Iran War: शांति की तरफ अब अमेरिका झुका – हां कर दिया ईरान की शर्तों को – अभी मगर फैसला बाकी है ट्रंप का..
अमेरिका और ईरान के बीच डील लगभग तय है – ईरान परमाणु हथियार नहीं बनाएगा, होर्मुज खुलेगा, अमेरिका पाबंदियां हटाएगा। पर असली सवाल यह है कि क्या ट्रंप इस पर मुहर लगाएंगे? जानिए पूरा माजरा।
एक तरफ बातचीत, दूसरी तरफ बमबारी। एक तरफ समझौते की उम्मीद, दूसरी तरफ मिसाइलें। पश्चिम एशिया का यही हाल है इन दिनों। अजीब सा खेल चल रहा है – शांति की मेज पर हाथ मिलाने की कोशिश हो रही है और उसी वक्त जमीन पर खून भी बह रहा है।
खबर आई है कि अमेरिका और ईरान के बीच एक बड़ी डील की रूपरेखा तैयार हो गई है। दोनों देश कुछ अहम शर्तों पर राजी हो गए हैं। पर रुको – अभी जश्न मनाने की जल्दी मत करो। क्योंकि असली मुहर लगानी है डोनाल्ड ट्रंप को। और ट्रंप साहब ने अभी तक कुछ भी साइन नहीं किया।
वेंस ने क्या कहा?
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने गुरुवार को मीडिया के सामने बात की। उन्होंने माना कि ईरान के साथ चल रही बातचीत में अच्छी प्रगति हुई है। पर साथ ही उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि प्रस्तावित MoU – यानी मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग – पर राष्ट्रपति ट्रंप की मंजूरी अभी नहीं आई है।
वेंस के शब्दों में कहें तो – “हम कुछ भाषाई बिंदुओं पर आगे-पीछे बात कर रहे हैं। काफी तरक्की हुई है। उम्मीद है कि राष्ट्रपति इस समझौते का समर्थन करेंगे – पर अभी कुछ पक्का नहीं।”
मतलब साफ है। रास्ता लगभग बन गया है। पर दरवाजा खुला है या बंद, यह अभी तय नहीं।
ईरान ने क्या-क्या मानने को कहा?
यह जानना जरूरी है कि इस डील में ईरान की तरफ से क्या-क्या वादे हैं।
पहली बात – ईरान ने साफ कहा कि उसकी परमाणु हथियार बनाने की कोई इच्छा नहीं है। यह वादा वो औपचारिक रूप से करेगा। दूसरी बात – HEU यानी हाई एनरिच्ड यूरेनियम छोड़ने पर बातचीत शुरू करने को तैयार है। और तीसरी सबसे बड़ी बात – स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलेगा और वहां बिछाई गई माइंस हटाएगा।
होर्मुज का खुलना दुनिया के लिए बहुत मायने रखता है। दुनिया का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से तेल लेता है। भारत के लिए भी यह सीधे तौर पर राहत की खबर है।
अमेरिका ने क्या देने का वादा किया?
बदले में अमेरिका भी खाली हाथ नहीं रहा। उसने चार बड़े कदम उठाने की बात कही है।
पाबंदियों में ढील – तेल पर भी। फ्रीज किए गए ईरानी फंड्स छोड़ने पर बातचीत। नौसैनिक घेराबंदी हटाना। और लेबनान में जारी जंग खत्म कराने में मदद करना।
ये चारों शर्तें ईरान के लिए काफी अहम हैं। खासकर तेल पर से पाबंदी हटना – इससे ईरान की अर्थव्यवस्था को बड़ी राहत मिलेगी।
पर जमीन पर हालात अलग हैं
कागज पर सब ठीक लग रहा है। पर असलियत देखो तो तस्वीर उतनी साफ नहीं।
गुरुवार की रात – यानी जब बातचीत चल ही रही थी – ईरान के बुशेहर प्रांत में एयर डिफेंस सिस्टम अचानक सक्रिय हो गए। ईरानी सरकारी मीडिया ने दावा किया कि अमेरिकी विमान उनकी हवाई सीमा में घुसे थे और उन्हें मार गिराया गया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड – CENTCOM – ने इसे तुरंत नकार दिया। कहा – कोई विमान नहीं गिरा।
कौन सच बोल रहा है? यह तो पता नहीं। पर इतना जरूर है कि माहौल अभी भी तनावपूर्ण है।
इसी बीच IRGC यानी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने होर्मुज के पास चार जहाजों को निशाना बनाया। इनमें से कुछ जहाजों का कनेक्शन अमेरिका से बताया जा रहा है।
और ऊपर से – अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने ईरान के सैन्य नेटवर्क से जुड़े तेल कारोबार पर नए प्रतिबंध लगाने का ऐलान कर दिया। यानी बातचीत हो रही है, पर दबाव भी बरकरार है।
अमेरिका को कितना नुकसान?
28 फरवरी 2026 को शुरू हुए इस संघर्ष में अमेरिका को कितना नुकसान हुआ है – यह 13 मई को जारी कांग्रेसनल रिसर्च सर्विस की रिपोर्ट बताती है।
कम से कम 42 अमेरिकी सैन्य विमान नष्ट हुए या बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए। पूरे अभियान की लागत 29 अरब डॉलर के करीब पहुंच गई है। 24 MQ-9 Reaper ड्रोन गंवाए – हर एक की कीमत करीब 3 करोड़ डॉलर। एक MQ-4C Triton निगरानी ड्रोन भी गिरा। 15 अमेरिकी सैनिकों की मौत हो चुकी है और 538 से ज्यादा जख्मी हैं।
यह आंकड़े बताते हैं कि यह जंग अमेरिका के लिए सस्ती नहीं रही।
गाजा में नेतन्याहू का अलग खेल
इस सबके बीच इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने अपना अलग ही खेल शुरू कर दिया है। खबर है कि उन्होंने अपनी सेना को आदेश दिया है कि गाजा के 70 फीसदी हिस्से पर कब्जा कर लो। यह कदम पश्चिम एशिया की पहले से जटिल स्थिति को और उलझा सकता है।
अब क्या होगा आगे?
सारी उम्मीदें अब ट्रंप पर टिकी हैं। अगर वो MoU पर मुहर लगाते हैं तो 60 दिन का सीजफायर हो सकता है। होर्मुज खुलेगा। दुनिया को राहत मिलेगी। तेल की कीमतें थम सकती हैं।
पर अगर डील नहीं हुई – तो यह आग और भड़केगी।
फैसला ट्रंप का है। और ट्रंप का फैसला कभी भी आ सकता है।
(त्रिपाठी पारिजात)



