Solar Pannel: लोग आमतौर पर पूछते हैं कि सोलर पैनल सर्दियों के मौसम में कैसे काम करता है जब सूरज की गर्मी नर्मी में बदल जाती है और कोहरा भी होता है ठंड भी
भारत में सौर ऊर्जा का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। बिजली के बढ़ते बिल से राहत पाने और अपनी बिजली की जरूरत का एक हिस्सा खुद पूरा करने के लिए बड़ी संख्या में लोग घरों की छतों पर रूफटॉप सोलर पैनल लगवा रहे हैं, लेकिन सोलर सिस्टम को लेकर कई तरह की गलतफहमियां भी लोगों के बीच मौजूद हैं। इनमें सबसे आम सवाल यह है कि क्या बारिश, बादल और सर्दियों के मौसम में भी सोलर पैनल बिजली बनाते हैं या धूप कम होते ही उनका काम लगभग बंद हो जाता है?
इसका सीधा जवाब है – हां, सोलर पैनल बारिश और ठंड के मौसम में भी बिजली बनाते हैं। सोलर पैनलों को बिजली पैदा करने के लिए सूरज की गर्मी की नहीं, बल्कि सूर्य की रोशनी की जरूरत होती है। इसलिए तापमान कम होने या मौसम ठंडा पड़ने से सोलर सिस्टम अपने आप बंद नहीं हो जाता, हालांकि बादल, बारिश, कोहरा और कम धूप की वजह से बिजली उत्पादन की मात्रा जरूर घट सकती है।
सोलर पैनल को गर्मी नहीं, सूर्य की रोशनी चाहिए
सोलर पैनल फोटोवोल्टिक यानी PV तकनीक पर काम करते हैं। इस तकनीक में सूर्य की रोशनी को सीधे विद्युत ऊर्जा में बदला जाता है। यही वजह है कि यह धारणा सही नहीं है कि सोलर पैनल तभी अच्छी तरह काम करेंगे जब बाहर बहुत तेज गर्मी हो।
दरअसल, बहुत ज्यादा तापमान कई सोलर पैनलों की विद्युत दक्षता को प्रभावित कर सकता है। अपेक्षाकृत ठंडे तापमान में सोलर सेल बेहतर विद्युत प्रदर्शन कर सकते हैं, बशर्ते उन्हें पर्याप्त सूर्य की रोशनी मिल रही हो। यानी सर्दियों का ठंडा मौसम अपने आप में सोलर सिस्टम के लिए नुकसानदेह नहीं है। असली फर्क इस बात से पड़ता है कि पैनल तक कितनी रोशनी पहुंच रही है।
बारिश के दिनों में कितनी बिजली बनती है?
बारिश के दौरान आसमान में घने बादल छाए रहने के बावजूद सूर्य की कुछ रोशनी धरती तक पहुंचती रहती है। यह बिखरी हुई रोशनी भी सोलर पैनलों को बिजली पैदा करने में सक्षम बनाती है। हालांकि साफ आसमान और सीधी तेज धूप वाले दिन की तुलना में बादलों के दौरान बिजली उत्पादन काफी कम हो सकता है।
उदाहरण के तौर पर, 3 किलोवाट क्षमता वाला एक सामान्य रूफटॉप सोलर सिस्टम अच्छे मौसम में प्रतिदिन करीब 10 से 12 यूनिट बिजली पैदा कर सकता है। वहीं लगातार बारिश, घने बादल और बेहद खराब मौसम की स्थिति में यही उत्पादन घटकर लगभग 4 से 5 यूनिट तक रह सकता है। यानी मौसम के आधार पर बिजली उत्पादन में करीब 50 से 60 फीसदी तक की कमी आ सकती है, हालांकि वास्तविक आंकड़ा जगह, पैनल की गुणवत्ता, छत की दिशा, पैनलों के झुकाव और उपलब्ध धूप पर निर्भर करेगा।
यह भी समझना जरूरी है कि हर बारिश वाले दिन उत्पादन एक जैसा नहीं होगा। हल्के बादलों वाले दिन बिजली उत्पादन अपेक्षाकृत बेहतर रह सकता है, जबकि बहुत घने बादल और लगातार मूसलाधार बारिश की स्थिति में उत्पादन काफी नीचे जा सकता है।
क्या बारिश होते ही सोलर पैनल बंद हो जाते हैं?
नहीं, केवल बारिश होने से सोलर पैनल बंद नहीं होते। जब तक कुछ प्राकृतिक रोशनी उपलब्ध है, पैनल बिजली बनाते रह सकते हैं। हां, रोशनी जितनी कम होगी, बिजली का उत्पादन भी उतना ही कम होगा।
अगर आसमान पर बहुत घने बादल हों और बारिश इतनी तेज हो कि सूर्य की रोशनी बेहद कम मात्रा में जमीन तक पहुंच रही हो, तो सोलर सिस्टम का उत्पादन बहुत कम स्तर पर आ सकता है। रात में पैनल बिजली पैदा नहीं करते क्योंकि उस समय सूर्य की रोशनी उपलब्ध नहीं होती। ऐसे समय में ग्रिड कनेक्शन या बैटरी स्टोरेज वाला सिस्टम घर की बिजली जरूरतों को पूरा करने में मदद कर सकता है।
बारिश सोलर पैनलों के लिए फायदेमंद भी हो सकती है
बारिश का मतलब केवल बिजली उत्पादन में कमी नहीं है। मानसून का मौसम सोलर पैनलों की सफाई के लिहाज से भी उपयोगी साबित हो सकता है। गर्मी और सूखे मौसम में पैनलों की कांच वाली सतह पर धूल, मिट्टी और प्रदूषण के कण जमा होते रहते हैं, जिससे सूर्य की रोशनी का एक हिस्सा पैनल की सतह तक ठीक से नहीं पहुंच पाता और बिजली उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
मूसलाधार बारिश के दौरान पानी पैनलों पर जमा धूल और गंदगी को काफी हद तक धो देता है। बारिश के बाद जब आसमान साफ होता है और तेज धूप निकलती है, तो साफ पैनल सूर्य की रोशनी को बेहतर तरीके से ग्रहण कर सकते हैं। हालांकि यह जरूरी नहीं कि हर जगह बारिश के बाद पैनल पूरी तरह साफ हो जाएं। कुछ इलाकों में बारिश के पानी के साथ खनिज या दूसरी गंदगी सतह पर रह सकती है, इसलिए जरूरत के मुताबिक मैनुअल सफाई भी करनी पड़ सकती है।
सर्दियों में सोलर पैनल कितनी बिजली बनाते हैं?
सर्दियों में सोलर पैनलों की कार्यक्षमता को लेकर भी काफी भ्रम है। ठंडे तापमान में पैनल अच्छी विद्युत दक्षता के साथ काम कर सकते हैं, लेकिन सर्दियों में कुल बिजली उत्पादन कई बार कम दिखाई देता है। इसकी मुख्य वजह ठंड नहीं, बल्कि कम धूप के घंटे और सूर्य की स्थिति होती है।
सर्दियों में दिन छोटे होते हैं और सूर्य जल्दी अस्त हो जाता है। इसके अलावा सूर्य आसमान में अपेक्षाकृत कम ऊंचाई पर रहता है, जिससे पैनलों पर पड़ने वाली सीधी धूप की अवधि और तीव्रता प्रभावित हो सकती है। उत्तर भारत के कई हिस्सों में कोहरा और धुंध भी सुबह के समय सूर्य की रोशनी को रोकते हैं। ऐसे में पैनल देर से प्रभावी तरीके से बिजली बनाना शुरू कर सकते हैं।
इसलिए सर्दियों में एक ओर कम तापमान पैनल की दक्षता के लिए अच्छा हो सकता है, लेकिन दूसरी ओर छोटे दिन, कम धूप और कोहरा कुल दैनिक बिजली उत्पादन को कम कर सकते हैं।
कोहरा और बादल भी डालते हैं असर
सोलर सिस्टम के उत्पादन पर तापमान से ज्यादा महत्वपूर्ण सूर्य की रोशनी की उपलब्धता है। हल्के बादलों के बीच भी पैनल बिखरी हुई रोशनी से बिजली बनाते रहते हैं, लेकिन घने बादलों की मोटी परत उत्पादन को काफी कम कर सकती है।
सर्दियों में घना कोहरा भी बड़ी भूमिका निभाता है। अगर सुबह कई घंटों तक कोहरा छाया रहे तो पैनलों को पर्याप्त रोशनी नहीं मिलती और उस अवधि में बिजली उत्पादन बहुत कम रह सकता है। जैसे-जैसे कोहरा हटता है और सूर्य की रोशनी बढ़ती है, उत्पादन भी धीरे-धीरे बढ़ने लगता है।
क्या सर्दियों में सोलर पैनल लगवाना सही फैसला है?
सिर्फ इस डर से सोलर पैनल लगाने का फैसला टालना उचित नहीं है कि सर्दियों या बारिश में बिजली कम बनेगी। सोलर सिस्टम पूरे साल काम करने के लिए लगाए जाते हैं और मौसम के साथ उनके उत्पादन में उतार-चढ़ाव होना सामान्य बात है।
किसी सोलर सिस्टम की सफलता को किसी एक दिन की बिजली से नहीं आंकना चाहिए। यह देखना ज्यादा महत्वपूर्ण है कि सिस्टम पूरे साल औसतन कितनी बिजली पैदा करता है और उससे घर की कुल बिजली खपत का कितना हिस्सा पूरा होता है। गर्मियों में लंबे समय तक मिलने वाली धूप उत्पादन बढ़ा सकती है, जबकि मानसून और सर्दियों में बादल तथा कोहरा इसे कुछ समय के लिए कम कर सकते हैं।
पैनल की दिशा और सफाई भी बेहद महत्वपूर्ण
मौसम के अलावा सोलर पैनलों की दिशा और उनका झुकाव भी बिजली उत्पादन को प्रभावित करता है। अगर पैनलों पर आसपास के पेड़, इमारत या किसी अन्य संरचना की छाया पड़ती रहती है, तो साफ धूप वाले दिन भी सिस्टम अपनी संभावित क्षमता के मुताबिक बिजली नहीं बना पाएगा।
इसी तरह पैनलों की सतह पर धूल और गंदगी लंबे समय तक जमा रहने से भी उत्पादन प्रभावित हो सकता है। बारिश कुछ हद तक प्राकृतिक सफाई कर देती है, लेकिन जरूरत पड़ने पर पैनलों की नियमित जांच और सफाई करना उनकी बेहतर कार्यक्षमता बनाए रखने में मदद करता है। इसलिए सोलर सिस्टम लगवाते समय केवल पैनलों की क्षमता पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी जगह, दिशा, छाया और रखरखाव पर भी ध्यान देना चाहिए।
आखिर कितनी बिजली बनाएगा आपका सोलर सिस्टम?
किसी सोलर सिस्टम से रोज कितनी यूनिट बिजली बनेगी, इसका एक निश्चित आंकड़ा बताना मुश्किल है। 3 किलोवाट का सिस्टम किसी साफ और धूप वाले दिन करीब 10 से 12 यूनिट के आसपास उत्पादन कर सकता है, लेकिन बादल, बारिश या कोहरे के कारण यही उत्पादन काफी कम हो सकता है।
इसमें मौसम के अलावा आपके शहर का स्थान, छत की दिशा, पैनल का झुकाव, धूप मिलने के घंटे, पैनलों की दक्षता, छाया और सिस्टम की तकनीकी स्थिति जैसे कई कारक शामिल होते हैं। इसलिए सोलर सिस्टम लगवाते समय इंस्टॉलेशन कंपनी से केवल अधिकतम क्षमता पूछने के बजाय अपने क्षेत्र में अनुमानित वार्षिक उत्पादन की जानकारी लेना ज्यादा उपयोगी रहेगा।
बारिश और ठंड में सोलर पैनल काम करते हैं या नहीं?
कुल मिलाकर बात बिल्कुल साफ है – बारिश और सर्दियों में सोलर पैनल काम करते हैं। उन्हें बिजली बनाने के लिए सूरज की गर्मी नहीं, बल्कि रोशनी चाहिए। इसलिए तापमान गिरने से पैनल बंद नहीं होते, लेकिन जब बादल, बारिश या कोहरे की वजह से सूर्य की रोशनी कम होती है तो बिजली उत्पादन भी उसी अनुपात में घट सकता है।
यानी मानसून या सर्दियों के दौरान सोलर सिस्टम से कम बिजली मिलना सामान्य बात है और इसका मतलब यह नहीं है कि सिस्टम खराब हो गया है। सोलर ऊर्जा को समझने का सबसे सही तरीका किसी एक दिन के उत्पादन को देखने के बजाय पूरे साल के औसत उत्पादन और उससे होने वाली बिजली की बचत को देखना है। यही आंकड़ा बताता है कि रूफटॉप सोलर सिस्टम वास्तव में घर की ऊर्जा जरूरतों को कितनी अच्छी तरह पूरा कर रहा है।
(अर्चना शैरी)



