MH370 Mystery: ये नाम है इस विमान को जो 12 साल पहले रहस्यमय तरीके से अचानक हवा में गायब हो गया था -अब फिर से शुरू हो रही है इसकी तलाश – क्या मलेशियन विमान का सच सामने आयेगा?
मलेशिया एयरलाइंस की फ्लाइट MH370 आज भी दुनिया के सबसे बड़े और डरावने रहस्यों में गिनी जाती है। यह वही विमान है, जो 8 मार्च 2014 की सुबह कुआलालंपुर से बीजिंग के लिए उड़ान भरने के कुछ ही घंटों बाद अचानक रडार से गायब हो गया था। इस विमान में 227 यात्री और 12 क्रू मेंबर, यानी कुल 239 लोग सवार थे, जिनका आज तक कोई ठोस सुराग नहीं मिल सका।
इस हादसे को और भी रहस्यमय बनाता है यह तथ्य कि विमान की ओर से कोई SOS संदेश नहीं आया, ब्लैक बॉक्स का सिग्नल नहीं मिला और लंबे समय तक मलबे का भी कोई साफ सबूत सामने नहीं आया। ऐसा लगा, मानो यह विमान आसमान से सीधे समुद्र की गहराइयों में समा गया हो। इसी वजह से MH370 को अब तक का सबसे रहस्यमयी विमान हादसा माना जाता है।
अब, पूरे 12 साल बाद, मलेशियाई सरकार ने एक बार फिर इस रहस्य से पर्दा उठाने की कोशिश शुरू की है। सरकार ने घोषणा की है कि MH370 की आधिकारिक खोज दोबारा शुरू की जाएगी। इस फैसले के पीछे न केवल नई तकनीक है, बल्कि वह उम्मीद भी है, जो इतने साल बाद भी खत्म नहीं हुई है। माना जा रहा है कि कुछ नए संकेत और तकनीकी आकलन इस फैसले की वजह बने हैं, हालांकि इनकी पूरी जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।
इस नए खोज अभियान की जिम्मेदारी फिर से Ocean Infinity नाम की कंपनी को सौंपी गई है। यह वही अमेरिकी समुद्री रोबोटिक्स कंपनी है, जिसने 2018 में हिंद महासागर के करीब 25,000 वर्ग किलोमीटर इलाके में गहराई तक तलाशी ली थी। उस समय भी अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया, लेकिन तब कोई निर्णायक सबूत हाथ नहीं लग सका।
इस बार Ocean Infinity पहले से कहीं ज्यादा उन्नत तकनीक के साथ समुद्र में उतरेगी। कंपनी अत्याधुनिक अंडरवॉटर ड्रोन, हाई-रिज़ॉल्यूशन सोनार और स्वायत्त समुद्री रोबोट्स का उपयोग करेगी, जो समुद्र की उन गहराइयों तक भी पहुंच सकेंगे, जहां पहले की खोज तकनीक नाकाम हो गई थी।
इस नए सर्च ऑपरेशन की सबसे बड़ी वजह हैं वे परिवार, जिन्होंने बीते 12 सालों में न उम्मीद छोड़ी और न ही सच्चाई की मांग। 2014 से 2017 के बीच, मलेशिया, ऑस्ट्रेलिया और चीन ने मिलकर लगभग 1,20,000 वर्ग किलोमीटर के बेहद कठिन समुद्री क्षेत्र में तलाशी अभियान चलाया था। इसे दुनिया की सबसे महंगी और चुनौतीपूर्ण खोजों में से एक माना जाता है। इसके बावजूद कोई ठोस नतीजा नहीं निकला।
चीन, जिसके 153 नागरिक MH370 में सवार थे, लगातार खोज जारी रखने की मांग करता रहा है। लापता यात्रियों के परिजनों का साफ कहना है कि जब तक सच्चाई सामने नहीं आती, तब तक जांच बंद नहीं होनी चाहिए। इसी अंतरराष्ट्रीय दबाव और नई तकनीकी संभावनाओं ने मलेशिया सरकार को एक बार फिर कदम उठाने पर मजबूर किया है।
आज भी सबसे बड़ा सवाल वही है—MH370 आखिर गया कहां?
क्या वह समुद्र के सबसे गहरे और अंधेरे हिस्से में पड़ा है?
क्या यह किसी तकनीकी खराबी का नतीजा था, या किसी इंसानी फैसले का?
यह एक दुर्घटना थी, या कुछ और?
12 साल बीत जाने के बाद भी इन सवालों का कोई ठोस जवाब नहीं मिला है। यही अनिश्चितता इस मामले को डरावना भी बनाती है और पूरी दुनिया को सच सामने आने का इंतजार करने पर मजबूर भी करती है।
अब जब खोज फिर से शुरू हो रही है, तो उम्मीद जगी है कि शायद इस बार समुद्र अपनी खामोशी तोड़े। संभव है कि 12 साल से चला आ रहा यह सस्पेंस खत्म हो जाए। क्योंकि MH370 की तलाश सिर्फ एक विमान की नहीं है, बल्कि 239 जिंदगियों के सच और उनके परिवारों के जवाब की तलाश है।
(प्रस्तुति -अर्चना शैरी)



