पटना १६ जनवरी। आधुनिको भव संस्कृतं वद अभियान एवं विहार संस्कृत संजीवन समाज पटना की ओर से निरन्तर ४० वां भगवती महासरस्वती संस्कृत शिक्षण एवं सम्भषण शिविर के चतुर्थ दिवस में कर्त्ता- ज्ञान के साथ मकर संक्रांति पर्व की महत्ता पर संस्कृत में विस्तार से चर्चा किया गया।
आधुनिको भव संस्कृतं वद अभियान के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं विहार संस्कृत संजीवन समाज के महासचिव डॉ मुकेश कुमार ओझा, प्रधान संरक्षक डॉ अनिल कुमार सिंह, राष्ट्रीय संयोजिका प्रो रागिनी वर्मा, राष्ट्रीय उपाध्यक्षा डॉ लीना चौहान,जगत नारायण लाल महाविद्यालय खगौल पटना के संस्कृत विभागाध्यक्षा डॉ अवन्तिका कुमारी, मनोहर लाल टेकरीवाल महाविद्यालय सहरसा बिहार के संस्कृत विभागाध्यक्षा डॉ दीप्ति कुमारी,महन्थ शरण संस्कृत महाविद्यालय फतुहा के डा नीरा कुमारी, डॉ रागिनी कुमारी, आधुनिको भव संस्कृतं वद अभियान के संरक्षक डॉ अनिल कुमार चौबे, आदि गणमान्य विद्वानों ने अपनी उपस्थिति से इस अंतर्जालीय सभा की शोभा बढ़ाई।
इस विद्वत-सभा में उपरोक्त विद्वानों सहित उत्तर प्रदेश की प्रांत संयोजिका अदिति चोला, मध्य प्रदेश की प्रांत संयोजिका तारा विश्वकर्मा, बिहार प्रांत के प्रचार सचिव मुरलीधर शुक्ल दिल्ली विश्वविद्यालय के संस्कृत शोध छात्र बीजेन्द्र सिंह, डॉ मंजरी दूबे,उमा विश्वकर्मा, विकास कुमार सहित शिविर के सभी सदस्यों ने अपने विचार व्यक्त किए.
उपरोक्त वक्ताओं ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि मकर संक्रांति अज्ञानता से प्रकाश की ओर ले जाता है।जब सूर्य का संक्रमण धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश होता है, तो वह काल पुण्य काल माना जाता है। यह काल स्फूर्तिदायक और प्रेरणाप्रद काल है। सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण होता है। उत्तरायण काल में ईश्वर की विशेष कृपा होती है तथा सभी कार्य शुभ माना जाता है।
धन्यवाद ज्ञापन लीना चौहान तथा ऐक्य मन्त्र अदिति चोला ने प्रस्तुत की।



