Anupama Gulati Murder Case में हाईकोर्ट ने सुनाया निर्णायक आदेश: 72 टुकड़ों में शव काटने के दोषी पति की उम्रकैद बरकरार, अपील खारिज..
उत्तराखंड के बहुचर्चित अनुपमा गुलाटी हत्याकांड में नैनीताल हाईकोर्ट ने एक अहम और दूरगामी निर्णय सुनाते हुए निचली अदालत के फैसले को पूरी तरह कायम रखा है। अदालत ने पत्नी की हत्या कर उसके शव के 72 हिस्से करने वाले दोषी पति की सजा को लेकर दायर अपील को खारिज कर दिया है। इस फैसले के साथ ही यह स्पष्ट हो गया है कि आरोपी को दी गई आजीवन कारावास की सजा में किसी भी तरह की राहत नहीं दी जाएगी।
यह मामला वर्ष 2010 में सामने आया था और अपनी क्रूरता व अमानवीयता के कारण पूरे उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि देशभर में गहरी चर्चा का विषय बना था। लंबे समय से इस केस में हाईकोर्ट के निर्णय को लेकर लोगों की निगाहें टिकी हुई थीं।
हाईकोर्ट की खंडपीठ ने सजा को ठहराया सही
नैनीताल हाईकोर्ट की खंडपीठ, जिसमें न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी और न्यायमूर्ति आलोक मेहरा शामिल थे, ने देहरादून की निचली अदालत के आदेश की विस्तृत समीक्षा के बाद आरोपी राजेश गुलाटी की अपील को अस्वीकार कर दिया। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि निचली अदालत द्वारा सुनाया गया फैसला कानून, साक्ष्यों और अपराध की गंभीरता के अनुरूप है, और उसमें हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता।
हाईकोर्ट ने माना कि यह अपराध ‘जघन्य’ श्रेणी में आता है और समाज को झकझोर देने वाला है, इसलिए सजा में नरमी का प्रश्न ही नहीं उठता।
क्या था पूरा मामला
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 17 अक्टूबर 2010 को राजेश गुलाटी ने अपनी पत्नी अनुपमा गुलाटी की निर्मम हत्या कर दी थी। हत्या के बाद उसने शव के 72 टुकड़े किए और उन्हें डीप फ्रीजर में छिपा दिया। यह सनसनीखेज अपराध उस समय उजागर हुआ, जब 12 दिसंबर 2010 को अनुपमा का भाई दिल्ली से देहरादून पहुंचा और घर की स्थिति देखकर पुलिस को सूचना दी। इसके बाद मामले की परतें खुलती चली गईं।
निचली अदालत ने सुनाई थी उम्रकैद की सजा
देहरादून की ट्रायल कोर्ट ने 1 सितंबर 2017 को इस मामले में फैसला सुनाते हुए राजेश गुलाटी को आजीवन कारावास की सजा दी थी। इसके साथ ही अदालत ने उस पर 15 लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया था। कोर्ट ने आदेश दिया था कि अर्थदंड की राशि में से 70 हजार रुपये सरकारी खजाने में जमा किए जाएं, जबकि शेष रकम को अनुपमा के बच्चों के बालिग होने तक बैंक में सुरक्षित रखा जाए।
ट्रायल कोर्ट ने अपने फैसले में इस हत्या को अत्यंत नृशंस और अमानवीय बताते हुए कहा था कि यह अपराध समाज के खिलाफ है और कठोर सजा का पात्र है।
अपील को लेकर हाईकोर्ट का रुख
पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर राजेश गुलाटी ने निचली अदालत के आदेश को चुनौती देते हुए वर्ष 2017 में नैनीताल हाईकोर्ट में आपराधिक अपील दायर की थी। उसने सजा में कमी और फैसले पर पुनर्विचार की मांग की थी। हालांकि, हाईकोर्ट ने सभी तर्कों और उपलब्ध साक्ष्यों का विश्लेषण करने के बाद आरोपी की दलीलों को खारिज कर दिया।
बुधवार को सुनाए गए इस फैसले के साथ ही यह स्पष्ट हो गया कि राजेश गुलाटी को आजीवन कारावास की सजा पूरी तरह भुगतनी होगी और निचली अदालत का निर्णय पूरी तरह वैध और न्यायसंगत है।
समाज के लिए कड़ा संदेश
नैनीताल हाईकोर्ट के इस निर्णय को महिला सुरक्षा और गंभीर अपराधों के खिलाफ न्यायपालिका के सख्त रुख के रूप में देखा जा रहा है। अदालत ने यह संदेश दिया है कि इस तरह के जघन्य अपराधों में दोषियों को किसी भी स्तर पर राहत नहीं दी जाएगी और कानून पूरी कठोरता के साथ अपना काम करेगा।



