Saturday, January 24, 2026
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Pakistan: असीम मुनीर पर सोशल मीडिया का आक्रमण – ‘ऑस्कर ले लो ऑस्कर’ आई आवाजें

Pakistan: CDF बनने के बाद असीम मुनीर पर सोशल मीडिया में व्यंग्य की बौछार: “अब तो ऑस्कर ही ले आइए!” – देश की राजनीति पर जनता ने लिये मजे..

Pakistan: CDF बनने के बाद असीम मुनीर पर सोशल मीडिया में व्यंग्य की बौछार: “अब तो ऑस्कर ही ले आइए!” – देश की राजनीति पर जनता ने लिये मजे..

पाकिस्तान की राजनीति में इस समय जिस नाम की चर्चा हर दिशा में सुनाई दे रही है, वह है—जनरल असीम मुनीर। पहले सेना प्रमुख, फिर फील्ड मार्शल और अब Chief of Defence Forces (CDF) का पद संभालने के बाद, लोग मजाक में कहने लगे हैं कि पाकिस्तान में अब ऐसी कोई कुर्सी नहीं बची जिस पर मुनीर साहब न बैठ चुके हों।

सेना, सत्ता, सुरक्षा—हर जगह अब उनके ही आदेश अंतिम माने जा रहे हैं। इसी पृष्ठभूमि में, पाकिस्तान में एक नया राजनीतिक व्यंग्य जन्म ले चुका है – “जनरल साहब ने तो पाकिस्तान के सारे अवॉर्ड ले लिए… अब तो हॉलीवुड का ऑस्कर ही बाकी है!”

 ‘ऑस्कर’ वाली बात कैसे शुरू हुई?

जनरल मुनीर को CDF नियुक्त किए जाने के तुरंत बाद सोशल मीडिया पर मीम्स की बाढ़ आ गई।
एक बैठक में मजाक-मजाक में किसी सलाहकार ने कह दिया—
“सर, पाकिस्तान में तो आपकी हर इच्छा पूरी हो चुकी… अब तो बस ऑस्कर लेकर आ जाइए!”

कहते हैं कि यह सुनते ही मुनीर साहब के चेहरे पर वही चमक आ गई जो किसी नए राजनीतिक ‘पलटवार’ या ‘तख्तापलट’ के समय दिखाई देती है।

सलाहकार ने चुटकी लेते हुए और भी जोड़ दिया – “ट्रंप भाईजान तो हैं न… आपने भी तो उन्हें नोबेल दिलाने की बात कहकर व्हाइट हाउस में डेढ़ किलो बिरयानी खा ली थी!” बस, फिर कहानियों और तंज़ का दौर शुरू हो गया।

 पाकिस्तानी सोशल मीडिया का तंज़: ‘रियल-लाइफ हीरो और पॉलिटिकल एक्टर’

लोग मजाक में कह रहे हैं कि अगर पाकिस्तान की राजनीतिक उथल-पुथल पर फिल्म बनाई जाए,
तो उसमें लीड रोल किसी और का नहीं, बल्कि खुद असीम मुनीर का होना चाहिए।

क्योंकि – सत्ता बदलने की पटकथा वही लिखते हैं, सेना की भूमिका वह तय करते हैं, और राजनीतिक घटनाक्रम का निर्देशक भी वही बन जाते हैं। कुछ लोग तो यहां तक कह रहे हैं -“यदि राजनीति एक फिल्म होती, तो असीम मुनीर उसका सबसे बेहतरीन ‘मेथड एक्टर’ होते!”

संसद और संविधान भी बन गए ‘फिल्म सेट’ का हिस्सा

पाकिस्तान के राजनीतिक जानकार तो व्यंग्य में कह रहे हैं कि संसद शायद सोच रही होगी—
“सर, स्क्रिप्ट हम लिखें या आप फिर से खुद ही लिख देंगे?” नागरिक भी पूछते नज़र आ रहे हैं कि – कौन सा फैसला वास्तविक है? और कौन सा सत्ता-खेल का नया ‘सीन’?

लोगों की चुटकी इतनी आगे जा चुकी है कि कई मजाकों में पाकिस्तान की बदली हुई सत्ता संरचना को मार्वल के मल्टीवर्स से भी ज्यादा अनिश्चित बताया जा रहा है।

 ‘ऑस्कर’ वाला रेड कार्पेट—लोगों की कल्पना में तैयार

यदि वास्तव में मुनीर साहब ऑस्कर समारोह में पहुंचें, तो सोशल मीडिया उनकी ‘इंट्रो लाइन’ भी तय कर चुका है –

“वन मैन… थ्री आर्म्ड फोर्सेस… द रूलर विदआउट ए रूलबुक—फील्ड मार्शल असीम मुनीर!”

लोगों ने तो एक काल्पनिक फिल्म का क्लाइमैक्स भी लिख डाला—

पहला सीन: संसद में ‘डायरेक्टर्स कट’

दूसरा सीन: संविधान में एडिटिंग

अंतिम सीन: मुनीर साहब स्टेज पर ऑस्कर लेकर बोलते हुए – “मैं यह पुरस्कार उन लोकतांत्रिक मूल्यों को समर्पित करता हूँ जिन्हें हमने कभी सुरक्षित किया, कभी बदला, और कई बार फिर से बनाया!”

 ‘मुनीर अवॉर्ड्स’ की भी मांग उठने लगी

कई पाकिस्तानी व्यंग्यकार कह रहे हैं कि अब पाकिस्तान में एक नया अवॉर्ड शो शुरू होना चाहिए—
“The Munir Awards”, जिसमें पुरस्कार इस तरह हों –

बेस्ट पावर कंट्रोल

बेस्ट पॉलिटिकल प्लॉट ट्विस्ट

बेस्ट साइलेंट स्ट्राइक

और बेस्ट ‘रिमोट-कंट्रोल्ड गवर्नमेंट’

अंततोगत्वा कहा जा सकता है कि

सिर्फ एक सच सामने है कि पाकिस्तान में सरकारें बदलती रहती हैं, लेकिन सत्ता का असली नायक अक्सर वही रहता है—असीम मुनीर। उनके CDF बनने के बाद पाकिस्तान में जो चर्चा, मीम्स और राजनीतिक व्यंग्य चल रहे हैं, वे किसी फिल्म से कम नज़र नहीं आते।

(न्यूज़ हिन्दू ग्लोबल ब्यूरो)

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