Satish Chandra Mishra का ये लेख बताता है कि दिल्ली को लुटेरों की लुटेरी सरकार से मिली मुक्ति का प्रथम दस्तावेजी ऐतिहासिक सुपरिणाम मात्र डेढ़ माह में ही सामने आ गया है।
पहले यह जान लीजिए कि, वित्तीय वर्ष 2014-15 में दिल्ली राज्य का बजट 36776 करोड़ रु था। 5 वर्ष शासन करने के बाद केजरीवाल द्वारा प्रस्तुत दिल्ली राज्य का वित्तीय वर्ष 2019-20 का बजट 60 हजार करोड़ रुपए का था। यानि 5 वर्ष में दिल्ली के बजट में 23224 करोड़ की वृद्धि केजरीवाल कर सका था। इसके ठीक पांच वर्ष पश्चात् वित्तीय वर्ष 2024-25 का दिल्ली राज्य का बजट 76 हजार करोड़ रुपए था। यानि इन 5 वर्षों में दिल्ली का बजट मात्र 16000 करोड़ आगे बढ़ पाया था।
उपरोक्त आंकड़ें दस्तावेजों में दर्ज़ हैं। यह बता रहे हैं कि, दस वर्षों के केजरीवाल के शासनकाल में दिल्ली के बजट में 39224 करोड़ रुपए की वृद्धि हुई थी।
जबकि आज दिल्ली विधानसभा में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता द्वारा प्रस्तुत बजट का आकार एक लाख करोड़ रुपए है। यह वृद्धि केजरीवाल के पहले 5 वर्षों के दौरान बजट राशि में की गई वृद्धि से लगभग एक हजार करोड़ अधिक है। इसके अलावा ध्यान देने योग्य तथ्य यह भी है कि, केजरीवाल ने दस वर्षों के दौरान दिल्ली राज्य के बजट में जो 39224 करोड़ की वृद्धि की थी, उस राशि की 61% वृद्धि रेखा गुप्ता ने 20 फरवरी को दिल्ली के सीएम पद की शपथ लेने के एक महीने बाद ही 25 मार्च को की है। यह तथ्य बहुत महत्वपूर्ण या सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। क्योंकि बजट राशि में इतनी अभूतपूर्व वृद्धि करने के लिए रेखा गुप्ता के पास कोई जादू की छड़ी नहीं थी।
लेकिन यह इसलिए संभव हो सका है क्योंकि रेखा गुप्ता ने दिल्ली का बजट पूरी ईमानदारी के साथ तलाशा कि दिल्ली में क्या संभावनाएं हैं और इस नीयत से बजट तैयार किया कि, दिल्ली की सरकार का खज़ाना कैसे भरे। उनकी नीयत अपनी और अपनों की तिजोरियां भरने की थी ही नहीं। बजट राशि में इस अभूतपूर्व राशि की वृद्धि यह बता रही है कि, इससे पहले, दस वर्षों के दौरान दिल्ली को लुटेरों की लुटेरी सरकार द्वारा कितनी बेरहमी से लूटा गया है…
उल्लेखनीय है कि… दिल्ली विधानसभा का पांच दिवसीय बजट सत्र 24 मार्च को ‘खीर’ समारोह के साथ शुरू हुआ और 25 मार्च को दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सदन में दिल्ली के लिए इस बार 1 लाख करोड़ का बजट पेश किया।
इस बजट में उल्लिखित महिला समृद्धि योजना के लिए 5100 करोड़, दिल्ली में यमुना की सफाई के लिए 500 करोड़ का बजट तथा दिल्ली में पानी की समस्या से निजात के लिए पानी टैंकरों में जीपीएस लगाने का फैसला, दिल्ली में स्कूल के बच्चों को फ्री लैपटॉप देने की घोषणा, दिल्ली को 5000 और इलेक्ट्रिक बसें मिलने एवं दिल्ली मेट्रो के काम के लिए 2929 करोड़ का बजट पिछले दस वर्षों के दौरान हुई दिल्ली की बेरहम लूट का सच देश और दिल्ली को बताएंगी।
(सतीश चंद्र मिश्रा)