वाह, क्या मैच था। पहले ओवर से लेकर आख़िरी ओवर तक साँस रोक देने वाला मुकाबला। ऐसा सेमीफाइनल बहुत लंबे समय तक याद रखा जाएगा। ढाई सौ रन बनाकर भी मैच आख़िरी ओवर तक सुरक्षित नहीं था। इससे बेहतर सेमीफाइनल क्रिकेट के लिए क्या हो सकता है।
मुंबई की पिच पर रन बरसेंगे ये पहले से तय था। टॉस हारने के बाद उम्मीद थी कि लगभग 200 रन बनेंगे, लेकिन जब टीम इंडिया 253 तक पहुँच गई तो लगा कि शायद हम 20–25 रन ज़्यादा बना गए हैं। उस समय ऐसा लग रहा था कि 220 के आसपास भी चेज़ हो सकता था, लेकिन इंग्लैंड ने जिस तरह बल्लेबाज़ी की उससे एक समय 250 भी कम लगने लगा।
भारत की बल्लेबाज़ी जितनी अच्छी थी, इंग्लैंड ने भी उतनी ही शानदार बैटिंग की। पूरे मैच में ऐसा शायद ही कोई ओवर रहा हो जहाँ लगा हो कि इंग्लैंड पीछे है। फर्क सिर्फ दो चीज़ों ने पैदा किया— जसप्रीत बुमराह की गेंदबाज़ी और अक्षर पटेल की फील्डिंग। जब-जब बुमराह गेंदबाज़ी पर आए, मैच भारत की तरफ झुक गया। उन्होंने अपने चार ओवर चार अलग-अलग फेज़ में किए और हर बार मैच की दिशा बदल दी।
मैच के कई शानदार मोमेंट रहे। अभिषेक शर्मा ने निराश किया, बहुत ही खराब शॉट खेलकर आउट हुए जबकि संजू सैमसन उन्हें रुकने का इशारा कर रहे थे। सैमसन खुद भी आउट हो सकते थे, उनका कैच हैरी ब्रुक ने छोड़ा, लेकिन बड़े मैचों में ऐसे ड्रॉप अक्सर होते हैं। उसके बाद सैमसन ने फिर एक बेहतरीन पारी खेली और लगातार दूसरी बार शानदार अर्धशतक ठोका। दूसरी तरफ छोटे-छोटे योगदान लगभग सभी बल्लेबाज़ों से आए।
लेफ्ट-राइट कॉम्बिनेशन बनाए रखने की रणनीति आज बिल्कुल सटीक बैठी। इसी वजह से इंग्लैंड के गेंदबाज़ों को लगातार लाइन बदलनी पड़ी। ईशान किशन और शिवम दुबे ने एक बार फिर से जबरदस्त पारी खेली।, जबकि हार्दिक पांड्या ने आखिर में अच्छा फिनिश दिया। तिलक वर्मा के जोफरा के 19वें ओवर में तीन छक्के जबरदस्त रहे। भारत 253 तक पहुँच गया।
इंग्लैंड की पारी में भी कई बड़े मोमेंट आए। पहले हार्दिक ने सॉल्ट को आउट किया तो बुमराह ने अपनी पहली ही गेंद पर कप्तान ब्रूक का विकेट लिया। अक्षर पटेल ने शानदार कैच पकड़ा। फिर वरुण चक्रवर्ती के ओवर की पहली तीन गेंदों पर लगातार तीन छक्के पड़े, लेकिन उसी ओवर में उन्होंने जोस बटलर को बोल्ड कर दिया और मैच फिर संतुलन में आ गया।
अक्षर पटेल के ओवर में भी शुरुआत की दो गेंदों पर छक्के पड़े, लेकिन अगली ही गेंद पर उन्होंने स्लोअर डालकर टॉम बेंटन को क्लीन बोल्ड कर दिया। इसके बाद विल जैक्स और जैकब बेथेल की साझेदारी ने मैच को फिर इंग्लैंड की तरफ मोड़ दिया। 22 साल के बेथेल ने शानदार बल्लेबाज़ी की और एक समय लगने लगा कि इंग्लैंड मैच निकाल ले जाएगा।
यहीं पर एक बड़ा मोमेंट आया, अक्षर पटेल का वह अविश्वसनीय कैच, जो रिकॉर्ड बुक में शिवम के खाते में लिखा जाएगा। अर्शदीप की लगभग वाइड गेंद को विल जैक्स ओवर कवर मारने गए, अक्षर ने बाउंड्री पर भागते भागते कैच कर लिया लेकिन बैलेन्स गडबड होने की वजह से शिवम को दे दिया। अद्भुत मोमेंट था। इसके बाद भी रन तेजी से आते रहे और अंत में 18 गेंदों में 45 रन की जरूरत रह गई थी। उस समय मैच फिर से फिफ्टी-फिफ्टी था। यहीं बुमराह का आख़िरी ओवर आया। 6 गेंदों पर निर्भर था भारत का फ़ाइनल में जाना। छह गेंदों में लगभग लगातार 6 यॉर्कर… सिर्फ छह रन। वहीं मैच लगभग भारत की तरफ झुक गया।
फिर भी इंग्लैंड ने हार नहीं मानी। अगले ओवर की पहली गेंद पर छक्का लगा लेकिन हार्दिक पांड्या ने शानदार संयम दिखाया और उसी ओवर में सैम करन का बड़ा विकेट दिला दिया। तिलक वर्मा का वो शानदार कैच जो छक्का हो सकता था। उस ओवर में सिर्फ नौ रन गए और मैच लगभग भारत के हाथ में आ गया। इसके बाद आख़िरी ओवर में 30 रन बनाने थे, शिवम को ओवर मिलना तय था। शिवम ने अच्छा दवाब हैंडल किया। पहली ही गेंद पर बैथल रनआउट हो गए और मैच भारत की झोली में चला गया।
कप्तानी की बात करें तो मुझे सूर्यकुमार यादव की कप्तानी बहुत अच्छी लगी। लोग उनकी आलोचना कर रहे हैं, लेकिन ज़रा सोचिए— आपकी टीम का नंबर वन टी20 बल्लेबाज़ और नंबर वन टी20 गेंदबाज़ अगर फॉर्म में नहीं हों, फिर भी टीम वर्ल्ड कप के फाइनल में पहुँच जाए तो इससे बेहतर कप्तानी क्या हो सकती है?
सबसे अच्छी बात ये रही कि टीम में लगातार भरोसा दिखाया गया और प्लेइंग इलेवन में बेवजह बदलाव नहीं किए गए। जीतती हुई टीम में बदलाव करने की जरूरत भी नहीं है। यही टीम फाइनल खेले तो बेहतर रहेगा।
मुझे टीम से कोई शिकायत नहीं। मुझे शिकायत प्लेयर ऑफ द मैच देने वाले पैनल से जरूर है। 40 ओवर में 500 रन बने और जीत का अंतर बनी बुमराह की सटीक गेंदबाजी और प्लेयर ऑफ द मैच दिया गया संजू सैमसन को। जबकि संजू (89) से अच्छी पारी तो जैकब बैथल (105) की रही। ख़ुद संजू ने भी अवार्ड लेते समय बुमराह का नाम लिया। जब तक आप गेंदबाज को सम्मान नहीं दोगे तब तक अच्छे गेंदबाज कैसे पैदा होंगे? यहाँ सोच बदलने की आवश्यकता है।
(गोविंद परिहार)



