Saturday, August 30, 2025
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Budaun Crime: बदायुं की 2 किशोर दलित लड़कियों के साथ भी 10 साल पहले भी यही हुआ था

Budaun Crime:  दस वर्ष पूर्व की इस घटना की याद इसलिए आ गई क्योंकि 26 मई 2014 को नरेन्द्र मोदी द्वारा प्रधानमंत्री पद की शपथ ग्रहण की गई थी. इसके ठीक अगले दिन ही उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में हो गया था कांड..

Budaun Crime:  दस वर्ष पूर्व की इस घटना की याद इसलिए आ गई क्योंकि 26 मई 2014 को नरेन्द्र मोदी द्वारा प्रधानमंत्री पद की शपथ ग्रहण की गई थी. इसके ठीक अगले दिन ही उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में हो गया था कांड.
 27 मई 2014 की उस दर्दनाक घटना को याद करते हुए भी तकलीफ होती है उस अपराध की. उस दिन कटरा गाँव में दो किशोर दलित लड़कियों के साथ सामूहिक दुष्कर्म और हत्या की खबर जंगल की आग की तरह फैल गई थी । दोनों चचेरी बहनें थीं।
तीसरे दिन 29 मई 2014 को बदायूं के पुलिस अधीक्षक मान सिंह चौहान ने कहा था कि पोस्टमार्टम में पाया गया है कि लड़कियों के साथ दुष्कर्म किया गया था और वे फांसी लगाकर मर गईं. अपराधियों की पहचान करने में मदद के लिए डीएनए नमूने लिए गए थे।
इसके बाद 1 जून को, यह बताया गया कि तीन आरोपियों – पप्पू यादव, अवधेश यादव और उर्वेश यादव को गिरफ्तार किया गया है और उन्होंने लड़कियों के साथ बलात्कार और हत्या की बात कबूल कर ली है, जबकि पुलिस दो अतिरिक्त संदिग्धों की तलाश जारी रखे हुए है। दो पुलिस कर्मियों, छत्रपाल यादव और सर्वेश यादव, पर आपराधिक साजिश का आरोप लगाया गया
परंतु, अचानक पूरा घटनाक्रम बिल्कुल पलट गया। दोनों लड़कियों का पोस्टमार्टम करने वाली डॉक्टर पुष्पलता पंत ने स्वीकार किया कि उन्होंने पहले कभी पोस्टमार्टम नहीं किया था, लेकिन आदेश मिलने पर उन्होंने ऐसा किया।
8 जून को उत्तर प्रदेश पुलिस के तत्कालीन डीजीपी एएल बनर्जी ने कहा, “मृतक की पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, दोनों लड़कियों में से एक के साथ दुष्कर्म नहीं हुआ था और यह ऑनर किलिंग का मामला प्रतीत होता है। हम मामले की जांच कर रहे हैं”।
इसके बाद अचानक राज्य सरकार ने मामला सीबीआई को सौंप दिया और सीबीआई ने 27 नवंबर 2014 को यह ऐलान कर दिया कि, दोनों चचेरी बहनों का यौन उत्पीड़न और हत्या नहीं की गई थी जैसा कि पुलिस ने शुरू में कहा था, बल्कि उन्होंने खुद अपनी जान ले ली थी। हालांकि, 28 अक्टूबर 2015 को POCSO अदालत ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को खारिज कर दिया।
अब दो बातें समझ लीजिए कि…
जब यह कारनामा यूपी में हुआ उस समय सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र से भी महान सत्यवादी, यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव थे।
दूसरी बात ये कि सीबीआई के इतिहास के भ्रष्टतम निदेशक के रूप में कुख्यात रंजीत सिन्हा 3 दिसंबर 2012 से 2 दिसंबर 2014 तक सीबीआई के निदेशक थे। उन पर चारा घोटाला मामले में आरोपी लालू प्रसाद यादव को बचाने में मदद करने के लिए जांच को विफल करने का आरोप भी लगा था । अदालत ने सीबीआई को दोषी ठहराया था और आदेश दिया था कि सिन्हा को मामले से हटा दिया जाए।
आज लगभग दस वर्ष पूर्व की इस घटना की याद इसलिए आ गई क्योंकि सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र से भी महान सत्यवादी, यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव आजकल सीएम योगी के खिलाफ ज्ञान बांट रहे हैं।
उन दोनों बहनों को आजतक इंसाफ नहीं मिला, और अब शायद मिलेगा भी नहीं, लेकिन आप यह तय करिए कि क्या गलत हुआ था, क्या सही हुआ था।
(सतीश चंद्र मिश्रा)
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