Sunday, August 31, 2025
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Partition 1947: आखिर ऐसा क्या था इस किताब में – बंटवारे के दौरान जिसके लिए अड़ गए थे नेहरू & जिन्ना ?

Partition 1947: आखिर इस किताब में क्या था खास? बंटवारे के दौरान जिसके लिए अड़ गए थे नेहरू और जिन्ना; पहला भाग भारत तो दूसरा पाकिस्तान के हिस्से में गया..

Partition 1947: आखिर इस किताब में क्या था खास? बंटवारे के दौरान जिसके लिए अड़ गए थे नेहरू और जिन्ना; पहला भाग भारत तो दूसरा पाकिस्तान के हिस्से में गया..

भारत के विभाजन के समय एक किताब को दो भागों में बाँटना पड़ा था। दरअसल, इस किताब को लेकर जवाहरलाल नेहरू और मोहम्मद अली जिन्ना दोनों ही अपनी-अपनी जिद पर अड़ गए थे।

भारत के बँटवारे के दौरान इस किताब को दो हिस्सों में विभाजित कर दिया गया था।

भारत और पाकिस्तान के बीच विभाजन 15 अगस्त को तो हो गया, लेकिन इसकी पीड़ा कई सालों तक बनी रही। विभाजन के समय लाखों लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया था। करोड़ों भारतीयों ने इस बँटवारे का दर्द झेला। आज भी बहुत से लोग उस दर्दनाक दृश्य को याद करके सिहर उठते हैं। इस विभाजन में भारत और पाकिस्तान के बीच सिर्फ ज़मीन के दो टुकड़े ही नहीं हुए, बल्कि कॉपी-किताबें, मेज़-कुर्सियाँ, बंदूकें, राइफलें—सब कुछ बाँटा गया। पाकिस्तान बनाने की जिद करने वाले मोहम्मद अली जिन्ना हर चीज़ को नए देश में ले जाना चाहते थे।

भारत और पाकिस्तान के बीच ज़मीन का बँटवारा रेडक्लिफ ने किया था, लेकिन बाकी सभी सामानों का विभाजन दोनों देशों की सहमति से किया जा रहा था। इस बँटवारे की देखरेख उस समय के गवर्नर जनरल लॉर्ड माउंटबेटन कर रहे थे, क्योंकि उन्हें ही इसकी ज़िम्मेदारी दी गई थी। इसी दौरान भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू और जिन्ना एक किताब को लेकर आपस में अड़ गए।

विभाजन परिषद का गठन किया गया था

दरअसल, भारत और पाकिस्तान के विभाजन के बाद माउंटबेटन की अध्यक्षता में एक विभाजन परिषद बनाई गई थी। इस परिषद के तहत दोनों देशों के बीच रक्षा, सार्वजनिक वित्त, मुद्रा और अन्य सभी मामलों को दो हिस्सों में बाँटा जा रहा था। बँटवारे के दौरान दोनों देशों के बीच कई छोटी-बड़ी चीज़ों को लेकर खूब झगड़े हुए। कई बार हालात ऐसे बने कि सिक्का उछालकर सामानों का बँटवारा किया गया।

इसी बीच, एक किताब को लेकर नेहरू और जिन्ना दोनों ही अपनी-अपनी जिद पर अड़ गए। ‘एनसाइक्लोपीडिया ऑफ़ ब्रिटैनिका’ नाम की इस किताब को दोनों देश अपने पास रखना चाहते थे। जब इस झगड़े का कोई हल नहीं निकला, तो आखिरकार इस किताब को दो भागों में बाँट दिया गया।

इसके बारे में विजय लक्ष्मी बालाकृष्णन ने अपनी किताब ‘Growing Up and Away: Narratives of Indian Childhoods: Memory, History, Identity’ में लिखा है कि ‘एनसाइक्लोपीडिया ऑफ़ ब्रिटैनिका’ को दो हिस्सों में काट दिया गया। इस किताब के साथ-साथ उस समय लाइब्रेरी में रखी डिक्शनरी को भी दो भागों में बाँट दिया गया। A से K तक का हिस्सा भारत को मिला, जबकि बाकी का हिस्सा पाकिस्तान को दे दिया गया।

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