Hidma: यह घटना नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में एक निर्णायक मोड़ है, और उन हजारों लोगों के लिए राहत की खबर भी है जो वर्षों से हिंसा और भय के साये में जी रहे थे..
सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि माड़वी हिडमा की मौत नक्सल आंदोलन के लिए बहुत बड़ा झटका है। जिस PLGA बटालियन नंबर 1 को वह लंबे समय से संभाल रहा था, उसके टूटने की संभावना अब और बढ़ गई है, क्योंकि उसके बाद कोई भी दूसरा नेता उतनी ताकत और रणनीति वाला नहीं माना जाता। यही वजह है कि नक्सलियों का मनोबल बुरी तरह गिर सकता है और बड़ी संख्या में उनके सदस्य आत्मसमर्पण करने की ओर बढ़ सकते हैं।
बसवराजू की मौत के बाद हिडमा को नक्सलियों का सबसे प्रभावशाली सैन्य कमांडर माना जाता था। सुरक्षा एजेंसियों की निगाहें लगातार इस पर थीं कि आखिर कब उसे पकड़ा जाएगा या कब उसका अंत होगा। अब जब सुरक्षाबलों ने उसे भी मार गिराया है, तो सरकार का 2026 तक नक्सलवाद समाप्त करने का लक्ष्य और अधिक वास्तविकता के करीब दिखाई देने लगा है।
यह पूरी घटना यह साबित करती है कि सुरक्षा बलों की खुफिया जानकारी जुटाने की क्षमता और ऑपरेशन चलाने की ताकत पहले से कहीं अधिक मजबूत हो चुकी है। हिडमा का मारा जाना इस बात का संकेत है कि दंडकारण्य क्षेत्र में नक्सल आंदोलन का सबसे कठिन और भयावह दौर अब समाप्ति की ओर है।
आज इन जंगलों में, जहाँ कभी लोग नक्सलियों के डर से सहमे रहते थे, अब एक बार फिर सामान्य और शांत जीवन की वापसी की उम्मीद दिखाई देने लगी है। यह घटना न केवल नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में एक निर्णायक मोड़ है, बल्कि उन हजारों लोगों के लिए राहत की खबर भी है जो वर्षों से हिंसा और भय के साये में जी रहे थे।



