Trump Venezuela: जब अमेरिकी डेल्टा फोर्स मादुरो को ‘उठाकर’ ले गई — तब क्यों खामोश रही वेनेजुएला की सेना? ट्रंप प्रशासन की ‘सीक्रेट डील’ थ्योरी ने बढ़ाई वैश्विक हलचल..
वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी अब केवल एक सैन्य ऑपरेशन की कहानी नहीं रह गई है, बल्कि यह एक ऐसे रहस्यमय भू-राजनीतिक घटनाक्रम में बदल चुकी है जिसने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। जिस तरह से अमेरिका की डेल्टा फोर्स ने राजधानी काराकास के भीतर घुसकर राष्ट्रपति को बेहद सीमित प्रतिरोध के बीच हिरासत में लिया, उसने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर वेनेजुएला की सेना उस समय कर क्या रही थी?
राष्ट्रपति मादुरो को सोमवार को कड़ी सुरक्षा के बीच न्यूयॉर्क के मैनहैटन कोर्ट में पेश किया गया। लेकिन इस गिरफ्तारी से कहीं अधिक चर्चा उस ‘अजीब खामोशी’ की हो रही है, जो उस वक्त देखने को मिली जब अमेरिकी कमांडो हेलीकॉप्टरों से उतरकर सीधे राष्ट्रपति के ठिकाने तक पहुंचे और उन्हें अपने साथ ले गए।
काराकास में हुआ ‘ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व’ — बेहद सटीक और लगभग बिना युद्ध
शनिवार तड़के शुरू हुए इस विशेष अभियान को अमेरिकी सेना ने ‘ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व’ नाम दिया था। हेलीकॉप्टरों और विशेष कमांडो दस्तों के जरिये राष्ट्रपति के सुरक्षित परिसर पर धावा बोला गया। हैरानी की बात यह रही कि:
सिर्फ एक अमेरिकी हेलीकॉप्टर को हल्का नुकसान हुआ, कुछ ही सैनिक घायल हुए जबकि वेनेजुएला की ओर से कोई संगठित सैन्य जवाबी हमला नहीं हुआ
यह परिदृश्य उस देश में देखने को मिला जिसकी सेना को लैटिन अमेरिका की सबसे सुसज्जित सेनाओं में गिना जाता है।
सेना की चुप्पी ने जन्म दी ‘सीक्रेट डील’ थ्योरी को
सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार, जिस स्तर की तैयारी और हथियार वेनेजुएला की सेना के पास मौजूद हैं, उसके बावजूद लगभग शून्य प्रतिरोध किसी सामान्य सैन्य हालात की तरह नहीं देखा जा सकता।
तक्षशिला इंस्टीट्यूशन के यूएस स्टडीज़ प्रोग्राम के प्रमुख ब्रिगेडियर (रिटायर्ड) अनिल रमन का कहना है कि कम ऊंचाई पर उड़ते हेलीकॉप्टरों को साधारण हथियारों से भी निशाना बनाया जा सकता था। इसके बावजूद, हजारों इग्ला मिसाइल सिस्टम होते हुए भी उनका इस्तेमाल नहीं किया गया।
उनके अनुसार, यह स्थिति साफ संकेत देती है कि मादुरो सरकार के भीतर के कुछ ताकतवर धड़े और ट्रंप प्रशासन के बीच कोई गुप्त समझौता पहले से मौजूद हो सकता है।
150 से ज्यादा विमान, ड्रोन और बॉम्बर — फिर भी ज़मीनी चुप्पी क्यों?
जनरल डैन केन, ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन के मुताबिक, इस ऑपरेशन में:
150+ विमान, फाइटर जेट, बॉम्बर, निगरानी ड्रोन का उपयोग कर वेनेजुएला की रूसी-निर्मित एयर डिफेंस प्रणाली को निष्क्रिय किया गया। लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि सिर्फ एयर डिफेंस सिस्टम को खत्म कर देना यह नहीं बताता कि जमीनी सैनिकों ने अमेरिकी हेलीकॉप्टरों को क्यों नहीं रोका।
डेल्सी रोड्रिगेज की भूमिका पर बढ़ी चर्चा
मादुरो की गिरफ्तारी के बाद उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने अंतरिम राष्ट्रपति की जिम्मेदारी संभाल ली है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने उन्हें मौन स्वीकृति दी है।
सूत्र बताते हैं कि डेल्सी रोड्रिगेज और उनके भाई जॉर्ज रोड्रिगेज बीते वर्ष अमेरिका से गुप्त वार्ताओं में शामिल रहे थे, जिनमें अरब देशों के कुछ मध्यस्थ भी थे। इन वार्ताओं में मादुरो के सत्ता छोड़ने, अंतरिम सरकार बनाने, तुर्की या क़तर में निर्वासन जैसे प्रस्ताव पर बातचीत हुई थी, हालांकि किसी प्रस्ताव में गिरफ्तारी की बात नहीं थी।
वेनेजुएला का भविष्य अब किस मोड़ पर?
विश्लेषकों का मानना है कि मादुरो की गिरफ्तारी के बाद देश तीन दिशाओं में जा सकता है:
डेल्सी रोड्रिगेज सेना के समर्थन से सत्ता में टिकें
विपक्षी नेता मारिया कोरीना मचाडो उभरें — जिससे टकराव बढ़े
देश में गुरिल्ला संघर्ष और गुटीय हिंसा फैल जाए
मादुरो की गिरफ्तारी ने न केवल वेनेजुएला बल्कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति को भी एक नए संकट मोड़ पर ला खड़ा किया है, और आने वाले हफ्तों में इसके दूरगामी प्रभाव सामने आ सकते हैं।
(प्रस्तुति – त्रिपाठी पारिजात)



