Monday, February 23, 2026
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T20 World Cup 2026: क्यों उतरी टीम इंडिया की गाड़ी पटरी से ? – राजनीति & गलत फैसले रिंकू सिंह & अक्षर पटेल का करियर ले डूबे

T20 World Cup 2026: टीम इंडिया की गाड़ी गहरी खाई में क्यों गिरी? राजनीति और गलत फैसलों ने कैसे बिगाड़ा रिंकू सिंह और अक्षर पटेल का करियर को चौपट करने का काम किया है..

T20 World Cup 2026: टीम इंडिया की गाड़ी गहरी खाई में क्यों गिरी? जानिये, राजनीति और गलत फैसलों ने कैसे रिंकू सिंह और अक्षर पटेल के करियर चौपट करने का काम किया है..

राजनीति और क्रिकेट का टकराव

टीम इंडिया की मौजूदा स्थिति पर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर क्यों इतने प्रतिभाशाली खिलाड़ी अपनी असली क्षमता दिखाने से वंचित रह जाते हैं। इसका सबसे बड़ा कारण है राजनीतिक दबाव और चयन में असंतुलन, जिसने रिंकू सिंह और अक्षर पटेल जैसे खिलाड़ियों के करियर का नुकसान किया है।

 रिंकू सिंह का गलत इस्तेमाल

रिंकू सिंह को टीम में स्पेशलिस्ट बल्लेबाज़ के तौर पर शामिल किया गया है। लेकिन उन्हें अक्सर नंबर 7 पर बैटिंग के लिए भेजा जाता है, जहां उनके पास खेलने के लिए मुश्किल से कुछ गेंदें ही बचती हैं।

अगर उन्हें ऊपर भेजा जाए, तो मैच को फिनिश करने की नौबत ही न आए। “फिनिशर” का टैग देकर उन्हें सीमित करना उनके आत्मविश्वास को कमजोर करता है। शिवम दुबे जैसे खिलाड़ियों को प्राथमिकता देना, जो बॉलिंग में भरोसेमंद नहीं हैं, रिंकू जैसे पावर हिटर को वेस्ट करने जैसा है।

 ऑलराउंडर बनाम स्पेशलिस्ट

टीम इंडिया में अक्सर ऑलराउंडर को स्पेशलिस्ट बल्लेबाज़ों से ऊपर भेजा जाता है। ऑलराउंडर के पास दो विभागों में खुद को साबित करने का मौका होता है। लेकिन स्पेशलिस्ट बल्लेबाज़ के पास केवल एक ही मौका होता है। जब उसे उसी विभाग में स्पेस नहीं दिया जाता, तो उसका आत्मविश्वास गिरता है। यही रिंकू के साथ हुआ।

अक्षर पटेल की अनदेखी

अक्षर पटेल ने कई मौकों पर टीम इंडिया को जीत दिलाई है। T20 वर्ल्ड कप में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उनका कैच और फाइनल में कोहली के साथ साझेदारी अहम रही। बैटिंग में उन्हें ऊपर भेजा जाए, तो वे 30–40 रन बना सकते हैं।

बॉलिंग में वे लगातार विकेट निकालते हैं, भले ही कुछ रन पड़ जाएं। इसके बावजूद उन्हें बार-बार बलि का बकरा बनाया गया। उपकप्तानी छीनकर शुभमन गिल को दी गई। इस साल उन्हें C कैटेगरी कॉन्ट्रैक्ट में रखा गया।

बड़े मैचों में उनकी जगह वॉशिंगटन सुंदर को खिलाया गया, जिनकी परफॉर्मेंस निराशाजनक रही।

टीम इंडिया की रणनीतिक भूल

कुलदीप यादव जैसे वर्ल्ड-क्लास स्पिनर को बाहर रखकर “ऑलराउंडर” को खिलाना गलत है। बुमराह और अर्शदीप ने 8 ओवर में 5 विकेट लिए, लेकिन बाकी गेंदबाज़ों ने 12 ओवर में 135 रन लुटा दिए।तीन स्पेशलिस्ट गेंदबाज़ों के साथ खेलना जोखिम भरा है—किसी एक का ऑफ डे हुआ, तो मैच हाथ से निकल जाता है।

बल्लेबाज़ी की अप्रोच

आज के बल्लेबाज़ों की सोच “देखो और मारो” वाली है। कोहली महान इसलिए हैं क्योंकि उन्होंने आक्रामकता और संयम का संतुलन बनाया। उन्होंने रन बनाने के लिए सिंगल्स पर जोर दिया और फिटनेस को प्राथमिकता दी। बाकी बल्लेबाज़ हालात के हिसाब से अपना गियर बदलने में असफल रहते हैं।

सबक सीखना होगा इस हार से

टीम इंडिया की गाड़ी गहरी खाई में इसलिए गिरी क्योंकि:

राजनीति ने खिलाड़ियों की पोज़िशनिंग बिगाड़ी। ऑलराउंडर को स्पेशलिस्ट से ऊपर रखा गया। रिंकू सिंह और अक्षर पटेल जैसे खिलाड़ियों का आत्मविश्वास गिराया गया। बल्लेबाज़ों ने हालात के अनुसार अप्रोच नहीं बदली।

यह सबक साफ है—अगर टीम इंडिया को फिर से पटरी पर लाना है, तो राजनीति से ऊपर उठकर स्पेशलिस्ट खिलाड़ियों को उनकी असली भूमिका में मौका देना होगा।

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