Wednesday, March 4, 2026
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Sonic Weapon का इस्तेमाल हुआ था मादुरो के अपहरण में -यह अस्त्र भारत में रामायण – महाभारत काल में उपयोग में था

Sonic Weapon दुनिया के लिये नया हो सकता है भारत के लिये नहीं..भारत में हमारे धर्मग्रंथों में इसका उल्लेख बहुधा देखा जा सकता है..

Sonic Weapon दुनिया के लिये नया हो सकता है भारत के लिये नहीं..भारत में हमारे धर्मग्रंथों में इसका उल्लेख बहुधा देखा जा सकता है..

अमेरिका से प्राप्त समाचारों से पता चलता है कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के लिए गई अमेरिकन सेना ने ‘सोनिक हथियार’ (ध्वनि आधारित हथियार – Sound Based Weapon) का इस्तेमाल किया जिससे वेनेजुएला के सैनिकों की हालत बिगड़ गई थी और उन्हें अपने काम में सरलता और सफलता दोनो मिल गई थी.

जब अमेरिका की डेल्टा फोर्स के कमांडो राष्ट्रपति भवन से मादुरो को हाथ बांध कर बाहर लाए तब उन्होंने एसबीडब्ल्यू के तकनकी अस्त्र का उपयोग किया। सैनिकों की नाक से खून बहने लगा, उनको खून की उल्टियां हुईं और वे जमीन पर गिर पड़े. रिपोर्ट के अनुसार अचानक एक बेहद तेज ध्वनि तरंग महसूस हुई, जिससे सैनिकों के सिर के अंदर विस्फोट जैसा हुआ, उनकी नाक से खून बहने लगा. कुछ खून की उल्टी करने लगे. वे जमीन पर गिर गए और हिल भी नहीं पा रहे थे. इस आवाज के बाद वे खड़े तक नहीं हो सके ।

आपको यह जानकर अचंभा हो सकता है कि रामचरितमानस में अरण्यकाण्ड में एक ऐसे ही ध्वनि-अस्त्र का वर्णन किया गया है । सूपर्णखा की नाक काटे जाने के कारण खर-दूषण श्रीराम पर आक्रमण करने के लिए अपनी सेना लेकर गए । तब उस युद्ध में श्रीराम ने यह ध्वनि-अस्त्र चलाया था । इस बारे में अरण्यकाण्ड के निम्नलिखित दोहा और उसका अर्थ पढ़िए:

उर दहेउ कहेउ कि धरहु धाए बिकट भट रजनीचरा।
सर चाप तोमर सक्ति सूल कृपान परिघ परसु धरा॥
प्रभु कीन्हि धनुष टकोर प्रथम कठोर घोर भयावहा।
भए बधिर ब्याकुल जातुधान न ग्यान तेहि अवसर रहा॥

इसका भावार्थ ये है कि (खर-दूषण का) हृदय जल उठा। तब उन्होंने कहा- पकड़ लो (कैद कर लो)। (यह सुनकर) भयानक राक्षस योद्धा बाण, धनुष, तोमर, शक्ति (साँग), शूल (बरछी), कृपाण (कटार), परिघ और फरसा धारण किए हुए दौड़ पड़े। प्रभु श्री रामजी ने पहले धनुष का बड़ा कठोर, घोर और भयानक टंकार किया, जिसे सुनकर राक्षस बहरे और व्याकुल हो गए। उस समय उन्हें कुछ भी होश न रहा।

इसी तरह महाभारत में अनेकों बार महारथी योद्धाओं द्वार धनुष-टंकार की बात का उल्लेख पढ़ने में आता है। इस धनुष टंकार के प्रलय घन गर्जन से शत्रु सैनिक पीड़ित व भयभीत हो कर भागने लगते थे। अतएव, यह तकनीकी दुनिया के लिये तो नई हो सकती है, सनातनी भारत के लिये नहीं।

गर्व होता है कि हमारे पूर्वज ऋषि-मुनि कितने ज्ञानी थे और हमारी सनातनी सभ्यता कितनी उन्नत और सम्पन्न थी ।

(प्रस्तुति -अज्ञात वीर)

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