World War 3: देखने वाली बात ये भी है कि यदि हुआ वर्ल्ड वॉर हुआ या फिर जो मौजूदा हाल है उसे देखते हुए कौन सा देश किसके साथ खड़ा हो सकता है?..
क्या ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत के बाद अब दुनिया के मुस्लिम देश मिलकर
अमेरिका और इज़रायल की कमर तोड़ देंगे?
दरअसल, मिडिल ईस्ट बारूद के ढेर पर धू-धू जलता नज़र आ रहा है। आसमान में धमाकों की गूंज, सायरन की आवाज और बढ़ती बेचैनी ने पूरे क्षेत्र को हिला दिया है।
कैसे शुरू हुआ टकराव
इजरायल ने 28 फरवरी 2026 को ईरान की राजधानी तेहरान पर हमला किया। इसके बाद हालात तेजी से बिगड़ गए और दोनों देशों के बीच खुला संघर्ष शुरू हो गया।
शनिवार को इजरायल ने तेहरान के कई ठिकानों को निशाना बनाया। धमाकों की आवाजें दूर-दूर तक सुनी गईं। जवाब में ईरान ने भी इजरायल के कई इलाकों पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया। लेकिन ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत के बाद ईरान ने खुली जंग का ऐलान कर दिया।
अमेरिका की एंट्री कैसे हुई
वहीं हमले के बाद अमेरिका ने खुलकर इजरायल का साथ दिया। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बयान जारी कर कहा कि यह कार्रवाई ईरान के परमाणु कार्यक्रम और मिसाइल क्षमता को रोकने के लिए की गई है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार यह संयुक्त अभियान पहले से योजना के तहत तैयार किया गया था।
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी कहा कि ईरान लंबे समय से उनके देश की सुरक्षा के लिए खतरा बना हुआ है।
ईरान की प्रतिक्रिया
ईरान ने इस हमले को अपनी संप्रभुता पर सीधा हमला बताया है। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने इसे गैरकानूनी और नाजायज करार दिया। ईरान की सेना को हाई अलर्ट पर रखा गया है और मिसाइल डिफेंस सिस्टम सक्रिय कर दिए गए हैं।
कौन किसके साथ खड़ा है
इस संघर्ष में कई देश अलग-अलग पक्षों में नजर आ रहे हैं। तुर्की, लेबनान, सीरिया, कतर और कुछ अन्य देश ईरान के समर्थन में बताए जा रहे हैं।
वहीं इजरायल को अमेरिका के साथ-साथ जी7 देशों – इटली, फ्रांस, जर्मनी, यूके, कनाडा और जापान – का समर्थन मिल रहा है। भारत इस पूरे मामले में तटस्थ रुख अपनाए हुए है और किसी एक पक्ष का खुला समर्थन नहीं कर रहा।
क्या असर पड़ सकता है
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह युद्ध लंबा चला तो इसका असर सिर्फ मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं रहेगा। तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं, शेयर बाजार में गिरावट आ सकती है और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती है।
आगे क्या हो सकता है
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह संघर्ष सीमित रहेगा या बड़ा युद्ध बन जाएगा। दुनिया की नजरें अब मिडिल ईस्ट पर टिकी हैं। आने वाले दिन तय करेंगे कि हालात शांत होंगे या और गंभीर।



