Delhi Bus Gangrape: पीड़िता की दर्दभरी पुकार ने खड़े किए कई बड़े सवाल -“मैं सेक्स वर्कर हूँ तो क्या मेरी मर्जी की कोई कीमत नहीं?”
दिल्ली की एक स्लीपर बस में कथित गैंगरेप की शिकार महिला ने समाज और व्यवस्था से तीखे सवाल पूछे हैं। सेक्स वर्क, सहमति, महिला सुरक्षा, मीडिया ट्रायल और न्याय व्यवस्था पर उठे गंभीर मुद्दों की विस्तृत रिपोर्ट पढ़ें।
दिल्ली में एक स्लीपर बस के भीतर कथित सामूहिक दुष्कर्म की घटना ने न केवल कानून-व्यवस्था बल्कि समाज की सोच पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले में सामने आई महिला की कहानी सिर्फ एक अपराध की कहानी नहीं है, बल्कि उस सामाजिक नजरिए की भी तस्वीर है जिसके तहत अक्सर पीड़िता के साथ हुई घटना से ज्यादा उसके पेशे और निजी जीवन पर चर्चा होने लगती है।
महिला का सबसे पहला सवाल ही पूरे मामले का सार सामने रख देता है।
“अगर मैं सेक्स वर्क करती हूँ, तो क्या इसका मतलब यह है कि कोई भी मेरी इच्छा के खिलाफ मेरे साथ कुछ भी कर सकता है?”
उसकी आवाज में दर्द है, गुस्सा है और इंसाफ पाने का दृढ़ संकल्प भी।
आधी रात की वह घटना जिसने जिंदगी बदल दी
दिल्ली पुलिस के अनुसार, यह घटना 11 और 12 मई की दरमियानी रात की है। आरोप है कि रात लगभग 12 बजे से ढाई बजे के बीच एक स्लीपर बस में महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया।
पुलिस ने मामले में गैंगरेप और अन्य संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया है। जांच के दौरान बस के चालक और परिचालक को गिरफ्तार किया गया है। दोनों उत्तर प्रदेश के रहने वाले बताए गए हैं और दिल्ली-बिहार रूट पर चलने वाली बस से जुड़े थे।
घटना के बाद महिला की जिंदगी पूरी तरह बदल गई। वह कहती है कि अपराध से उबरना जितना कठिन था, उससे कहीं ज्यादा मुश्किल मीडिया की अत्यधिक मौजूदगी और लोगों की प्रतिक्रियाओं से निपटना रहा।
मीडिया कवरेज के बाद बदलना पड़ा घर
महिला बताती है कि घटना सामने आने के बाद कई मीडिया संस्थानों के लोग उसके घर तक पहुंच गए।
उनके कैमरे, सवाल और लगातार हो रही चर्चा ने उसकी निजी जिंदगी को पूरी तरह सार्वजनिक कर दिया।
महिला भावुक होकर कहती है कि उसके परिवार के अधिकांश लोगों को यह भी नहीं पता था कि वह आर्थिक तंगी की वजह से हाल ही में सेक्स वर्क करने लगी थी।
लेकिन घटना के बाद आसपास के लोगों को सब पता चल गया।
उसका कहना है कि लोग उसके साथ हुए अपराध पर बात कम कर रहे हैं, जबकि वह परिवार चलाने के लिए क्या काम करती थी, इस पर ज्यादा चर्चा कर रहे हैं।
उसे लगता है कि अपराधियों के बजाय समाज उसके चरित्र का फैसला करने में अधिक रुचि दिखा रहा है।
उस रात आखिर हुआ क्या?
महिला के अनुसार, वह उस रात किसी ग्राहक से मिलने नहीं निकली थी।
उसका कहना है कि वह अपने भाई के लिए कमरा बदलवाने के बाद वापस घर लौट रही थी। रास्ते में बस स्टैंड पर खड़ी एक बस के पास उसकी मुलाकात कुछ लोगों से हुई।
महिला का आरोप है कि बस के परिचालक ने उसे बातचीत के बहाने बुलाया। वह बस के दरवाजे के पास खड़ी होकर बात कर रही थी।
इसी दौरान उसे पैसे का लालच देकर यौन संबंध बनाने का प्रस्ताव दिया गया, जिसे उसने साफ तौर पर ठुकरा दिया।
महिला का दावा है कि मना करने के बावजूद उसे जबरन बस के अंदर खींच लिया गया।
उसके मुताबिक बस में कुल पांच लोग मौजूद थे। उनमें से एक व्यक्ति सो रहा था जबकि बाकी लोग उसे पूरी रात अपने साथ रखना चाहते थे।
वह कहती है कि उसने लगातार विरोध किया, लेकिन उसकी बात नहीं सुनी गई। आरोप है कि दो लोगों ने उसके साथ दुष्कर्म किया।
पुलिस की कार्रवाई पर जताया भरोसा
घटना के बाद महिला ने तुरंत पुलिस सहायता नंबर पर संपर्क किया।
उसका कहना है कि पुलिस कुछ ही मिनटों में मौके पर पहुंच गई थी।
महिला बताती है कि पुलिसकर्मियों ने उसकी बात ध्यान से सुनी, उसे थाने ले जाया गया और उसकी शिकायत दर्ज की गई। मेडिकल जांच भी कराई गई और पूरी प्रक्रिया के दौरान सहयोग दिया गया।
दिल्ली पुलिस के अनुसार, शिकायत मिलने के कुछ घंटों के भीतर ही दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया था।
बाहरी दिल्ली के पुलिस अधिकारियों ने भी कहा है कि मामले को गंभीरता से लिया गया है और कानूनी प्रक्रिया के तहत सख्त कार्रवाई की जा रही है।
मजबूरी ने धकेला इस काम की ओर
महिला की कहानी का सबसे दर्दनाक पहलू उसकी आर्थिक स्थिति है।
वह बताती है कि उसके पति लंबे समय से गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। परिवार की जिम्मेदारी लगभग पूरी तरह उसी के कंधों पर है।
उसकी तीन छोटी बेटियां हैं, जिनकी पढ़ाई और परवरिश का खर्च उठाना आसान नहीं है।
महिला कहती है कि उसने कई दूसरे काम तलाशने की कोशिश की, लेकिन इतनी आमदनी वाला कोई रोजगार नहीं मिला जिससे परिवार का खर्च चल सके।
आखिरकार कुछ समय पहले उसने सेक्स वर्क शुरू किया।
उसकी आवाज भर्रा जाती है जब वह कहती है कि कोई भी महिला सिर्फ शौक से यह रास्ता नहीं चुनती। कई बार परिस्थितियां इंसान को ऐसे फैसले लेने पर मजबूर कर देती हैं।
लेकिन मजबूरी का मतलब यह नहीं कि कोई उसकी इच्छा, सम्मान या अधिकार छीन ले।
पति ने भी उठाए सवाल
महिला के पति का कहना है कि उन्हें भी इस बात की जानकारी नहीं थी कि उनकी पत्नी परिवार चलाने के लिए क्या काम कर रही है।
उनका कहना है कि पत्नी ने परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए यह फैसला लिया था।
वे मीडिया की भूमिका पर भी सवाल उठाते हैं।
उनके मुताबिक कई लोग कैमरे लेकर घर तक पहुंच गए, नाम पूछने लगे और वीडियो बनाने लगे। इससे पूरे इलाके में चर्चा शुरू हो गई।
अब परिवार को लोगों की नजरों और सवालों का सामना करना पड़ रहा है।
उनका कहना है कि ऐसी परिस्थितियों में सामान्य जीवन जीना बेहद कठिन हो जाता है।
“मैं पीछे नहीं हटूंगी”
घटना के बावजूद महिला का हौसला टूटा नहीं है।
वह कहती है कि यह लड़ाई सिर्फ उसकी नहीं है।
उसके अनुसार, सड़क पर खड़ी हर महिला, चाहे वह किसी भी पेशे में हो, सुरक्षा और सम्मान की हकदार है।
महिला कहती है कि उसकी तीन बेटियां हैं और वह चाहती है कि उनका भविष्य सुरक्षित हो।
वह नहीं चाहती कि उसकी बेटियों को कभी वैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़े जैसा उसने किया।
इसलिए उसने फैसला किया है कि वह मुकदमे को अंत तक लड़ेगी।
उसका कहना है कि चाहे अदालतों और थानों के कितने भी चक्कर लगाने पड़ें, वह न्याय मिलने तक पीछे नहीं हटेगी।
सेक्स वर्कर होने का मतलब सहमति नहीं
इस मामले ने एक बार फिर उस महत्वपूर्ण सवाल को सामने ला दिया है जिसे लेकर अदालतें कई बार स्पष्ट टिप्पणी कर चुकी हैं।
भारत के कानून में किसी भी महिला की सहमति सबसे महत्वपूर्ण है। उसका पेशा, आर्थिक स्थिति या सामाजिक पृष्ठभूमि इस सिद्धांत को बदल नहीं सकती।
सुप्रीम कोर्ट ने भी अपने कई फैसलों में कहा है कि सेक्स वर्क करने वाली महिलाओं को भी वही संवैधानिक अधिकार प्राप्त हैं जो किसी अन्य नागरिक को मिलते हैं।
साल 2022 में शीर्ष अदालत ने स्पष्ट कहा था कि सेक्स वर्क को एक पेशे के रूप में देखा जाना चाहिए और केवल इस आधार पर किसी महिला के अधिकारों से इनकार नहीं किया जा सकता कि वह सेक्स वर्कर है।
अदालत ने यह भी कहा था कि ऐसी महिलाओं की शिकायतों को भी उतनी ही संवेदनशीलता और गंभीरता से दर्ज किया जाना चाहिए जितनी किसी अन्य पीड़िता की शिकायत को।
सहमति ही सबसे बड़ा आधार
कानून की नजर में सबसे महत्वपूर्ण बात सहमति है।
यदि किसी महिला की इच्छा के खिलाफ यौन संबंध बनाया जाता है तो वह अपराध है।
यह मायने नहीं रखता कि महिला कौन है, क्या काम करती है या उसकी सामाजिक पहचान क्या है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में पीड़िता के चरित्र, कपड़ों, पेशे या निजी जीवन पर चर्चा करने के बजाय अपराध और अपराधियों पर ध्यान केंद्रित होना चाहिए।
बहस सिर्फ एक मामले की नहीं
दिल्ली का यह मामला केवल एक आपराधिक जांच भर नहीं है।
इसने महिला सुरक्षा, सहमति, सेक्स वर्करों के अधिकार, मीडिया की जिम्मेदारी और समाज के नजरिए को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
सबसे अहम सवाल वही है जो पीड़िता ने शुरुआत में पूछा था –
“क्या किसी महिला का पेशा उसकी मर्जी को खत्म कर देता है?”
कानून का जवाब साफ है – नहीं।
और शायद यही संदेश इस पूरे मामले की सबसे महत्वपूर्ण सीख भी है।
(त्रिपाठी पारिजात)



