(Poetry)
पूछते हो तो सुनो कैसे बसर होती है
रात खैरात की सदके की सहर होती है!!
आगाज तो होता है अंजाम नहीं होता
जब मेरी कहानी में वो नाम नहीं होता!!
हंसी थमी है इन आंखों में यूं नमी की तरह
चमक उठे हैं अंधेरे भी रौशनी की तरह!!
बैठे रहे हैं रास्ता में दिल का खंडहर सजा कर
शायद इसी तरफ से एक दिन बहार गुज़रे!!
(मीना कुमारी)
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