Speak Sanskrit: आधुनिक शिक्षा प्रणालि में संस्कृत की प्रासंगिकता विषय पर पटना के विद्वतजनों के मध्य एक संगोष्ठी का आयोजन सम्पन्न हुआ..
आज दिनांक 06-01-2026 को राजकीय संस्कृत महाविद्यालय पटना में एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया जिसका विषय था “आधुनिकशिक्षाप्रणाल्यां संस्कृतस्य प्रासंगिकता”।
इस कार्यक्रम के संरक्षक कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. लक्ष्मीनिवास पाण्डेय ने कहा कि आधुनिक शिक्षा के साथ संस्कृत का समन्वय आज अत्यन्त आवश्यक है। विज्ञान का विद्यार्थी संस्कृत पढे तथा संस्कृत का विद्यार्थी विज्ञान पढेगा तो निश्चित रूप से समाज का विकास होगा।
कार्यक्रम में अध्यक्ष पद पर विराजमान महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ मनोज कुमार ने कहा कि संस्कृत समस्त मानवों में एकता की भावना भरती है तथा समाज को जोडने की बात करती है। संस्कृत के ज्ञान के बिना मनुष्य में सामाजिकता नहीं आ सकती है।
मुख्य वक्ता के रूप में सोमनाथ संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. गोपबन्धु मिश्र ने कहा कि आधुनिक शिक्षा नीति में संस्कृत को विशेष स्थान प्राप्त है। आधुनिक शिक्षा में मूल्यशिक्षा का समावेश अत्यन्त आवश्यक है जो केवल संस्कृत से ही सम्भव हो सकता है। “मातृदेवो भव पितृदेवो भव” की भावना का उद्घोष संस्कृत ने ही किया है जो आधुनिक समाज की ज्वलन्त समस्या का स्थायी निदान है।
सारस्वत वक्ता के रूप में उपस्थित मालवीय भवन काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के पूर्व मानित निदेशक प्रो. कृष्णकान्तशर्मा ने कहा कि सही शिक्षा वही है जिससे मानवता की सामाजिकता की तथा राष्ट्रीयता की रक्षा हो सके। आधुनिक शिक्षा विद्यार्थी को मशीन बना रही है जिससे छात्र उद्योग को तो प्राप्त कर लेता है लेकिन जीवन में शान्ति अथवा आनन्द कभी नहीं पा पाता है।
संस्कृत प्रकृति के प्रत्येक कण कण में अपनत्व का व्यवहार सिखाती है। संस्कृत के बिना आधुनिक शिक्षा अपूर्ण है। महाविद्यालय के व्याकरण विभाग के आचार्य प्रो. उमेश शर्मा ने कहा कि आधुनिक शिक्षा प्रणाली में संस्कृत का स्थान बहुत महत्त्वपूर्ण है। क्योंकि संस्कृत में मूल्य की शिक्षा निहित है।
कार्यक्रम की संयोजिका महाविद्यालय की वरिष्ठ सहायक प्राचार्या डॉ. ज्योत्स्ना ने कहा कि संस्कृत के ज्ञान से ही आधुनिक शिक्षा प्रणाली परिपुष्ट होगी।
कार्यक्रम के सहसंयोजक तथा संचालक सहायक प्राचार्य डॉ. शशिकान्त तिवारी ने कहा कि आधुनिक शिक्षा प्रणाली से अधीत छात्र बडे बडे पदों पर विराजमान तो हो जाते हैं परन्तु मूल्य शिक्षा के अभाव में पारिवारिक कठिनता के कारण आत्महत्या तक कर ले रहा है। आतंकवाद तक को अपना ले रहा हैं परन्तु यदि उसी आधुनिक शिक्षा प्रणाली में संस्कृत को स्थान मिले तो निश्चित रूप से आज का युवा विवेकानन्द जैसा बनेगा।
कार्यक्रम में महाविद्यालय के अध्यापक गण डॉ.शिवानन्द पाण्डेय, डॉ. विवेकानन्द पासवान, डॉ. अल्का, डॉ. शबाना शिरीन, डॉ. मुकेश ओझा सहित आनलाइन रूप से सौ से अधिक विद्वान अतिथि तथा छात्र छात्राए उपस्थित रहे।



