Nida Khan: नासिक TCS केस में बड़ा खुलासा: आखिर कहां छिपी थी जिहादन निदा खान, पुलिस ने कैसे किया गिरफ्तार
महाराष्ट्र के चर्चित नासिक टीसीएस मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। लंबे समय से फरार चल रही मुख्य आरोपी निदा खान को आखिरकार पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। इस मामले ने पिछले कई हफ्तों से पूरे राज्य में चर्चा पैदा कर रखी थी। अब गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि कई अहम राज सामने आ सकते हैं।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, निदा खान को छत्रपति संभाजीनगर से हिरासत में लिया गया। उसके खिलाफ करीब 40 दिन पहले मामला दर्ज किया गया था। तभी से पुलिस उसकी तलाश में लगातार छापेमारी कर रही थी। इस कार्रवाई में नासिक एसआईटी, छत्रपति संभाजीनगर क्राइम ब्रांच और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम शामिल रही।
बताया जा रहा है कि आरोपी पिछले कुछ दिनों से नारेगांव इलाके की कैसर कॉलोनी में एक फ्लैट में छिपकर रह रही थी। पुलिस को उसकी मौजूदगी की सूचना मिलने के बाद लगातार निगरानी रखी जा रही थी। आखिरकार गुरुवार देर रात टीम ने घेराबंदी कर उसे पकड़ लिया।
जांच में सामने आया है कि निदा खान अपने परिवार के कुछ सदस्यों के साथ वहां रह रही थी। पुलिस काफी सावधानी के साथ ऑपरेशन चला रही थी ताकि आरोपी वहां से भाग न सके। गिरफ्तारी के तुरंत बाद उसे कानूनी प्रक्रिया के लिए अदालत में पेश किया गया और फिर नासिक ले जाया गया।
यह मामला तब सुर्खियों में आया जब कुछ महिला कर्मचारियों ने गंभीर आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई। आरोपों में मानसिक प्रताड़ना, धार्मिक दबाव और यौन शोषण जैसी बातें शामिल थीं। शिकायत के बाद पुलिस ने जांच शुरू की और कई लोगों से पूछताछ की।
इस मामले में पहले भी कई कर्मचारियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान कुछ ऐसे तथ्य सामने आए जिनके आधार पर निदा खान की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी गई। इसी वजह से उसकी तलाश तेज कर दी गई थी।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, आरोपी पर सहकर्मियों को धार्मिक तौर-तरीके अपनाने के लिए प्रेरित करने और दबाव बनाने के आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि कार्यस्थल का माहौल धीरे-धीरे प्रभावित किया जा रहा था। हालांकि इन आरोपों की पूरी सच्चाई अभी जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, कुछ पीड़ित महिलाओं ने बयान में कहा कि उन्हें खास प्रकार के कपड़े पहनने और धार्मिक गतिविधियों में शामिल होने के लिए कहा जाता था। जांच में यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क काम कर रहा था या नहीं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच एजेंसियां अब इलेक्ट्रॉनिक सबूतों पर भी फोकस कर रही हैं। पुलिस को उम्मीद है कि आरोपी का मोबाइल फोन, डायरी और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड कई अहम जानकारियां दे सकते हैं। अधिकारियों का मानना है कि इससे मामले से जुड़े अन्य लोगों और संभावित संपर्कों का पता चल सकता है।
जांच टीम यह भी देख रही है कि क्या इस मामले का संबंध राज्य के बाहर किसी नेटवर्क से जुड़ा हुआ है। कुछ रिपोर्ट्स में मालेगांव और विदेशों तक संपर्क होने की आशंका जताई गई है। हालांकि पुलिस ने अभी तक इस बारे में आधिकारिक रूप से ज्यादा जानकारी साझा नहीं की है।
गिरफ्तारी से पहले निदा खान ने अदालत में सुरक्षा की मांग भी की थी। उसने अपनी स्वास्थ्य स्थिति का हवाला देते हुए राहत की अपील की थी। लेकिन अदालत ने जांच एजेंसी की दलीलों को महत्व देते हुए माना कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए आरोपी से पूछताछ जरूरी है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि हिरासत के दौरान कई अहम सवालों के जवाब तलाशे जाएंगे। खास तौर पर यह पता लगाने की कोशिश होगी कि आखिर शिकायतों के पीछे कितनी सच्चाई है और क्या किसी बड़े नेटवर्क का इसमें हाथ था।
इस पूरे मामले ने आईटी सेक्टर में काम करने वाले कर्मचारियों के बीच भी चिंता बढ़ा दी है। कई लोगों का मानना है कि कंपनियों में सुरक्षित और निष्पक्ष माहौल बनाए रखना बेहद जरूरी है। वहीं दूसरी ओर कुछ सामाजिक संगठनों ने निष्पक्ष जांच की मांग की है ताकि सच सामने आ सके।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में जांच बेहद संवेदनशील तरीके से की जानी चाहिए। बिना पर्याप्त सबूत किसी निष्कर्ष पर पहुंचना सही नहीं होगा। इसलिए पुलिस अब हर पहलू की बारीकी से जांच कर रही है।
फिलहाल, नासिक टीसीएस केस की जांच जारी है और आने वाले दिनों में कई नए खुलासे सामने आ सकते हैं। पुलिस की कोशिश है कि मामले से जुड़े हर तथ्य को सामने लाया जाए ताकि सच्चाई स्पष्ट हो सके। पूरे महाराष्ट्र की नजर अब इस हाई-प्रोफाइल केस की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।
(न्यूज़ हिन्दू ग्लोबल ब्यूरो)



