Kerala & TN: देश मे हिंदुत्व की लहर नहीं सुनामी चल रही है लेकिन तमिलनाडु और केरलम मे ऐसा लग रहा है जैसे किसी और दुनिया मे है।
ये गलती उन राज्यों की नहीं बल्कि हमारी है, सोशल मीडिया के जगत मे हिंदी भाषियो का अपना एक देश है उन्हें लगता है उत्तर प्रदेश, हरियाणा, बिहार या पंजाब मे जो है वही पूरा हिंदुस्तान है। जबकि ऐसा नहीं है, भारत मे सच मे विविधता है।
महाराष्ट्र, गुजरात, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ मे बीजेपी की लहर रहती है क्योंकि ये मराठा साम्राज्य की भूमि है। ज़ब भी राष्ट्रवाद की लहर चलेगी यहाँ बीजेपी का कमल खिलेगा ही, राजस्थान, हिमाचल का एंगल अलग है। हरियाणा और उत्तरप्रदेश ने भी मोदीराज के बाद ही भगवा को सही तरह से थामा है।
वैचारिक रूप से ज़ब हम हिंदी भाषी ही अलग है तो आप उसी चश्मे से तमिलनाडु या केरलम को नहीं देख सकते। विजय ईसाई है मगर उसने एक एक मंदिर नापे है, विजय के पिता ईसाई थे मगर माँ हिन्दू। तमिल संस्कृति मे माँ के पक्ष से बेटे का पक्ष तय होता है, विजय की आस्था जिस भी धर्म मे हो कोई फर्क नहीं पड़ता।
विजय ने इसीलिए धर्म का चोला नहीं ओढ़ा और विजयगति प्राप्ति की, केरलम पहले ही कह चुका है कि उसे विकास नहीं चाहिए। कम्युनिस्ट व्यवस्था वे 1957 मे अपना चुके थे, उन्हें सिर्फ स्कूल, हॉस्पीटल और सड़को से मतलब है। कितनी ही ईसाई बहुल सीटों पर वहाँ हिन्दू जीते और इसका उल्टा भी हुआ।
तमिलनाडु और केरलम की संस्कृति हमसे बहुत अलग है, वहाँ ईसाई भी ओणम मनाते है। ये बात उत्तर भारत मे लागू नहीं होती, इसलिए यदि दक्षिण भेदना है तो आपको दक्षिण के चश्मे से देखना होगा।
तमिलनाडु मे जितने मुख्यमंत्री हुए वे सभी हिन्दू ही थे, करूणानिधि और स्टालिन नास्तिक रहे है मगर स्टालिन की पत्नी ने मंदिर मे सोने का मुकुट भी चढ़ाया है। तमिलो का मोह भंग उदयनिधि की वजह से हुआ है, भगवान मुरुगन की पहाड़ी पर ज़ब एक मुसलमान को मांस खाते देखा तब वो हिन्दू जागा लेकिन यहाँ कई अपवाद है।
तमिलो और मल्लूओ के अख़बार हमेशा काम्युनिस्ट और DMK के कण्ट्रोल मे रहे। यहाँ भारतीय राष्ट्रवाद पर फिल्मे आपको सीमित मिलेगी क्योंकि बनाने नहीं दी गयी। ये अब भी 2014 से पहले का भारत जी रहे है, जहाँ भाईचारे वाले ढकोसले होते थे।
तमिलनाडु जीतना है तो 2036 को टारगेट कीजिये, विजय 10 साल टिकना चाहिए और कुछ ऐसा हो कि विजय DMK का इको सिस्टम ध्वस्त करें। जो नया सिस्टम बनेगा उसमे बीजेपी यदि सेंधमारी करने मे कामयाब हुई तो 2036 मे आप तमिलनाडु बहुत आसानी से भेद लोगे।
केरलम हमेशा चुनौती रहेगा क्योंकि यहाँ आपको गंजे को कंघी बेचनी है, या यू कहे कि रेस्टोरेंट से खाना खाकर निकले व्यक्ति को फिर से खाना ही बेचना है। इसलिए इन दो राज्यों को आप एक अलग ही नजर से देखिये।
तमिलनाडु मे विजय का मुख्यमंत्री बनना श्रेयस्कर है, ये ज्यादा बेहतर है बजाय DMK और अन्नाद्रमुक गठबंधन करें। ना अब करूणानिधि जिंदा है ना ही जयललिता, ये दोनों पार्टियां वैसे ही लूट जायेगी। कांग्रेस पिचलग्गू ही रहने वाली है इसलिए TVK के सम्मुख आएगी तो बीजेपी ही।
(परख सक्सेना)



