Love Story: यह आंखों देखी कहानी युग के दोस्त अर्जुन वर्मा ने लिखी, जो उस दिन पार्क में युग के साथ मौजूद था..
युग पांडे को नेपाल की नूरा से प्रेम हो गया। उसने नूरा के सामने विवाह का प्रस्ताव रखा, लेकिन नूरा ने उसे ठुकरा दिया। नूरा के परिवार ने उसका निकाह किसी और से करवा दिया। निकाह के छह महीने बाद नूरा के पति ने उसे तलाक दे दिया। नूरा अपने माता-पिता के घर लौट आई और वहीं रहने लगी।
तीन महीने बाद, नूरा का पूर्व पति फिर से निकाह की बात करने लगा और उससे कहा कि वह उसके पिता के साथ हलाला कर ले, फिर वह उसे तलाक दे देगा और वे दोनों दोबारा निकाह कर लेंगे। नूरा को यह बात पसंद नहीं आई।
दस दिन बाद, नूरा अपनी सहेली निशा के साथ पार्क घूमने गई। वहाँ उसने देखा कि युग पांडे अपने दो दोस्तों के साथ बैठा है। नूरा की नजर जैसे ही युग पर पड़ी, उसके होंठ कांपने लगे, उसका शरीर थरथराने लगा। ऐसा लग रहा था कि वह युग से कुछ कहना चाहती है, लेकिन हिम्मत नहीं जुटा पा रही थी।
कुछ देर खड़े रहने के बाद, नूरा ने हिम्मत की और इशारे से युग को अपनी ओर बुलाया। युग भी यह दृश्य देखकर स्तब्ध रह गया, लेकिन फिर धीरे-धीरे नूरा की ओर बढ़ा।
नूरा ने अपनी सहेली निशा से कहा, “निशा, तू यहीं रुक, मैं अभी आती हूँ।” फिर उसने युग का हाथ पकड़ा और उसे जल्दी-जल्दी पार्क के एकांत कोने में ले गई, जहाँ सिर्फ़ वे दोनों थे। वहाँ पहुँचकर नूरा ने युग से कहा, “युग, मैं तुमसे एक बात पूछना चाहती हूँ।” युग ने कहा, “पूछो, नूरा।” नूरा ने पूछा, “क्या तुमने विवाह कर लिया?” युग ने जवाब दिया, “कॉलेज में मैं एक नूरा नाम की लड़की से प्रेम करता था। उसी से मेरा विवाह हो चुका है।”
नूरा समझ गई और दुखी मन से बोली, “उस नूरा ने तो विवाह नहीं किया, उसने कहीं और निकाह कर लिया।” युग ने कहा, “भले ही विवाह के फेरे नहीं हुए, लेकिन मैंने उसी को अपनी दुल्हन मान लिया है, सात जन्मों के लिए। मैं किसी और से विवाह कर ही नहीं सकता। नूरा का शरीर मेरे पास नहीं है, लेकिन उसकी आत्मा हमेशा मेरे साथ है।”
नूरा ने पूछा, “अगर नूरा सचमुच तुमसे विवाह करने आए, तो क्या तुम कर लोगे?” युग ने जवाब दिया, “यह असंभव है, लेकिन अगर वह खुद मुझसे कहे, तो मैं अवश्य करूँगा।” यह सुनकर नूरा की आँखों में आँसू आ गए। उसने युग के माथे को चूम लिया और रोते हुए बोली, “युग, तुम्हारी नूरा आज तुमसे प्यार की भीख माँगती है। मैं तुमसे विवाह करना चाहती हूँ। मेरा शरीर भले ही पवित्र न हो, लेकिन मेरी आत्मा पूरी तरह पवित्र है।”
युग ने नूरा का हाथ चूमते हुए कहा, “नूरा, मुझे तुम्हारे शरीर से नहीं, तुम्हारी आत्मा से प्रेम है। तुम्हारा शरीर जैसा भी हो, मेरे लिए पवित्र है।” दोनों ने एक-दूसरे के साथ मोबाइल नंबर साझा किए। इसके बाद, युग और नूरा ने विवाह कर लिया। नूरा ने हिंदू धर्म स्वीकार कर लिया, और तीन महीने बाद उसके माता-पिता ने भी हिंदू धर्म अपना लिया।
यह आंखों देखी कहानी युग के दोस्त अर्जुन वर्मा ने लिखी, जो उस दिन पार्क में युग के साथ मौजूद था। अर्जुन का भी विवाह नूरा की सहेली निशा से हो गया, जो उस दिन नूरा के साथ पार्क में थी। निशा को भी हलाला और तलाक की प्रथा पसंद नहीं थी, इसलिए उसने भी हिंदू धर्म अपनाकर अर्जुन से विवाह कर लिया।
(प्रस्तुति -प्रीति गौतम)