Thursday, March 19, 2026
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Divya Sharma writes: गुरुओं के बलिदान का ऋण कैसे चुकायेंगे हम

Divya Sharma writes: गुरुओं का बलिदान याद नहीं किया जाता था कांग्रेस राज में लेकिन अब हिन्दूवादी सरकार उनके प्रति कृतज्ञता प्रकट कर रही है देश भी धन्यवाद दे रहा है उनको..

Divya Sharma writes: गुरुओं का बलिदान याद नहीं किया जाता था कांग्रेस राज में लेकिन अब हिन्दूवादी सरकार उनके प्रति कृतज्ञता प्रकट कर रही है देश भी धन्यवाद दे रहा है उनको..

भारत के हर बच्चे को यह ज्ञात होना चाहिए कि कैसे धर्म की रक्षा के लिए हमारे गुरुओं ने कुर्बानी दी। उन्हें मालूम होना चाहिए कि यह बलिदान किसी एक पंथ के लिए नहीं, बल्कि भारत की आत्मा, उसकी आस्था और उसकी स्वतंत्र चेतना के लिए था।

यह गाथा उन सिख गुरुओं की है, जिन्होंने धर्म को केवल उपदेशों में नहीं, अपने जीवन और अपनी संतानों के बलिदान में उतार दिया। जब-जब सनातन पर संकट आया, जब-जब अत्याचार के सामने आस्था को झुकाने की कोशिश हुई,तब सिख गुरु एक अडिग दीवार बनकर खड़े हुए।

गुरु अर्जन देव जी का अडिग सत्य, गुरु तेग बहादुर जी का सनातन की रक्षा में दिया गया शीश जिसे इतिहास हिंद की चादर कहकर नमन करता है।और गुरु गोबिंद सिंह जी का वह अप्रतिम साहस, जिन्होंने धर्म की रक्षा के लिए अपने चारों साहिबज़ादों तक को समर्पित कर दिया ।यह सब केवल घटनाएँ नहीं, भारत की चेतना के स्तंभ हैं। यह बताता है कि सिख परंपरा सनातन मूल्यों धर्म, स्वतंत्रता, मर्यादा और साहस की रक्षा की सबसे तेज़ धार रही है।

इसीलिए यह संदेश स्पष्ट है कि सिख और हिंदू अलग नहीं ,एक ही संस्कृति की दो सशक्त धाराएँ हैं। सिख गुरुओं का त्याग सनातन के लिए था, और सनातन की रक्षा में दिया गया हर बलिदान पूरे भारत का है।

आज यह देखकर मन सचमुच गदगद हो जाता है कि भारत की वर्तमान सरकार इन अमर गाथाओं को वह सम्मान दे रही है।वीर बाल दिवस’ के रूप में साहिबज़ादों के अद्भुत साहस को राष्ट्रीय स्मृति में स्थान दिया गया।

गुरु तेग बहादुर जी के शहादत दिवस को पूरे राष्ट्र ने स्मरण किया।प्रदर्शनी, कीर्तन और शैक्षिक कार्यक्रमों के माध्यम से उनके संदेश को जन-जन तक पहुँचाया गया। विद्यालयों और सार्वजनिक मंचों पर सिख गुरुओं के इतिहास को बच्चों तक पहुँचाने की पहल हुई, ताकि नई पीढ़ी इन मूल्यों को केवल पढ़े नहीं, जीए। ऐतिहासिक स्थलों का संरक्षण और राष्ट्रीय आयोजनों में गुरुओं की शहादत का स्मरण ,यह सब बताता है कि यह स्मृति अब सीमित नहीं, राष्ट्रीय चेतना बन रही है।

यह समय केवल श्रद्धांजलि का नहीं, सत्य को अगली पीढ़ी तक सौंपने का है। जब भारत का बच्चा यह जानेगा कि उसकी पहचान किन बलिदानों से बनी है, तब वह नफरत नहीं, धर्म और साहस को अपना मार्ग बनाएगा।

सिख गुरुओं का बलिदान अमर है।

सनातन अटल है।और जब तक यह इतिहास हमारे बच्चों के हृदय में जीवित रहेगा भारत अडिग और अजेय रहेगा।मैं माताओं से कहूंगी कि अपने बच्चे को गुरुओं के बलिदान की गाथा जरूर सुनाई और भी बताएं कि कैसे मुगलों ने हम से हमारी पहचान हमारी संस्कृति छीनने की कोशिश की।उन्हें बताएं कि कैसे सनातन की रक्षा के लिए सिख गुरु खड़े हुए।

(दिव्या शर्मा)

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