोजिका प्रो रागिनी वर्मा मुख्य वक्ता के रुप में, मुख्य अतिथि के रूप में श्री धर्मेन्द्रपति त्रिपाठी (पूर्व संयुक्त निदेशक, पेंशन विभाग, उत्तर प्रदेश शासन), विशिष्ट अतिथि के रूप में डा अनिल कुमार चौबे, डा अवन्तिका कुमारी, डॉ मधु कुमारी, डॉ मधु कुमारी ने कहा कि श्रीमद्भागवत गीता के उपदेश आज भी जीवन में प्रासंगिक है। संस्कृत भाषा ही उनके संदेश को विश्व तक पहुंचाने का माध्यम है।
इस अवसर पर श्रीकृष्ण स्मृति संस्कृत सम्भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसमें प्रथम पुरस्कार तारा विश्वकर्मा एवं मुरलीधर शुक्ल को, द्वितीय पुरस्कार डॉ आशीष कुमार एवं बीजेन्द्र सिंह को तथा तृतीय पुरस्कार अदिति चोला एवं सुजाता घोष को प्रदान किया गया। विशेष पुरस्कार राहुल कुमार, मधु कुमारी तथा दयानी शारदेय को प्रदान किया गया।
कार्यक्रम का प्रारंभ राहुल कुमार के वैदिक मंगलाचरण से हुआ। कार्यक्रम का संचालन राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ लीना चौहान ने किया। धन्यवाद ज्ञापन डॉ लीना चौहान तथा ऐक्य मन्त्र तारा विश्वकर्मा ने प्रस्तुत किया।