Bangladesh: ये सवाल या इसका जवाब भारत के लिये मायने नहीं रखता..पर आने वाले दिनों में इस मुद्दे को भारत के विरुद्ध एक अहम राजनीतिक और कूटनीतिक चुनौती बना कर पेश करने की कोशिश हो सकती है..
बांग्लादेश की अंतरिम युनूस सरकार इस समय पूरी कोशिश कर रही है कि पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को कानूनी प्रक्रिया का सामना करने के लिए वापस देश लाया जाए। अदालत से मौत की सजा मिलने के बाद उनके खिलाफ कार्रवाई लगातार तेज होती जा रही है। सरकार चाहती है कि हसीना जल्द से जल्द बांग्लादेश लौटें, लेकिन वह अभी भारत में हैं और यहीं से अपने मामले को आगे बढ़ा रही हैं।
अचानक बदला बांग्लादेश का राजनीतिक माहौल
पिछले साल अगस्त में शुरू हुए छात्र आंदोलनों ने बांग्लादेश की राजनीति को पूरी तरह हिला दिया। हिंसा भड़की, हालात बिगड़े और अंत में शेख हसीना की सत्ता गिर गई। स्थिति इतनी खराब हो गई कि उन्हें सेना के हेलिकॉप्टर से भागकर भारत आना पड़ा। तब से वे नई दिल्ली में सुरक्षा के घेरे में रह रही हैं।
हसीना पर तीन तरफ से दबाव
अब बांग्लादेश ने आधिकारिक रूप से भारत से उनके प्रत्यर्पण की मांग कर दी है। भारत ने यह अनुरोध मिलने की पुष्टि की है और कहा है कि यह मामला बेहद संवेदनशील है, इसलिए फैसला देश की कानूनी प्रक्रिया और गहन जांच के बाद ही लिया जाएगा। यानी भारत जल्दबाज़ी में कोई कदम नहीं उठाने वाला।
फांसी की सजा, प्रत्यर्पण की मांग और नई करप्शन जांच
ढाका की एक स्पेशल कोर्ट ने 2024 के छात्र प्रदर्शनों के दौरान गोलीबारी की घटनाओं के लिए शेख हसीना को “मानवता के खिलाफ अपराध” का अपराधी ठहराया और उन्हें मौत की सजा सुना दी। यह फैसला हसीना की गैरहाज़िरी में सुनाया गया। अंतरिम सरकार का कहना है कि हसीना को न्यायिक प्रक्रिया का सामना करना चाहिए, इसलिए उनके प्रत्यर्पण की मांग की गई है।
भारत और बांग्लादेश के बीच 1970 के दशक से प्रत्यर्पण समझौता मौजूद है, लेकिन राजनीतिक मामलों में किसी को वापस नहीं भेजा जाता। हालांकि “मानवता के खिलाफ अपराध” को राजनीतिक अपराध नहीं माना जाता, इसलिए कानूनी तौर पर यह अनुरोध स्वीकार किया जा सकता है। लेकिन भारत को कूटनीतिक प्रभावों को देखकर ही अंतिम निर्णय लेना होगा।
बांग्लादेश में बढ़ती अस्थिरता से चिंता
बांग्लादेश इस समय लगातार उथल-पुथल के दौर से गुजर रहा है। अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हमलों की खबरों पर भारत पहले ही चिंता जाहिर कर चुका है। अब शेख हसीना का मुद्दा दोनों देशों के रिश्तों में नया तनाव जोड़ रहा है। हसीना के करीबियों का कहना है कि वह भारत छोड़कर जाने के मूड में नहीं हैं और कानूनी लड़ाई जारी रखना चाहती हैं।
भ्रष्टाचार की जांच ने बढ़ाई मुश्किल
उधर बांग्लादेश में उनके खिलाफ कार्रवाई तेज होती जा रही है। मौत की सजा के बाद अब एंटी-करप्शन कमीशन ने उनकी संपत्तियों की जांच शुरू कर दी है। खुफिया एजेंसियों और टैक्स अधिकारियों ने हाल ही में उनके बैंक लॉकरों की तलाशी ली जिसमें दावा किया गया कि लगभग 9 किलो सोना, महंगे तोहफे और दूसरी कीमती चीजें मिलीं। आरोप है कि इनमें से कई वस्तुएं उन्होंने प्रधानमंत्री रहते हुए ली थीं, लेकिन उन्हें न तो घोषित किया गया और न ही सरकारी नियमों के अनुसार दर्ज किया गया।
अब उन पर अवैध संपत्ति और भ्रष्टाचार के नए मामले तैयार किए जा रहे हैं। यह जांच ऐसे समय में हो रही है जब अवामी लीग के लगभग हर बड़े नेता पर कार्रवाई चल रही है। विपक्ष इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बता रहा है, जबकि अंतरिम सरकार अपने कदमों को आवश्यक ठहरा रही है।
तीनों मोर्चे खुले
इस समय शेख हसीना तीन बड़े मोर्चों पर फंसी हुई हैं -मौत की सजा, बांग्लादेश का प्रत्यर्पण अनुरोध, और नई भ्रष्टाचार जांच। वैसे, आने वाले दिनों में यह मुद्दा भारत और बांग्लादेश दोनों के लिए बेहद अहम राजनीतिक और कूटनीतिक चुनौती बनकर सामने आएगा।



