T20 World Cup 2026: हमारी टीम के आसपास भी कोई नहीं है रिकॉर्ड के मामले में। तो एक मैच से टीम खराब कैसे हो सकती है?..
सुपर 8 के पहले मैच में जब अफ्रीका ने भारत को हरा दिया, तो भारत में बहुत सारे क्रिकेट प्रेमियों को लगने लगा कि भारतीय टीम अब आगे नहीं बढ़ पाएगी। कप्तान, कोच और खिलाड़ियों की जमकर आलोचना होने लगी, कोई कह रहा था ये टीम लापरवाह है, कोई कह रहा था ये टीम कभी नहीं जीत सकती।
लेकिन तब भी मैंने कहा था कि इसमें कप्तान या कोच की कोई बड़ी गलती नहीं है। 12 वर्ल्ड कप मैचों के बाद हम एक मैच हारे थे। और वो भी वही टीम हारी थी जो पिछले दो साल से लगभग अस्सी प्रतिशत मैच जीत रही है। हमारी टीम के आसपास भी कोई नहीं है रिकॉर्ड के मामले में। तो एक मैच से टीम खराब कैसे हो सकती है? हाँ, उस दिन हमने अच्छा प्रदर्शन नहीं किया था, लेकिन टीम बेकार नहीं थी, जैसा कि अगले दो मैचों में साबित हो गया।
आज वेस्ट इंडीज के खिलाफ प्रेशर मैच में हमारी टीम हर समय मुकाबले में बनी रही। पहले ओवर से लेकर आखिरी ओवर तक मैच 60-40 के बीच रहा और हमारा पलड़ा थोड़ा भारी रहा। खिलाड़ियों ने दबाव लिया और शानदार प्रदर्शन किया।
हाँ, कमियाँ अभी भी हैं, कैच छूट रहे हैं, मिसफील्डिंग हो रही है। और कप्तान से एक छोटी सी गलती ये हो रही है कि हार्दिक को जैसे केवल चार ओवर निकालने वाले गेंदबाज़ की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। यार, यही वो गेंदबाज़ है जिस पर चैंपियन कप्तान रोहित और धोनी आखिरी ओवर डलवाते थे और वो मैच जिताता था। थोड़ा विश्वास दिखाइए। वो हिम्मती गेंदबाज़ है, आत्मविश्वास मिलेगा तो और बेहतर करेगा।
जब विंडीज़ का पहला विकेट गिरा, तो उस समय मुझे लगा कि वहाँ पर बुमराह को तुरंत लाना चाहिए था। हम खुशकिस्मत रहे कि दो ओवर बाद बुमराह आए और एक ही ओवर में दो विकेट निकालकर मैच पर पकड़ मजबूत कर दी। नहीं तो दिक्कत हो सकती थी। अंत में भी बुमराह और अर्शदीप सिंह ने कमाल की गेंदबाज़ी की और विंडीज़ को 200 तक नहीं जाने दिया।
बल्लेबाज़ी में संजू सैमसन ने अपने करियर की सबसे बेहतरीन पारी खेली, 50 गेंदों में नाबाद 97 रन की शानदार पारी, वो भी ऐसे मौके पर जब टीम को जीत बेहद ज़रूरी थी। ये पारी लंबे समय तक याद रखी जाएगी। साथ ही तिलक वर्मा ने 15 गेंदों में 27 रन बनाकर मैच का रुख हमारे पक्ष में बनाए रखा, और शिवम दुबे ने दबाव के समय दो चौके लगाकर संजू का बेहतरीन साथ दिया। दबाव में उनका खेल वाकई काबिल-ए-तारीफ है। अभिषेक ने फिर निराश किया, वरुण का लगातार तीसरा मैच साधारण गया। लेकिन बदलाव इसका समाधान नहीं है। इन्हीं को खिलाना चाहिए।
अब सेमीफाइनल में इंग्लैंड से मुकाबला तय हो चुका है। वर्ल्ड कप से पहले मैंने जो टॉप चार टीमें बताई थीं- भारत, अफ्रीका, न्यूज़ीलैंड और ऑस्ट्रेलिया। उनमें से तीन पहुँच चुकी हैं। ऑस्ट्रेलिया नहीं पहुँची, लेकिन मैंने दो डार्क हॉर्स बताए थे— इंग्लैंड और अफगानिस्तान। इंग्लैंड सच में डार्क हॉर्स की तरह खेल रही है। कभी लग रहा है कप जीत जाएगी, कभी लग रहा है अगला मैच हार जाएगी। मुझे अब भी उम्मीद है कि फाइनल भारत और दक्षिण अफ्रीका क्रिकेट टीम के बीच होगा, जैसा मैंने पहले कहा था।
अंत में बस यही कहना महत्वपूर्ण होगा कि क्रिकेट में लॉजिक ढूँढिए। हर हार को फिक्सिंग या साजिश से मत जोड़िए। टीम पर भरोसा रखिए। दो साल से जो टीम लगातार जीत रही है, वो एक मैच हारकर खराब नहीं हो जाती। कमियाँ हर टीम में होती हैं, लेकिन भरोसा सबसे बड़ी ताकत है। बस यही गुजारिश है, हवा-हवाई बातों पर नहीं, खेल की समझ पर विश्वास रखिए।
(गोविन्द परिहार)



