America Iran War: ईरान को लेकर दक्षिणपंथी खेमा भी बंट गया है, डोनाल्ड ट्रम्प ने जो भारत विरोधी बयान दिये थे उसका असर ईरान को समर्थन के रूप मे सामने है..
दुनिया मे आग लगी पड़ी है लेकिन हम होली की तैयारी मे है, ट्रम्प चाचा, नेतन्याहू काका समेत कई नेता युद्ध की घोषणा कर रहे है लेकिन हमारे मोदीजी सेमीकंडक्टर चीप की फैक्ट्री का उद्घाटन कर रहे है। उलझना नहीं सिर्फ विकास करना यही मोदीजी की रीत है।
ईरान को लेकर दक्षिणपंथी खेमा भी बंट गया है, डोनाल्ड ट्रम्प ने जो भारत विरोधी बयान दिये थे उसका असर ईरान को समर्थन के रूप मे सामने है। निष्पक्ष अवलोकन आवश्यक है।
नरेंद्र मोदी जी को आप इस आरोप से दूर नहीं रख सकते, उन्हें पहले से पता था कि ईरान पर हमला होगा और कैसे होगा। थोड़ा ऊपर नीचे हो सकता है क्योंकि युद्ध मे होता ही है, लेकिन अमेरिका और इजरायल ने भारत को डाउनलोड दिया होगा ये पूरी तरह संभव है।
ईरान की बात करें तो ये मिडिल ईस्ट का एकमात्र देश है जो अमेरिका के विरोध मे था, डोनाल्ड ट्रम्प जो कभी कभी एंटी इंडिया हो जाते है ऐसे मे मानसिक जरूरत होती है कि कुछ देश अमेरिका के विरोध मे भी रहे। ईरान से हमारा व्यापार तो कुछ खास हो नहीं पा रहा, दूसरा ईरान IMEC कॉरिडोर की सबसे बड़ी बाधा है।
ईरान को यदि अपनी बहादुरी दिखानी है तो वाशिंगटन और न्यूयॉर्क पर बम मारकर दिखाए, यूएई और सऊदी अरब को परेशान करने का क्या औचित्य है? ईरान भारत के लिए आवश्यक हो सकता है लेकिन आंकड़े देखे तो अरब देश हमारे लिए ज्यादा खास है। IMEC कॉरिडोर पर काम नहीं हो पाया क्योंकि ईरान ने इजरायल को गाजा मे उलझाया था।
ईरान की अपनी महिलाये बुरखा जला रही है, युवा सड़को पर है, सरकार जनता का गला घोंट रही है। ईरान से हम तेल वैसे भी नहीं खरीद पा रहे ले देकर एक बंदरगाह है वो तो यदि पहलवी वंश का शासन आया तो भी रहेगा ही।
ईरान ने ये किया वो किया ये सब बेफिजूल है, युद्ध मे नुकसान सब ही का होता है। ईरान ने भी थोड़ा नुकसान कर दिया लेकिन युद्ध के पहले ही दिन आपका सुप्रीम लीडर मारा गया ये बड़ी बात है।
असली बात तब होती ज़ब आप अंतिम युद्ध जीत सके, ऑपरेशन सिंदूर को एक साल होने वाले है लेकिन क्रॉस बॉर्डर टेरर की एक घटना नहीं हुई। दुबई की होटल पर मिसाइल मार देना कोई बहादुरी नहीं है।
फ़ारस की खाड़ी मे खड़ा अमेरिकी युद्धपोत अब्राहम लिंकन ईरान की नौसेना को हिलने तक नहीं दे रहा, खामनेई की मौत की घोषणा को 5 घंटे होने को है मगर अब तक खामनई ने लाइव आकर वीडियो रिलीज नहीं किया। सोशल मीडिया की दो सुपरपॉवर रूस और चीन भी ख़ामोशी से तबाही को देख रही है।
ये युद्ध अमेरिका इराक से भी जल्दी जीतेगा, प्रश्न सिर्फ इतना है कि ज़ब राजतंत्र के हवाले करके जाओगे तो ईरान कितना झेल पायेगा। यहाँ इस्लामिक स्टेट जैसा आतंकी संगठन ना खड़ा हो जाये।
ईरानी इस्लामिक सत्ता का अंत निश्चित है, अली खामनई की मौत इसका उदाहरण है। दुःखद है उसके परिवार के 47 लोग भी मारे गए, हर युद्ध के बाद हम आंकलन करते है लेकिन इस प्रार्थना के साथ कि अब दोबारा युद्ध ना हो।
भारत की विदेश नीति को कटघरे मे ना खड़ा करा करे, इजरायल भारत का परम मित्र है। ईरान ने कश्मीर मुद्दे पर भारत का साथ कभी नहीं दिया ऐसे मे एक साइड चुनना बहुत कठिन काम नहीं है। मोदी सरकार को विशेष धन्यवाद, दुनिया इतने युद्ध झेल रही है मगर भारत AI, डेटा, सेमीकंडक्टर चीप और ग्रीन एनर्जी पर काम कर रहा है।
मोदीजी के बाद चाहे अमित शाह आये, योगी आये या फडणवीस लेकिन ये मोमेंटम बना रहना चाहिए। आग लगे बस्ती मे, हम पड़े मस्ती मे। झगड़े मे पड़ना नहीं सिर्फ और सिर्फ विकास करना।
(परख सक्सेना)



