America Vs Iran: अमेरिका-ईरान युद्ध में जो हाल चल रहा है उससे देख कर तो लग रहा है कि युद्ध जल्दी समाप्त नहीं होगा -ट्रंप को भी लग रहा है कि कुछ भूल तो नहींं हुई हमसे ?..
अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा संघर्ष अब एक बेहद गंभीर और निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है। पश्चिम एशिया का भू-राजनीतिक परिदृश्य इस समय पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है। ईरान की सबसे ताकतवर सैन्य संस्था इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सीधे शब्दों में चेतावनी दी है कि इस युद्ध का अंत वही तय करेंगे। यह बयान उस समय आया जब ट्रंप ने दावा किया था कि ईरान के साथ चल रहा संघर्ष जल्द ही समाप्त हो जाएगा।
ट्रंप का दावा और ईरान की प्रतिक्रिया
ट्रंप ने हाल ही में एक इंटरव्यू में कहा था कि ईरान की सैन्य ताकत लगभग खत्म हो चुकी है। उनके अनुसार, ईरान के पास न नौसेना बची है, न संचार व्यवस्था, न ही वायुसेना। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान की मिसाइलें अब कभी-कभार ही दिखाई देती हैं और उनके ड्रोन लगातार नष्ट किए जा रहे हैं। ट्रंप का दावा था कि ईरान के पास अब सैन्य दृष्टिकोण से कुछ भी शेष नहीं है।
लेकिन ईरान ने इस बयान को पूरी तरह खारिज कर दिया। IRGC ने कहा कि अमेरिका इस युद्ध को खत्म नहीं कर सकता और इस क्षेत्र का भविष्य अब ईरान के हाथों में है। ईरान के वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ब्रिगेडियर जनरल सरदार इब्राहिम जब्बारी ने तो यहां तक कह दिया कि ईरान अमेरिका के साथ कम से कम दस साल तक युद्ध लड़ने के लिए तैयार है। यह बयान स्पष्ट करता है कि ईरान मानसिक और सैन्य रूप से लंबी लड़ाई के लिए पूरी तरह तैयार है।
युद्ध की शुरुआत और खामेनेई की मौत
28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर बड़ा हमला किया था। इस हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई थी। यह घटना ईरान के लिए एक बड़ा झटका थी, लेकिन नौ दिन की देरी के बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर चुना गया। असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने यह फैसला लिया और IRGC ने भी इसका समर्थन किया।
ईरान के वरिष्ठ नेता अली लारिजानी ने कहा कि दुश्मनों को लगा था कि खामेनेई की मौत के बाद ईरान राजनीतिक संकट में फंस जाएगा। लेकिन कानूनी प्रक्रिया के तहत नए नेता का चुनाव कर लिया गया और ईरान ने यह साबित कर दिया कि वह राजनीतिक रूप से स्थिर है।
IRGC का समर्थन और सत्ता की स्थिरता
ईरान की सबसे ताकतवर सैन्य संस्था IRGC ने नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के प्रति पूरी निष्ठा जताई है। संगठन ने बयान जारी कर कहा कि वह नए नेता के आदेशों का पालन करेगा और जरूरत पड़ने पर अपनी जान तक कुर्बान करने को तैयार है। ईरान की संसद के स्पीकर ने भी मोजतबा की नियुक्ति का स्वागत किया और कहा कि उनका अनुसरण करना धार्मिक और राष्ट्रीय कर्तव्य है।
इससे यह साफ हो गया कि सत्ता परिवर्तन के बावजूद ईरान की राजनीतिक और सैन्य स्थिति स्थिर बनी हुई है।
11 दिन से जारी संघर्ष
अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध को अब 11 दिन हो चुके हैं। इस दौरान ईरान ने दिखा दिया है कि वह पीछे हटने वाला नहीं है। इजरायल और अमेरिका के हमलों के बावजूद ईरान मजबूती से डटा हुआ है। ईरान की सैन्य तैयारियां और उसके नेताओं के बयान इस ओर इशारा कर रहे हैं कि यह संघर्ष जल्द खत्म होने वाला नहीं है।
अमेरिकी सेना पर सवाल
अब यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या अमेरिकी सेना इस युद्ध में कमजोर साबित हो रही है। अमेरिका ने सोचा था कि खामेनेई की मौत के बाद ईरान झुक जाएगा और वहां अपनी मनचाही सरकार बना लेगा। लेकिन ईरान ने न केवल नया नेता चुन लिया बल्कि युद्ध के मैदान में भी मजबूती से डटा हुआ है।
ईरान के रुख से यह साफ है कि वह अमेरिका को उसी की भाषा में जवाब दे रहा है। IRGC का बयान कि “जंग का अंत हम तय करेंगे” अमेरिका के लिए एक सीधी चुनौती है।
पश्चिम एशिया का बदलता परिदृश्य
इस युद्ध ने पूरे मिडिल ईस्ट को युद्ध का मैदान बना दिया है। ईरान और अमेरिका के बीच संघर्ष का असर इराक, सीरिया, लेबनान और यमन जैसे देशों पर भी पड़ रहा है। क्षेत्रीय स्थिरता पूरी तरह से खतरे में है और तेल की कीमतों में भी उथल-पुथल देखी जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह युद्ध लंबा खिंचता है तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा। अमेरिका और ईरान दोनों ही इस संघर्ष को खत्म करने के बजाय अपनी-अपनी ताकत दिखाने में लगे हुए हैं।
ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा युद्ध सिर्फ दो देशों का संघर्ष नहीं है, बल्कि यह पूरे पश्चिम एशिया की स्थिरता और वैश्विक राजनीति को प्रभावित कर रहा है। ट्रंप के दावों के बावजूद ईरान ने साफ कर दिया है कि वह पीछे हटने वाला नहीं है। IRGC का बयान और उसकी सैन्य तैयारियां इस ओर इशारा कर रही हैं कि यह लड़ाई लंबी चलेगी।
ईरान ने यह साबित कर दिया है कि वह मानसिक और सैन्य रूप से तैयार है और अमेरिका को उसी की भाषा में जवाब देने के लिए प्रतिबद्ध है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या अमेरिका अपनी रणनीति बदलता है या ईरान अपनी दृढ़ता से दुनिया को चौंकाता है।



