Detention Center: SIR और NRC पर देशभर में बहस तेज हो गई है – लोग जानना चाहते हैं कि आखिर डिटेंशन सेंटर क्या होते हैं और कैसे काम करते हैं? यूपी से असम तक तैयारियों में तेजी..
SIR (सिटिजनशिप इम्पैक्ट रजिस्टर) की तेज़ी से चल रही प्रक्रिया और NRC को लेकर बढ़ती चर्चाओं के बीच, देश में एक सवाल सबसे ज़्यादा पूछा जा रहा है—जिन लोगों की नागरिकता संदिग्ध पाई जाएगी, उनका आगे क्या होगा? इसी वजह से डिटेंशन सेंटर एक बार फिर राष्ट्रीय बहस का हिस्सा बन गए हैं।
लोग जानना चाह रहे हैं कि
डिटेंशन सेंटर असल में किसलिए बनाए जाते हैं?
इनमें किसे रखा जाता है?
क्या यहां कैदियों जैसा व्यवहार होता है?
इन सभी सवालों का जवाब सरकारी तैयारियों और कानूनों के आधार पर सामने आ रहा है।
UP में बड़ी कार्रवाई — बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों पर शिकंजा
उत्तर प्रदेश सरकार ने अवैध विदेशी नागरिकों के खिलाफ सख्त कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 17 नगर निकायों को निर्देश दिया है कि वे:
अपने क्षेत्र में काम कर रहे बांग्लादेशी और रोहिंग्या नागरिकों की सूची तैयार करें, यह सूची तत्काल कमिश्नर और IG को दें, और हर मंडल में डिटेंशन सेंटर की स्थापना की तैयारी शुरू करें।
इसी उद्देश्य से खाली सरकारी भवन, सामुदायिक केंद्र, पुलिस लाइन और थानों को संभावित डिटेंशन सेंटर के तौर पर चिन्हित किया जा रहा है।
डिटेंशन सेंटर क्यों बनाए जाते हैं?
भारत में विदेशी नागरिकों को लेकर दो महत्वपूर्ण कानून लागू होते हैं:
फॉरेनर्स एक्ट 1946 – केंद्र सरकार को अधिकार देता है कि वह अवैध विदेशी नागरिकों को वापस भेज सके।
पासपोर्ट एक्ट – बिना वैध पासपोर्ट या वीज़ा के भारत में प्रवेश करने वालों पर कार्रवाई की अनुमति देता है।
डिटेंशन सेंटर ऐसे स्थान होते हैं जहां ऐसे विदेशी नागरिकों को अस्थायी रूप से रखा जाता है। ऐसे लोग जो – जिनके दस्तावेज़ संदिग्ध हों, जो अपनी नागरिकता साबित न कर पाए हों, या जिनका केस ट्रिब्यूनल में लंबित हो। यानी यह एक अंतरिम व्यवस्था है, न कि दंड देने की प्रक्रिया।
क्या डिटेंशन सेंटर जेल होते हैं?
सामान्य तौर पर डिटेंशन सेंटर जेल नहीं माने जाते। यहां लोगों को अपराधी नहीं समझा जाता, बल्कि कानूनी प्रक्रिया पूरी होने तक अस्थायी रूप से रखा जाता है।
सरकारी गाइडलाइन के अनुसार, ऐसे सेंटरों में उपलब्ध सुविधाएं हैं:
पंखे, कूलर, साफ कमरे
बिस्तर और कंबल
पानी और भोजन
डॉक्टर और स्वास्थ्य सुविधा
बच्चों के लिए अलग व्यवस्था
भाषा सहायता और दूतावासों से संपर्क के लिए विशेष सेल
पुलिस केवल सुरक्षा और निगरानी के लिए तैनात रहती है ताकि कोई भाग न सके।
असम में डिटेंशन सेंटर की शुरुआत और देशभर में विस्तार
भारत में संगठित रूप से डिटेंशन सेंटर की अवधारणा सबसे पहले असम में विकसित हुई। फिर वर्ष 2012 में तीन जेलों के भीतर डिटेंशन ब्लॉक बनाए गए। बाद में तीन और सेंटर जोड़े गए। कुल क्षमता लगभग 1000 लोगों तक पहुंची। इसके बाद केंद्र सरकार ने सभी राज्यों को आवश्यकता अनुसार डिटेंशन सेंटर विकसित करने का निर्देश जारी किया।
आज स्थिति यह है:
असम के गोलपाड़ा में एक बड़ा नया डिटेंशन सेंटर बन रहा है।
उत्तर प्रदेश में हर मंडल में सेंटर बनाए जा रहे हैं।
कर्नाटक, पंजाब और कुछ अन्य राज्यों में भी निर्माण या पहचान का कार्य जारी है।
केंद्र सरकार ने पिछले वर्ष डिटेंशन सेंटर के लिए मॉडल मैनुअल जारी किया था जिसमें सुविधाओं, सुरक्षा और मानकों का विस्तृत विवरण दिया गया है।
डिटेंशन सेंटर को लेकर गलतफहमियां भी फैलीं
सोशल मीडिया में कई बार कहा जाता है कि डिटेंशन सेंटर में लोगों के साथ अमानवीय व्यवहार होता है। हालाँकि, सरकारी डेटा और कोर्ट के निर्देश स्पष्ट करते हैं कि:
यह जगह कैद करने के लिए नहीं, बल्कि रख-रखाव और पुनर्वास- (deportation processing) के लिए होती है। यहां रखे गए लोगों पर कोई आपराधिक आरोप नहीं होता। उन्हें उनके देश वापस भेजे जाने तक रखा जाता है।
डिटेंशन सेंटर की उत्पत्ति — 1892 में अमेरिका से शुरुआत
दुनिया का पहला आधिकारिक इमिग्रेशन डिटेंशन सेंटर 1892 में अमेरिका के न्यू जर्सी में एलिस आइलैंड पर बनाया गया था। फ्रांस में भी पुराने किलों को अस्थायी हिरासत केंद्र की तरह उपयोग किया गया।
भारत में 2009 में असम सरकार ने अवैध विदेशी नागरिकों को गायब होने से रोकने के लिए डिटेंशन सेंटर बनाए जाने का निर्णय लिया। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने 2012 और 2018 में यह स्पष्ट किया कि विदेशी नागरिकों को जेल में नहीं, बल्कि अलग और सुरक्षित डिटेंशन सेंटर में रखा जाए।
विशेष: डिटेंशन सेंटर अस्थायी व्यवस्था है, सज़ा नहीं
डिटेंशन सेंटर का उद्देश्य केवल इतना है कि
विदेशी नागरिकों की पहचान स्पष्ट हो सके,
नागरिकता से जुड़े मामलों का निपटारा हो सके,
और उन्हें सुरक्षित तरीके से उनके देश वापस भेजा जा सके।
यह बात ध्यान रखने योग्य है कि अमेरिका, यूरोप, खाड़ी देश, ऑस्ट्रेलिया—दुनिया के लगभग सभी देशों में ऐसी प्रणाली मौजूद है। हाल ही में अमेरिका ने भी हजारों भारतीय नागरिकों को अवैध प्रवास के कारण डिटेंशन सेंटर में रखकर वापस भारत भेजा था।
(प्रस्तुति -त्रिपाठी पारिजात)



