Speak Sanskrit: अर्धशतक की दिशा में अग्रगामी है देवभाषा संस्कृत के संभाषण का शिक्षण शिविर..प्रारंभ हुआ अड़तालिसवां शिविर पाटलीपुत्रा नगरी की धरा से..
पटना २३ सितंबर। विहार संस्कृत संजीवन समाज पटना की ओर से आधुनिको भव संस्कृतं वद अभियान निरंतर देवभाषा संस्कृत की सेवा में समर्पित है।
आधुनिको भव संस्कृतं वद अभियान के अन्तर्गत अंतर्जालीय माध्यम से अर्थात इन्टरनेट की सहायता से ऑनलाइन कक्षाओं का आयोजन किया जाता है जिनमें संस्कृत बोलना सिखाया जाता है.
हाल ही में अभियान द्वारा ४८वां महायोगी गोपीचंद स्मृति दस दिवसीय अन्तर्जालीय अन्तर्राष्ट्रीय संस्कृत शिक्षण एवं सम्भाषण शिविर का आयोजन किया गया जो भव्य संस्कृतमय वातावरण में सम्पन्न हुआ.
इस शिविर में उद्घाटनकर्ता के रुप में अभियान के प्रधान संरक्षक एवं पूर्वगृह उत्तर प्रदेश शासन की उपस्थिति रही। साथ ही अध्यक्ष के रूप में विहार संस्कृत संजीवन समाज पटना के महासचिव एवम् आधुनिको भव संस्कृतं वद अभियान के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ मुकेश कुमार ओझा ने नेतृत्व सम्हाला.
इसी तरह शिविर के मुख्य अतिथि के रुप में अभियान के संरक्षक एवं पूर्व संयुक्त निदेशक, पेंशन विभाग, उत्तर प्रदेश शासन, श्री धर्मेन्द्रपति त्रिपाठी तथा मुख्य वक्ता के रूप में अभियान की राष्ट्रीय संयोजिका प्रो०रागिनी वर्मा उपस्थित रहीं।
शिविर के विशिष्ट अतिथि के रुप में वरिष्ठ संस्कृत प्रचारक डॉ अनिल कुमार चौबे, वरिष्ठ संस्कृत प्रचारक श्री शैलेन्द्र कुमार सिन्हा एवं बीडी महाविद्यालय पटना के पाली विभागाध्यक्ष प्रो. एचके सिंह सम्मिलित हुए.
इस अवसर पर अभियान के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष उग्र नारायण झा एवं डॉ लीना चौहान, महंत केशव संस्कृत महाविद्यालय फतुहा की सहायक आचार्या डॉ नीरा कुमारी, मगध विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग की सहायक आचार्या डॉ एकता वर्मा, डॉ दीप्ति कुमारी, मनीषा बोदरा, मुरलीधर शुक्ल, तारा विश्वकर्मा, बीजेन्द्र सिंह, डॉ विश्वजीत रुद्रपाल, मुकेश पण्डित, उमा हेनोते, वन्दना पटेरिया, मोनिका झा सहित शिविर के समस्त सदस्यों ने संस्कृत में अपने विचार व्यक्त किये।
शिविर के प्रथम दिवस संस्कृत भाषा को विचारों की अभिव्यक्ति का माध्यम बनाने की दिशा में नवीन सदस्यों को प्रोत्साहित किया गया.
इस प्रोत्साहन को व्यावहारिक रूप देते हुए अर्थात संस्कृत में अपने विचारों को बोल कर व्यक्त करने की दिशा में प्रोत्साहन हेतु शिविर के दौरान महायोगी गोपीचंद स्मृति संस्कृत प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया।
इस प्रतियोगिता में मोनिका झा एवं डॉ दीप्ति कुमारी को प्रथम पुरस्कार, डॉ एकता वर्मा, डॉ विश्वजीत रुद्रपाल एवं तारा विश्वकर्मा को द्वितीय पुरस्कार, उमा हेनोते एवं मुरलीधर शुक्ल को तृतीय पुरस्कार तथा मनीषा बोदरा,बीजेन्द्र सिंह एवं वन्दना पटेरिया को विशेष पुरस्कार प्रदान किया गया।
अपने उद्घाटन उद्बोधन में डॉ अनिल कुमार सिंह ने कहा कि सांसारिक सुख से परमात्मा की प्राप्ति असंभव है।राजसी सुख को त्यागकर माता मैनावती के आदेश पर संन्यास ग्रहण कर गोपीचंद महायोगी बने। इस तरह उन्होंने योग की महत्ता पर प्रकाश डाला।
मुख्यातिथि श्री धर्मेन्द्रपति त्रिपाठी ने कहा कि महायोगी गोपीचंद के जीवन से संदेश मिलता है कि योग ही मनुष्य का परमात्मा से मिलन कराता है। व्यावहारिक जीवन में भी योग ही नीरोग करता है।
प्रो ० रागिनी वर्मा ने शिविर सदस्यों के विचारों की प्रसंशा की साथ ही संस्कृत प्रेमियों को शिविर में आने की अपील की।
अपने अध्यक्षीय भाषण में डॉ मुकेश कुमार ओझा ने कहा कि शिविर के माध्यम से महायोगी गोपीचंद के विषय में सभी सदस्यों को जानकारी प्राप्त हुई साथ ही सभी को संस्कृत में विचारों को व्यक्त करने का अवसर भी उपलब्ध हुआ।
वैदिक मंगलाचरण का दायित्व उग्र नारायण झा ने वहन किया। संस्कृत स्वागत गीत गाकर प्रो ० रागिनी वर्मा ने आगत अतिथियों का स्वागत किया।
धन्यवाद ज्ञापन डॉ लीना चौहान ने किया तथा ऐक्य मन्त्र डॉ नीरा कुमारी ने प्रस्तुत किया।
इस दौरान डॉ लीना चौहान ने बताया कि आगामी ४९वां संस्कृत शिक्षण एवं सम्भाषण शिविर जगत् जननी मां विंध्यवासिनी देवी की स्मृति में आगामी ११ अक्टूबर से प्रारंभ होगा।



