Speak Sanskrit: देश के संस्कृत विद्वानों के द्वारा पटना में स्वामी-विवेकानंद जयंती समारोह का आयोजन किया गया जिसके माध्यम से सनातन संस्कृति की विभूति स्वामी विवेकानंद की भारत व विश्वमानवता के लिये दिये गये संदेशों का स्मरण किया गया..
पटना १३ जनवरी। स्वामी विवेकानंद भारतीय नवजागरण के अग्रदूत थे।उनका कहना था कि लक्ष्य की प्राप्ति तक प्रयत्नशील रहना चाहिए। वे राष्ट्रीय चेतना के प्रेरणापुरुष माने जाते हैं। भारत ही विश्वगुरु बनने की क्षमता रखता है। उन्होंने आजीवन शान्ति और विश्वबन्धुत्व की स्थापना के लिए प्रयास किया।
उपरोक्त सभी बातें आधुनिको भव संस्कृतं वद अभियान के प्रधान संरक्षक एवं माननीय सदस्य (प्रशासकीय)राज्यलोक सेवा न्यायाधीकरण, उत्तर प्रदेश के डा अनिल कुमार सिंह ने स्वामी विवेकानंद जयंती समारोह के उद्घाटन करते हुए कहा। यह समारोह संस्कृत सम्भाषण शिविर में अन्तर्जालीय आयोजित हुआ।
आधुनिको भव संस्कृतं वद अभियान के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं विहार संस्कृत संजीवन समाज के महासचिव कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहा कि स्वामी विवेकानंद भावी पीढ़ी के लिए चार ग्रन्थ लिखे -ज्ञान योग, भक्ति योग,कर्म योग और राजयोग। उन्होंने ईश्वर की प्रत्यक्ष अभिव्यक्ति के रूप में मानवमात्र की सेवा करने का उपदेश दिया।
आधुनिको भव संस्कृतं वद अभियान की राष्ट्रीय संयोजिका एवं गंगादेवी महिला महाविद्यालय की संस्कृत विभागाध्यक्षा प्रो रागिनी वर्मा,एल एम टी महाविद्यालय सहरसाके संस्कृत विभागाध्यक्षा डॉ दीप्ति कुमारी, गंगादेवी महिला महाविद्यालय पटना के वरीय संस्कृत आचार्या डॉ बिधुबाला, केशव महंथ शरण संस्कृत महाविद्यालय फतुहा की उपस्थिति ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई.
उपरोक्त विद्वानों सहित डॉक्टर नीरा कुमारी, आधुनिको भव संस्कृतं वद अभियान की राष्ट्रीय उपाध्यक्षा डॉ लीना चौहान, डॉ रागनी कुमारी, अदिति चोला,रामनाथ पाण्डेय, राहुल कुमार,तारा विश्वकर्मा, मुरलीधर शुक्ल,दयानी शारदेय, जगजीवन विश्वकर्मा, डॉ सुशील कुमार, विकास कुमार आदि वक्ताओं ने भी विस्तार से स्वामी विवेकानंद जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला एवम् उनके बताए हुए मार्ग पर चलने का आग्रह किया।
धन्यवाद ज्ञापन डा लीना चौहान एवं ऐक्य मन्त्र अदिति चोला ने प्रस्तुत किया।



