Trump China Visit: ट्रंप-जिनपिंग बैठक में चीन ने अमेरिका को बताया ‘डूबता देश’, ट्रंप बोले — बाइडेन के वक्त की बात है..
दुनिया की दो सबसे बड़ी महाशक्तियों के नेता जब आमने-सामने बैठते हैं, तो हर शब्द बहुत मायने रखता है। ऐसे ही कुछ चौंकाने वाले पल बीते गुरुवार को बीजिंग में देखने को मिले, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के सर्वोच्च नेता शी जिनपिंग की बहुप्रतीक्षित मुलाकात हुई। इस बैठक में बहुत कुछ ऐसा हुआ जिसने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया — सबसे बड़ा झटका तब लगा जब जिनपिंग ने अमेरिका को सीधे तौर पर ‘गिरता हुआ देश’ करार दे दिया।
बीजिंग में जमा हुई दुनिया की नजरें
ट्रंप की यह चीन यात्रा ऐसे वक्त हो रही है जब पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर है। ईरान के साथ जारी संकट के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति का बीजिंग दौरा कूटनीतिक नजरिए से बेहद अहम माना जा रहा है। दुनिया भर के विश्लेषकों और नेताओं की नजरें इस मुलाकात पर टिकी हुई थीं। सबको यह जानना था कि दो धुर प्रतिद्वंद्वी देशों के बीच इस बार किस तरह की बातचीत होती है।
जैसे ही ट्रंप जिनपिंग से मिले, उनका पूरा अंदाज बदला हुआ नजर आया। जो ट्रंप अपने भाषणों में अक्सर चीन को कठघरे में खड़ा करते हैं, वही ट्रंप बीजिंग में जिनपिंग की जमकर तारीफ करते दिखे। उन्होंने जिनपिंग को एक महान नेता बताया और उन्हें अपना अच्छा दोस्त भी कहा। लेकिन इस दोस्ताना माहौल में जिनपिंग ने जो कहा, उसने सबका ध्यान खींच लिया।
जिनपिंग ने क्या कहा जिससे हड़कंप मच गया?
बीजिंग की इस उच्च-स्तरीय बैठक के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अमेरिका के बारे में एक ऐसी टिप्पणी की जो सबके होश उड़ाने के लिए काफी थी। उन्होंने अमेरिका को एक ‘पतन की ओर जाता हुआ देश’ यानी ‘डिक्लाइनिंग नेशन’ बताया। यह बात उन्होंने ट्रंप के सामने, उनकी ही मौजूदगी में कही। कूटनीतिक गलियारों में इसे एक बड़ा और तीखा बयान माना गया।
जिनपिंग ने अपने शुरुआती संबोधन में एक और गहरी बात कही। उन्होंने कहा कि दुनिया अब एक नए मोड़ पर खड़ी है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या चीन और अमेरिका ‘थ्यूसिडिडीज ट्रैप’ से बच सकते हैं। यह अंतरराष्ट्रीय राजनीति की एक पुरानी अवधारणा है, जिसमें जब कोई नई उभरती शक्ति किसी पुरानी ताकतवर सत्ता को चुनौती देती है, तो दोनों के बीच टकराव अक्सर अटल माना जाता है। ठीक वैसे जैसे प्राचीन काल में एथेंस के उदय ने स्पार्टा की सत्ता को खतरे में डाल दिया था।
इसके अलावा जिनपिंग ने ‘सदी में पहले कभी न देखे गए बड़े बदलावों’ का भी जिक्र किया। इस बयान को कई विशेषज्ञों ने दूसरे विश्व युद्ध के बाद बनी अमेरिकी नेतृत्व वाली वैश्विक व्यवस्था के कमजोर पड़ने का संकेत माना।
ट्रंप बोले — शी 100% सही हैं, लेकिन…
अब सबसे दिलचस्प बात यहाँ आती है। जिनपिंग की इस टिप्पणी पर ट्रंप की प्रतिक्रिया बिल्कुल अनोखी रही। वे न तो नाराज हुए, न ही उन्होंने इसका खंडन किया। बल्कि उन्होंने कहा कि जिनपिंग 100 प्रतिशत सही हैं।
लेकिन साथ ही ट्रंप ने इस बयान की अपनी अलग व्याख्या भी पेश की। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट लिखकर साफ किया कि जिनपिंग का इशारा उनके अपने शासनकाल की ओर नहीं, बल्कि पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन के चार साल के कार्यकाल की ओर था।
ट्रंप ने लिखा कि जब राष्ट्रपति शी ने बड़ी चतुराई से अमेरिका को एक ‘संभवतः पतनशील राष्ट्र’ कहा, तो उनका सीधा इशारा ‘स्लीपी जो बाइडेन’ और उनके प्रशासन के उन चार बर्बाद वर्षों की ओर था, जिन्होंने अमेरिका को भारी नुकसान पहुँचाया। ट्रंप ने कहा — इस बात पर शी जिनपिंग बिल्कुल सही हैं।
बाइडेन पर ट्रंप का तीखा हमला
ट्रंप ने इस मौके का पूरा फायदा उठाते हुए बाइडेन प्रशासन पर एक के बाद एक आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि बाइडेन के दौर में खुली सीमाओं की वजह से देश में अराजकता फैली, टैक्स बढ़ाए गए, कमजोर व्यापार समझौते किए गए और देश में अपराध की दर आसमान छू गई। ट्रंप ने DEI यानी विविधता, समानता और समावेशन से जुड़ी नीतियों की भी जमकर आलोचना की। साथ ही ट्रांसजेंडर अधिकारों से जुड़े फैसलों को भी उन्होंने निशाने पर लिया।
ट्रंप का कहना था कि इन सभी नीतियों ने मिलकर अमेरिका की छवि को दुनिया की नजरों में कमजोर कर दिया था। इसीलिए जिनपिंग का ‘पतनशील राष्ट्र’ वाला बयान उस दौर पर लागू होता है, न कि मौजूदा अमेरिका पर।
ट्रंप ने खुद को बताया ‘बदलाव का नेता’
इस पूरे घटनाक्रम में ट्रंप ने अपनी उपलब्धियों की भी खूब चर्चा की। उन्होंने दावा किया कि उनके दोबारा सत्ता में आने के बाद अमेरिका फिर से दुनिया की सबसे शक्तिशाली अर्थव्यवस्था और सैन्य महाशक्ति बन गया है। उन्होंने कहा कि शेयर बाजार अपने सर्वकालिक उच्चतम स्तर पर पहुँच गए हैं, रोजगार के मोर्चे पर हालात बेहतर हुए हैं और दुनिया में एक बार फिर अमेरिका की धाक कायम हो रही है।
ट्रंप ने यह भी दावा किया कि उनके नेतृत्व में ईरान की सैन्य ताकत को काफी हद तक कमजोर कर दिया गया है। उनके मुताबिक अब अमेरिका दो साल पहले वाला कमजोर अमेरिका नहीं है — आज का अमेरिका दुनिया का सबसे आकर्षक और शक्तिशाली देश है।
जिनपिंग ने दी बधाई, ट्रंप ने जताई उम्मीद
ट्रंप ने बताया कि इस मुलाकात के दौरान जिनपिंग ने उन्हें उनकी ‘अद्भुत सफलताओं’ के लिए बधाई भी दी। दोनों नेताओं के बीच इस व्यक्तिगत गर्मजोशी के बीच ट्रंप ने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में अमेरिका और चीन के रिश्ते पहले से कहीं ज्यादा मजबूत और बेहतर होंगे।
ट्रंप ने साफ कहा — दो साल पहले तक हम वाकई एक डूबता हुआ देश थे। इस बात पर मैं राष्ट्रपति शी से पूरी तरह सहमत हूँ। लेकिन आज का अमेरिका पूरी तरह बदल चुका है और दुनिया के लिए सबसे पसंदीदा देश बन गया है।
कूटनीतिक नजरिए से क्या मायने रखती है यह बैठक?
यह पूरी बैठक कई मायनों में खास रही। एक तरफ जहाँ ट्रंप जिनपिंग की तारीफ में कसीदे पढ़ रहे थे, वहीं जिनपिंग ने बड़ी चतुराई से अमेरिका की कमजोरियों पर उँगली रखी। दोनों नेताओं की इस बातचीत में ताइवान और व्यापार जैसे बड़े मुद्दे भी शामिल रहे। भारत समेत कई देश इस दौरे पर बारीकी से नजर रख रहे हैं।
यह भी दिलचस्प है कि बैठक के पहले दिन जिनपिंग ने ‘पतनशील राष्ट्र’ शब्द का सीधे इस्तेमाल नहीं किया। इसलिए यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि ट्रंप जिस बयान का जिक्र कर रहे हैं, वह खुली बैठक में कहा गया था या दोनों नेताओं के बीच हुई निजी बातचीत का हिस्सा था।
ट्रंप-जिनपिंग की यह मुलाकात केवल दो नेताओं की मुलाकात नहीं थी — यह दुनिया की दो सबसे बड़ी ताकतों के भविष्य की दिशा तय करने की कोशिश थी। जिनपिंग का ‘पतनशील राष्ट्र’ वाला बयान, चाहे जिस संदर्भ में कहा गया हो, अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत जरूर देता है। और ट्रंप का इस पर सहमति जताना — भले ही बाइडेन के हवाले से — यह दिखाता है कि अमेरिकी राजनीति में घरेलू मतभेद अब वैश्विक मंच पर भी दिखने लगे हैं।
(त्रिपाठी पारिजात)




