Sanskrit: देश-विदेश में देवभाषा संस्कृत के प्रचार-प्रसार का संकल्प निरंतर व्यावहारिक रूप से गतिमान है, अब प्रारंभ हुआ ४९वां शिविर..
पटना १२ अक्टूबर। विहार संस्कृत संजीवन समाज पटना की ओर से आधुनिको भव संस्कृतं वद अभियान के अन्तर्गत आयोजित ४९ वां भगवती विन्ध्वासिनीदेवी स्मृति दस दिवसीय संस्कृत शिक्षण एवं सम्भाषण प्रशिक्षण शिविर अन्तर्जालमाध्यम द्वारा संस्कृत मय वातावरण में प्रारंभ हुआ।
इस शिविर में सम्मिलित प्रमुख व्यक्तित्वों में शिविर की अध्यक्षता का दायित्व वहन करने वाले विहार संस्कृत संजीवन समाज पटना के महासचिव एवम् आधुनिको भव संस्कृतं वद अभियान के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ मुकेश कुमार ओझा, उद्घाटन अभियान के प्रधान संरक्षक एवं पूर्वगृह सचिव डॉ अनिल कुमार सिंह, मुख्य वक्ता अभियान की राष्ट्रीय संयोजिका एवं गंगा देवी महिला महाविद्यालय पटना की संस्कृत विभागाध्यक्षा प्रो० रागिनी वर्मा, मुख्य अतिथि श्री उग्र नारायण झा, विशिष्टातिथि
अभियान के संरक्षक डॉ अनिल कुमार चौबे थे जिन्होंने अपनी उस्थिति से और विचारों के माध्यम से महत्वपूर्ण योगदान दिया।
शिविर के अन्य गणमान्य योगदाता अतिथियों में महंथ केशव संस्कृत महाविद्यालय फतुहा की सहायक आचार्या डॉ नीरा कुमारी, सुंदरवती महिला महाविद्यालय भागलपुर की संस्कृत विभागाध्यक्षा डॉ मधु कुमारी, कार्यक्रम का संस्कृत भाषा में संचालन डॉ लीना चौहान,एम एल टी महाविद्यालय सहरसा की संस्कृत विभागाध्यक्षा डॉ दीप्ति कुमारी डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय रांची के संस्कृत विभाग में सहायक आचार्या मनीषा बोदरा, संस्कृत शिक्षक पटना के मुरलीधर शुक्ल सम्मिलित रहे।
अन्य महत्वपूर्ण संस्कृत शिक्षकों में मध्य प्रदेश प्रांत सहसंयोजिका तारा विश्वकर्मा, पश्चिम बंगाल प्रांत सहसंयोजिका दयानी शारदे उपस्थित थीं वहीं साथ में दिल्ली के संस्कृत शोध छात्र शुभम् शर्मा, दिल्ली प्रांत सह संयोजक डॉ देवेश प्रकाश आर्य सहित शिविर के सभी सदस्यों ने अपनी सक्रिय उपस्थिति संस्कृत प्रचार-प्रसार के संकल्प को सशक्त किया।
अपने अध्यक्षीय भाषण में डॉ मुकेश कुमार ओझा ने कहा कि नवरात्र के शुभावसर पर भगवती विन्ध्वासिनीदेवी देवी के स्मृति में संस्कृत में विचारों व्यक्त करना गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि मां विंध्यवासिनी धर्म की रक्षिका और अधर्म का विनाश करनेवाली हैं।
डॉ अनिल कुमार सिंह ने अपने उद्घाटन भाषण के दौरान अहम विचार देते हुए कहा कि पुत्र कुपुत्र हो सकता है, परन्तु माता कुमाता नहीं हो सकती। माँ भगवती की आराधना की दिशा में विचार देते हुए उन्होंने बताया कि नवरात्र में दुर्गा सप्तशती पाठ मानव जीवन के लिए आवश्यक है।
प्रो ० रागिनी वर्मा ने कहा कि विंध्यवासिनी देवी की कृपा से ही मानव जीवन का कल्याण संभव है। उन्होंने संस्कृत शिक्षण एवं सम्भाषण शिविर की महत्ता पर विस्तार से प्रकाश डाला। डॉ लीना चौहान ने कहा कि संस्कृत भाषा के बिना भारत आत्म निर्भर नहीं हो सकता।
डॉ नीरा कुमारी ने कहा कि संस्कृत भाषा का ज्ञान सभी भारतवासी को होना चाहिए। इसी तरह डॉ मधु कुमारी ने कहा कि संस्कृत शिक्षण एवं सम्भाषण शिविर में धारा प्रवाह बोलने का अवसर मिलता है।
उग्र नारायण झा ने वैदिक मंगलाचरण का दायित्व वहन किया तो वहीं डॉ लीना चौहान ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के संचालन सहित ऐक्य मन्त्र सुन्दर प्रस्तुतिकरण तारा विश्वकर्मा द्वारा दर्शित हुआ।
मनीषा बोदरा, डॉ अनिल कुमार सिंह, अनिल कुमार चौबे एवं शुभम् शर्मा ने संस्कृत गीत गाकर सभी शिविर सदस्यों को मन्त्र मुग्ध कर दिया।
राष्ट्रीय संयोजिका प्रो०रागिनी वर्मा ने बताया कि चतुर्थ दीक्षांत समारोह 6 दिसंबर को दिल्ली स्थित दौलतराम महाविद्यालय में आयोजित होगा जिसमें शिविर के सभी सदस्यों को डॉ मिथिलेश कुमारी मिश्र संस्कृत साधक सम्मान से सम्मानित किया जाएगा।



