Wednesday, February 4, 2026
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Speak Sanskrit: 39वां वर्द्धमान महावीर स्मृति अन्तर्जालीय संस्कृत शिक्षण एवं सम्भाषण शिविर सम्पन्न

Speak Sanskrit:  'जयतु संस्कृतम् ! जयतु भारत राष्ट्रम्' के उद्घोष के साथ देवभाषा संस्कृत के प्रचार-प्रसार की दिशा में 39वाँ ऑनलाइन संस्कृत शिक्षण एवं सम्भाषण शिविर सम्पन्न हुआ..

Speak Sanskrit:  ‘जयतु संस्कृतम् ! जयतु भारत राष्ट्रम्’ के उद्घोष के साथ देवभाषा संस्कृत के प्रचार-प्रसार की दिशा में 39वाँ ऑनलाइन संस्कृत शिक्षण एवं सम्भाषण शिविर सम्पन्न हुआ..

पटना 22 दिसंबर। जैन-धर्म में अहिंसा परमो धर्म: तथा सत्यं धर्मस्य मूलम् पर विशेष बल दिया गया है।जीव हत्या निषिद्ध है। शाकाहारी भोजन पर्यावरण के आवश्यक है। महावीर ने अपने सिद्धांतों में समन्वयवादी दर्शन को अपनाया, जिसका वर्णन योगशास्त्र और गीता में भी है। विश्व में शांति स्थापित करने के लिए सर्वाधिक उपयुक्त है तथा सनातन संस्कृति के लिए भी !

उपरोक्त सभी बातें आधुनिको भव संस्कृतं वद अभियान के प्रधान संरक्षक और माननीय सदस्य (प्रशासकीय) लोक सेवा न्यायाधीकरण उत्तर प्रदेश सरकार के डॉक्टर अनिल कुमार सिंह ने वर्द्धमान महावीर स्मृति अन्तर्जालीय अन्तर्राष्ट्रीय दशदिवसात्मक संस्कृत शिक्षण एवं सम्भाषण के निरन्तर 39 वें समापन समारोह का उद्घाटन करते हुए कही।

अपने अध्यक्षीय भाषण में विहार संस्कृत संजीवन समाज के महासचिव एवम् आधुनिको भव संस्कृतं वद अभियान के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ मुकेश कुमार ओझा ने कहा कि संस्कृत भाषा का ज्ञान भारतीय संस्कृति, सभ्यता और संस्कार को जानने के लिए आवश्यक है।

संस्कृत भारत की आत्मा,प्राण, प्रज्ञा, जीवन -दर्शन, दृष्टि एवं कलेवर है। संस्कृत के बिना भारत की कल्पना भी संभव नहीं है। पूर्व संयुक्त निदेशक पेंशन उत्तर प्रदेश सरकार के श्री धर्मेन्द्रपति त्रिपाठी मुख्यातिथि के रूप में अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार में संस्कृतानुरागियों को भाग लेना होगा।

इस अवसर पर अभियान की संयोजिका प्रो रागिनी वर्मा, उपाध्यक्ष श्री उग्र नारायण झा एवं डॉ लीना चौहान, मुख्य वक्ता शैलेन्द्र कुमार सिन्हा, विशिष्टातिथि डॉ अनिल कुमार चौबे,प्रो एच के सिंह, डॉ बिधु बाला, डॉ नीरा कुमारी डॉ सुशील कुमार आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

इस अवसर पर वर्द्धमान महावीर संस्कृत सम्भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें तारा विश्वकर्मा एवं डॉ रागनी कुमारी को प्रथम पुरस्कार, विमलेश पाण्डेय एवं बीजेन्द्र सिंह को द्वितीय पुरस्कार तथा मुरलीधर शुक्ल एवं रामनाथ पाण्डेय को तृतीय पुरस्कार प्रदान किया गया।

वैदिक मंगलाचरण श्री उग्र नारायण झा, धन्यवाद ज्ञापन डा लीना चौहान तथा ऐक्य मन्त्र डॉ नीरा कुमार ने प्रस्तुत किया।

राष्ट्रीय संयोजिका प्रो रागिनी वर्मा ने बताया कि 11 जनवरी से चालीसवां शिविर महासरस्वती स्मृति संस्कत सम्भाषण शिविर प्रारंभ होगा।

(दस दिवसीय ऑनलाइन शिविर के माध्यम से संस्कृत बोलना सीखें – संपर्क सूत्र -9555642611)

 

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