Amit Shah का चातुर्य और दूरदृष्टि राजनीति के धरातल पर उनको कई बार चाणक्य सिद्ध कर चुकी है..अब बिहार चुनावों में फिर एक बार ये प्रमाण मिला है..
अमित शाह को भारतीय राजनीति का चाणक्य क्यों कहा जाता है आज समझ जाओगे!!
बिहार चुनाव की शुरू में भाजपा ने एक माहौल बनाया कि बिहार में हमारा मुख्यमंत्री पद का कोई चेहरा नही है…
पूरी डिबेट इसी तरफ चली गयी.. पूरा विपक्ष जो नीतीश कुमार के खिलाफ चुनाव लड़ रहा है वो नीतीश कुमार को महान बताने लगता है..
काँग्रेसी प्रवक्ता.. राजद प्रवक्ता या महागठबंधन के कोई भी प्रवक्ता नीतीश जी के प्रति सहानुभूति दिखाने लगते हैं…
एक हफ्ते में ही माहौल बनता है कि नीतीश से अच्छा कोई नही… बिहार में नीतीश ही एकमात्र नेता हैं जो मुख्यमंत्री के योग्य हैं…
राजद प्रवक्ता तो यहां तक कह देते हैं कि चुनाव बाद महागठबंधन नीतीश जी का स्वागत करेगा…
हर शख्स की जुबान पे सिर्फ नीतीश कुमार..
जिनके खिलाफ रैलियों में प्रचार करना था उन्हें विपक्ष मसीहा बताने लगा..
जो भी एंटी इनकंबेंसी नीतीश कुमार के खिलाफ थी वो खत्म हो गयी… जनता जो बदलाव चाह रही थी वो भी समझ गयी नीतीश ही सही है भैया..
सर्वे जो cm के लिए तेजस्वी को पहली पसंद बता रहे थे वो अब नीतीश को बताने लगे..
ओपिनियन पोल जो एक दो प्रतिशत के मार्जिन से टक्कर दिखा रहे थे वो अब एक तरफा भाजपा जदयू की सरकार बनवा रहे हैं..
ये बिहार चुनाव लोगों को जिंदगी भर याद रहेगा..
लोग याद रखेंगे कि 20 साल एक शख्स मुख्यमंत्री रहा और विपक्ष उसके खिलाफ जहर उगलने की जगह उस पर पूरे प्रचार में फूल बरसाता रहा…
एक लाइन में अमित शाह ने पूरा चुनाव बदल दिया..
वो लाइन थी..
हम नीतीश कुमार के नेतृत्व में चुनाव लड़ रहे हैं.. cm विधायक दल तय करेगा…
जो शख्स एक लाइन में पूरा चुनाव बदल दे उसे चाणक्य ही कहा जाएगा…
चुनाव के बाद महागठबंधन टूट जाएगा ये भी तय है..
राहुल गांधी को चुनाव प्रचार करने से मना करना लालू तेजस्वी की भारी पड़ने वाला है…
काँग्रेस के पास अखण्ड चमचे हैं.. जो सबकुछ सहन कर सकते हैं.. लेकिन अपने मालिक राहुल का अपमान नही सहन कर सकते!
(शुभद्रा मिश्रा)



