Saudi Arab Vs Pakistan: सऊदी अरब का पाकिस्तान पर आर्थिक हमला: भारत-ईरान भी चौंके, नई भूराजनीतिक हलचल..
मध्य पूर्व की राजनीति में एक बड़ा भूचाल तब आया जब सऊदी अरब ने पाकिस्तान पर आर्थिक हमला बोल दिया। यह कदम उस समय उठाया गया जब ईरान लगातार सऊदी अरब पर हमले करता रहा और पाकिस्तान चुपचाप तमाशा देखता रहा। सऊदी अरब ने पाकिस्तान की इस चुप्पी को गद्दारी माना और उसे आर्थिक झटका देने का फैसला किया।
सऊदी अरब का आर्थिक एटम बम
सऊदी अरब ने साफ कर दिया है कि अब पाकिस्तान को बिना शर्त वित्तीय मदद नहीं दी जाएगी। भविष्य में अगर कोई फाइनेंशियल बेलआउट पैकेज दिया भी गया तो उस पर कड़ी शर्तें लागू होंगी। सऊदी अरब ने कहा कि पहले यह देखा जाएगा कि पाकिस्तान की हैसियत पैसा लौटाने की है या नहीं और दिया गया पैसा सही जगह पर खर्च हो रहा है या नहीं।
ईरान और सऊदी अरब दोनों नाराज़
ईरान पहले ही पाकिस्तान से नाराज़ है क्योंकि पाकिस्तान ने अमेरिका को अपनी एयरस्पेस का इस्तेमाल करने दिया। ईरान ने चेतावनी दी थी कि सही समय पर बदला लिया जाएगा। अब सऊदी अरब ने भी पाकिस्तान को अल्टीमेटम दे दिया है कि अगर वह ईरान पर कार्रवाई नहीं करता तो अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहे।
पाकिस्तान की संसद में उठा मामला
पाकिस्तान की संसद में विपक्षी सांसदों ने अपनी ही सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि पाकिस्तान ने पहले ईरान को फोन कर कहा “हम तुम्हारे साथ हैं” और फिर सऊदी अरब को फोन कर कहा “हम तुम्हारे भी साथ हैं”। इसके बाद ईरान और सऊदी अरब ने पाकिस्तान को साइड में बैठने को कह दिया।
भारत की कूटनीतिक चाल
इस पूरे घटनाक्रम में भारत ने बड़ा खेल खेला। सऊदी अरब पर हमले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से बात कर उन्हें भरोसा दिलाया कि भारत उनके साथ है। साथ ही भारत ने पहली बार ईरान से भी आधिकारिक संपर्क किया। विदेश सचिव विक्रम मिश्री ईरान दूतावास पहुंचे और खामेनेई की मौत पर शोक संदेश दर्ज किया।
अमेरिका की चेतावनी
इसी बीच अमेरिका ने अपने नागरिकों को मध्य पूर्व छोड़ने का निर्देश दिया है, जिससे संकेत मिलता है कि आने वाले दिनों में बड़े हमले की तैयारी हो सकती है।
इस अंतर्राष्ट्रीय घटनाक्रम से स्पष्ट है कि पाकिस्तान की दोहरी नीति उसे भारी पड़ रही है, जबकि भारत ने इस मौके पर अपनी कूटनीतिक पकड़ मजबूत कर ली है।
(त्रिपाठी पारिजात)



